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Panchkula News: पंचकूला निगम चुनाव में चंद्रमोहन की रणनीति फेल, सुधा भारद्वाज को मिली शिकस्त
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21 साल बाद नहीं दोहरा सके पुराना इतिहास, भीतरघात और बदले समीकरण कांग्रेस पर पड़े भारी
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने साफ कर दिया कि इस बार पंचकूला की राजनीतिक हवा पूरी तरह बदल चुकी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन बिश्नोई के लिए यह चुनाव राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल माना जा रहा था, लेकिन तमाम चुनावी कोशिशों के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी सुधा भारद्वाज जीत हासिल नहीं कर सकीं।
यह मुकाबला केवल मेयर पद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे सीधे तौर पर श्याम लाल बंसल और चंद्रमोहन की साख की लड़ाई के रूप में देखा गया। चंद्रमोहन ने 1996, 2000 और 2005 के विधानसभा चुनावों में श्याम लाल बंसल को हराया था, लेकिन 21 साल बाद बदले राजनीतिक समीकरणों में वह अपनी करीबी सहयोगी सुधा भारद्वाज को जीत दिलाने में नाकाम रहे।
कांग्रेस की हार के प्रमुख कारण
राजनीतिक जानकारों के अनुसार सुधा भारद्वाज का पहली बार चुनावी मैदान में उतरना कांग्रेस के लिए कमजोर कड़ी साबित हुआ। वहीं पूर्व मेयर अपिंदर कौर का चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल होना भी कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचा गया। इसके अलावा टिकट वितरण के बाद पार्टी में बढ़ी अंदरूनी कलह और बागियों को समय रहते नहीं मना पाना भी कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर भारी पड़ा। चुनाव परिणामों ने यह संकेत दे दिया कि इस बार भाजपा ने पंचकूला में मजबूत संगठन और रणनीति के दम पर कांग्रेस का किला भेद दिया।
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने साफ कर दिया कि इस बार पंचकूला की राजनीतिक हवा पूरी तरह बदल चुकी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन बिश्नोई के लिए यह चुनाव राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल माना जा रहा था, लेकिन तमाम चुनावी कोशिशों के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी सुधा भारद्वाज जीत हासिल नहीं कर सकीं।
यह मुकाबला केवल मेयर पद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे सीधे तौर पर श्याम लाल बंसल और चंद्रमोहन की साख की लड़ाई के रूप में देखा गया। चंद्रमोहन ने 1996, 2000 और 2005 के विधानसभा चुनावों में श्याम लाल बंसल को हराया था, लेकिन 21 साल बाद बदले राजनीतिक समीकरणों में वह अपनी करीबी सहयोगी सुधा भारद्वाज को जीत दिलाने में नाकाम रहे।
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कांग्रेस की हार के प्रमुख कारण
राजनीतिक जानकारों के अनुसार सुधा भारद्वाज का पहली बार चुनावी मैदान में उतरना कांग्रेस के लिए कमजोर कड़ी साबित हुआ। वहीं पूर्व मेयर अपिंदर कौर का चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल होना भी कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचा गया। इसके अलावा टिकट वितरण के बाद पार्टी में बढ़ी अंदरूनी कलह और बागियों को समय रहते नहीं मना पाना भी कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर भारी पड़ा। चुनाव परिणामों ने यह संकेत दे दिया कि इस बार भाजपा ने पंचकूला में मजबूत संगठन और रणनीति के दम पर कांग्रेस का किला भेद दिया।
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