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मोटर वाहन अधिनियम कल्याणकारी कानून, मुआवजे के मामले में उदारता जरूरी : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक निजी बीमा कंपनी की मुआवजे के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम कल्याणकारी कानून है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में घायल या मृतक के परिजनों को शीघ्र व उचित मुआवजा प्रदान करना है। ऐसे मामलोें को निपटने के लिए उदार दृष्टिकोण की आवश्यकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में पुलिस को सूचना देने में कुछ देरी हुई है लेकिन इसे आधार बनाकर मुआवजे से इनकार नहीं किया जा सकता।
पलवल के मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति को 10 अक्तूबर 2015 को एक कार चालक ने तेज गति से और लापरवाही से वाहन चलाते हुए टक्कर मार मार दी थी। दुर्घटना में युवक की मौत हो गई थी। एमएसीटी पलवल ने सितंबर 2017 में अपने आदेश में बीमा कंपनी को 30,88,172 रुपये का मुआवजा मृतक के परिवार को देने का बीमा कंपनी को आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने इसी आदेश को चुनौती दी है। अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने में देरी महत्वहीन है। जबकि एक आपराधिक मुकदमे के दौरान यह प्रासंगिक हो सकता है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे के निर्धारण के लिए इसे अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। यह ध्यान में रखना चाहिए कि मोटर वाहन अधिनियम कल्याणकारी कानून है और इसका उद्देश्य मोटर वाहन दुर्घटना में घायल हुए व्यक्तियों या ऐसे सड़क दुर्घटनाओं में दुर्भाग्य से मरने वाले व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों को तत्काल मुआवजा प्रदान करना है। ऐसे मामलों में एफआईआर अक्सर जल्दबाजी में दर्ज की जाती है और इसमें घटना का सटीक विवरण नहीं हो सकता है। ऐसे मामलों में प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने पर भी कोई और एफआईआर दर्ज करवा सकता है।
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पलवल के मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति को 10 अक्तूबर 2015 को एक कार चालक ने तेज गति से और लापरवाही से वाहन चलाते हुए टक्कर मार मार दी थी। दुर्घटना में युवक की मौत हो गई थी। एमएसीटी पलवल ने सितंबर 2017 में अपने आदेश में बीमा कंपनी को 30,88,172 रुपये का मुआवजा मृतक के परिवार को देने का बीमा कंपनी को आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने इसी आदेश को चुनौती दी है। अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने में देरी महत्वहीन है। जबकि एक आपराधिक मुकदमे के दौरान यह प्रासंगिक हो सकता है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे के निर्धारण के लिए इसे अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। यह ध्यान में रखना चाहिए कि मोटर वाहन अधिनियम कल्याणकारी कानून है और इसका उद्देश्य मोटर वाहन दुर्घटना में घायल हुए व्यक्तियों या ऐसे सड़क दुर्घटनाओं में दुर्भाग्य से मरने वाले व्यक्तियों के परिवार के सदस्यों को तत्काल मुआवजा प्रदान करना है। ऐसे मामलों में एफआईआर अक्सर जल्दबाजी में दर्ज की जाती है और इसमें घटना का सटीक विवरण नहीं हो सकता है। ऐसे मामलों में प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने पर भी कोई और एफआईआर दर्ज करवा सकता है।
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