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यहां इलाज नहीं आसां... ये पीजीआई है और डॉक्टर साहब का फोन आना है
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चंडीगढ़। पीजीआई में डॉक्टरों से परामर्श के लिए मरीज और उनके तीमारदार तमाम परेशानियां झेलकर पंजीकरण कराते हैं, बावजूद इसके इलाज नहीं मिल पा रहा। कारण, टेली कंसल्टेशन में पंजीकरण के बावजूद डॉक्टर की कॉल आने में तीन से चार दिन का विलंब होना है। इससे मरीज काफी परेशान हैं। हालांकि पीजीआई प्रशासन का कहना है कि इस विलंब का कारण टेलीकंसल्टेशन के मरीजों की संख्या का ज्यादा होना है। इससे डॉक्टरों के लिए उसी दिन सभी मरीजों को परामर्श देना संभव नहीं हो पा रहा है।
सेक्टर-22 निवासी हरजोत कौर ने बताया कि पेट संबंधी परेशानी होने पर उन्होंने पीजीआई में टेली कंसल्टेशन के जरिये परामर्श लेने का प्रयास किया। एक साथ सात मोबाइल से कॉल करने पर एक से संपर्क संभव हो पाया और बमुश्किल पंजीकरण कराया। इसके बाद सुबह से देर शाम तक डॉक्टर की कॉल आने का इंतजार करते रहे, लेकिन कॉल नहीं आई। पंजीकरण के बाद कर्मचारी ने कॉल करके बस इतना बता दिया कि शाम तक डॉक्टर खुद कॉल कर परामर्श देंगे। समस्या गंभीर होने के चलते अंत में हरजोत ने निजी डॉक्टर को दिखाया। ठीक ऐसी ही समस्या सेक्टर-32 निवासी सुरेंद्र सिंह को भी आई। बच्चे को डिहाइड्रेशन और बुखार होने पर उन्होंने कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन आराम नहीं होने पर पीजीआई में जैसे-तैसे पंजीकरण कराया। पंजीकरण के बाद सुरेंद्र भी डॉक्टर की कॉल आने का इंतजार करते रह गए और तीन दिन बाद जब बच्चे की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो उसे पीजीआई की इमरजेंसी में भर्ती कराना पड़ा।
बॉक्स
हजारों मरीजों का फोन पर इलाज बेहद मुश्किल
स्थिति यह है कि टेली कंसलटेशन सुविधा के तहत शुरुआती दौर में एक से डेढ़ हजार मरीजों को फोन के जरिए परामर्श दिया जा रहा था। यह संख्या बढ़कर अब चार हजार से ज्यादा हो गई है। पीजीआई के विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित फोन लाइन और सीमित समय सीमा के अंदर हजारों मरीजों को कॉल कर उनका इलाज करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।
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कोट
शारीरिक ओपीडी में मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर भी डॉक्टर के लिए उन्हें परामर्श देना आसान होता है। मरीज के सामने होने पर डॉक्टर आसानी से उन्हें बातें समझा देते हैं। फोन पर यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल होती है। संभव है इसके कारण, समय पर कॉल न आने की शिकायत सामने आ रही हो। इसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
डॉ. नवीन पांडेय, ओपीडी प्रभारी, पीजीआई
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सेक्टर-22 निवासी हरजोत कौर ने बताया कि पेट संबंधी परेशानी होने पर उन्होंने पीजीआई में टेली कंसल्टेशन के जरिये परामर्श लेने का प्रयास किया। एक साथ सात मोबाइल से कॉल करने पर एक से संपर्क संभव हो पाया और बमुश्किल पंजीकरण कराया। इसके बाद सुबह से देर शाम तक डॉक्टर की कॉल आने का इंतजार करते रहे, लेकिन कॉल नहीं आई। पंजीकरण के बाद कर्मचारी ने कॉल करके बस इतना बता दिया कि शाम तक डॉक्टर खुद कॉल कर परामर्श देंगे। समस्या गंभीर होने के चलते अंत में हरजोत ने निजी डॉक्टर को दिखाया। ठीक ऐसी ही समस्या सेक्टर-32 निवासी सुरेंद्र सिंह को भी आई। बच्चे को डिहाइड्रेशन और बुखार होने पर उन्होंने कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन आराम नहीं होने पर पीजीआई में जैसे-तैसे पंजीकरण कराया। पंजीकरण के बाद सुरेंद्र भी डॉक्टर की कॉल आने का इंतजार करते रह गए और तीन दिन बाद जब बच्चे की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो उसे पीजीआई की इमरजेंसी में भर्ती कराना पड़ा।
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हजारों मरीजों का फोन पर इलाज बेहद मुश्किल
स्थिति यह है कि टेली कंसलटेशन सुविधा के तहत शुरुआती दौर में एक से डेढ़ हजार मरीजों को फोन के जरिए परामर्श दिया जा रहा था। यह संख्या बढ़कर अब चार हजार से ज्यादा हो गई है। पीजीआई के विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित फोन लाइन और सीमित समय सीमा के अंदर हजारों मरीजों को कॉल कर उनका इलाज करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।
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शारीरिक ओपीडी में मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर भी डॉक्टर के लिए उन्हें परामर्श देना आसान होता है। मरीज के सामने होने पर डॉक्टर आसानी से उन्हें बातें समझा देते हैं। फोन पर यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल होती है। संभव है इसके कारण, समय पर कॉल न आने की शिकायत सामने आ रही हो। इसे दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
डॉ. नवीन पांडेय, ओपीडी प्रभारी, पीजीआई