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जीएमसीएच में गैस्ट्रो, न्यूरो और प्लास्टिक सर्जरी के विशेषज्ञ नहीं
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चंडीगढ़। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 में विशेषज्ञ डॉक्टरों के न होने पर मरीजों को लौटाया जा रहा है। वहीं, ओपीडी खुलने के बाद गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट और प्लास्टिक सर्जन के बिना अस्पताल में मरीजों के इलाज का दावा किया जा है।
आलम यह है कि अस्पताल में दूर-दराज से पहुंचने वाले मरीजों को यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि उनकेमर्ज के इलाज के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। इससे मरीजों को इधर-उधर धक्के खाने पड़ रहे हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञों के लिए विज्ञापन जारी किया जा चुका है, लेकिन योग्य उम्मीदवार नहीं मिले। उधर, मरीज लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
कोट
पहले कोविड के कारण इलाज नहीं मिला और अब न्यूरो विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने की बात कहकर जीएमसीएच से लौटाया जा रहा है। आखिर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को क्यों भुगतना पड़ रहा है।
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-संदीप कौशल, लुधियाना
प्लास्टिक सर्जरी विभाग में इलाज के लिए आई थी, लेकिन अस्पताल पहुंचकर पता चला कि विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं हैं। मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की वजह से परेशान होना पड़ रहा है। जब पूरी ओपीडी चल रही है तो कम से कम डॉक्टर तो मिलने चाहिए।
-आशा ठाकुर, हिमाचल प्रदेश
कोरोना काल में विशेषज्ञों ने छोड़ा
जीएमसीएच-32 के दो गैस्ट्रोएंटोलॉजिस्ट, एक प्लास्टिक सर्जन, एक हड्डीरोग विशेषज्ञ और एक न्यूरोलॉजिस्ट ने कोरोना काल में इस्तीफा दे दिया था। प्लास्टिक सर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट के एक-एक पद पहले से खाली थे। अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों का कहना है कि विशेषज्ञ सरकारी सेवा में आना नहीं चाहते। इस कारण विज्ञापन जारी होने के बावजूद कोई रुचि नहीं दिखा रहा।
कोट-
विशेषज्ञ डॉक्टरों केरिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। जहां तक मरीजों को होने वाली परेशानी की बात है तो इस संबंध में उन्हें पंजीकरण केसमय ही सूचना दे दी जाती है।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32
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आलम यह है कि अस्पताल में दूर-दराज से पहुंचने वाले मरीजों को यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि उनकेमर्ज के इलाज के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। इससे मरीजों को इधर-उधर धक्के खाने पड़ रहे हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञों के लिए विज्ञापन जारी किया जा चुका है, लेकिन योग्य उम्मीदवार नहीं मिले। उधर, मरीज लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।
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कोट
पहले कोविड के कारण इलाज नहीं मिला और अब न्यूरो विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने की बात कहकर जीएमसीएच से लौटाया जा रहा है। आखिर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को क्यों भुगतना पड़ रहा है।
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-संदीप कौशल, लुधियाना
प्लास्टिक सर्जरी विभाग में इलाज के लिए आई थी, लेकिन अस्पताल पहुंचकर पता चला कि विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं हैं। मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की वजह से परेशान होना पड़ रहा है। जब पूरी ओपीडी चल रही है तो कम से कम डॉक्टर तो मिलने चाहिए।
-आशा ठाकुर, हिमाचल प्रदेश
कोरोना काल में विशेषज्ञों ने छोड़ा
जीएमसीएच-32 के दो गैस्ट्रोएंटोलॉजिस्ट, एक प्लास्टिक सर्जन, एक हड्डीरोग विशेषज्ञ और एक न्यूरोलॉजिस्ट ने कोरोना काल में इस्तीफा दे दिया था। प्लास्टिक सर्जन और न्यूरोलॉजिस्ट के एक-एक पद पहले से खाली थे। अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों का कहना है कि विशेषज्ञ सरकारी सेवा में आना नहीं चाहते। इस कारण विज्ञापन जारी होने के बावजूद कोई रुचि नहीं दिखा रहा।
कोट-
विशेषज्ञ डॉक्टरों केरिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। जहां तक मरीजों को होने वाली परेशानी की बात है तो इस संबंध में उन्हें पंजीकरण केसमय ही सूचना दे दी जाती है।
-डॉ. सुधीर गर्ग, चिकित्सा अधीक्षक जीएमसीएच-32