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ओपीडी की दवा की दुकान बंद, मरीज कहां से खरीदेंगे दवाइयां
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चंडीगढ़। पीजीआई की न्यू ओपीडी में सोमवार से मरीजों के मौके पर पंजीकरण कर डॉक्टर को दिखाने की सुविधा मिलने जा रही है। वहीं, डॉक्टर से परामर्श केबाद मरीज दवा कहां से लेंगे, कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जबकि ओपीडी में हजारों मरीज पहुंचते हैं। यहां पर अभी केवल एक जनऔषधि केंद्र ही खुलेगा।
न्यू ओपीडी के बेसमेंट में संचालित दवा की दुकान बंद है। दुकान का पूर्व संचालक ताला लगाकर गायब है, जबकि पीजीआई प्रशासन ने अब जिसे दुकान अलॉट की है, उसे पजेशन नहीं मिला। पीजीआई में मरीजों के दबाव को देखते हुए न्यू ओपीडी बेसमेंट में एक केमिस्ट के अलावा तीसरे और चौथे तल पर भी खोले जाने का प्रावधान है, लेकिन यहां तो एक भी संचालित नहीं हो रही है।
एक दिन में आते हैं 12 से 14 हजार मरीज
न्यू ओपीडी में सामान्य तौर पर एक दिन में 12 से 14 हजार मरीज आते हैं। सोमवार से ओपीडी की पुरानी व्यवस्था बहाल हो रही है। ताजा स्थिति यह है कि महज एक जन औषधि केंद्र से हजारों मरीजों को दवा लेना पड़ेगा। उधर, मरीजों का कहना है कि जन औषधि केंद्र पर सभी दवाइयां उपलब्ध नहीं होती हैं।
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पुराने संचालक पर करोड़ों का जुर्माना
पीजीआई प्रशासन ने केमिस्ट की दुकान केपुराने संचालक को अप्रैल 2021 में नोटिस जारी कर दुकान खाली करने को कहा था, क्योंकि उसका टेंडर फरवरी 2021 में समाप्त हो चुका है। नोटिस में यह भी लिखा गया है कि अगर दुकान खाली कर कागजात जमा नहीं किए तो तय किराए से 5 गुना ज्यादा हर्जाना देना होगा। केमिस्ट की दुकान का किराया 90 लाख प्रतिमाह है। संचालक ने न तो किराया जमा किया न दुकान सरेंडर की।
कोट-
केमिस्ट दुकान संचालक को एक-दो दिन में पजेशन मिल जाएगा। इसके बाद मरीजों को दवाइयां खरीदने में दिक्कत नहीं आएगी। दुकान का टेंडर किया जा चुका है।
-कुमार गौरव, डीडीए पीजीआई
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न्यू ओपीडी के बेसमेंट में संचालित दवा की दुकान बंद है। दुकान का पूर्व संचालक ताला लगाकर गायब है, जबकि पीजीआई प्रशासन ने अब जिसे दुकान अलॉट की है, उसे पजेशन नहीं मिला। पीजीआई में मरीजों के दबाव को देखते हुए न्यू ओपीडी बेसमेंट में एक केमिस्ट के अलावा तीसरे और चौथे तल पर भी खोले जाने का प्रावधान है, लेकिन यहां तो एक भी संचालित नहीं हो रही है।
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एक दिन में आते हैं 12 से 14 हजार मरीज
न्यू ओपीडी में सामान्य तौर पर एक दिन में 12 से 14 हजार मरीज आते हैं। सोमवार से ओपीडी की पुरानी व्यवस्था बहाल हो रही है। ताजा स्थिति यह है कि महज एक जन औषधि केंद्र से हजारों मरीजों को दवा लेना पड़ेगा। उधर, मरीजों का कहना है कि जन औषधि केंद्र पर सभी दवाइयां उपलब्ध नहीं होती हैं।
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पुराने संचालक पर करोड़ों का जुर्माना
पीजीआई प्रशासन ने केमिस्ट की दुकान केपुराने संचालक को अप्रैल 2021 में नोटिस जारी कर दुकान खाली करने को कहा था, क्योंकि उसका टेंडर फरवरी 2021 में समाप्त हो चुका है। नोटिस में यह भी लिखा गया है कि अगर दुकान खाली कर कागजात जमा नहीं किए तो तय किराए से 5 गुना ज्यादा हर्जाना देना होगा। केमिस्ट की दुकान का किराया 90 लाख प्रतिमाह है। संचालक ने न तो किराया जमा किया न दुकान सरेंडर की।
कोट-
केमिस्ट दुकान संचालक को एक-दो दिन में पजेशन मिल जाएगा। इसके बाद मरीजों को दवाइयां खरीदने में दिक्कत नहीं आएगी। दुकान का टेंडर किया जा चुका है।
-कुमार गौरव, डीडीए पीजीआई