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अवैध विज्ञापन से अटा है शहर, अधिकारी बेखबर
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सेक्टर 28 में पेड़ पर टंगा बैनर, जिसकी नहीं ली गई थी अनुमति। अमर उजाला
- फोटो : 16ctynavdeep01
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चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल में प्रशासन के सख्त नियम अब कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। अवैध विज्ञापनों से शहर अटा पड़ा है, जबकि अधिकारी बेखबर हैं। इन विज्ञापनों के खिलाफ किसे कार्रवाई करनी है, इसे लेकर भी असमंजस है। नगर निगम के रोड डिवीजन, विज्ञापन विभाग और अतिक्रमण हटाओ दस्ते के बीच तालमेल की काफी कमी है। तीनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने में लगे हैं।
शहर में हार्डिंग, बैनर या किसी भी प्रकार के विज्ञापन के लिए वैसे तो काफी सख्ती है, लेकिन जब तक शिकायत न मिले तब तक कोई कार्रवाई नहीं होती है। दक्षिण के सेक्टरों में बुरा हाल है। बिजली के पोल से लेकर चौकों पर कई बोर्ड टंगे हुए हैं। रोड विंग सड़कों और रोड गलियों तक ही सीमित रह जाता है, वहीं अतिक्रमण हटाओ दस्ता मार्केट से अतिक्रमण हटाने तक सीमित है। विज्ञापन विभाग सिर्फ अनुमति देता है। अनुमति के अनुसार विज्ञापन का आकार, जगह या संख्या देखने का काम वह नहीं करता। इसी का लाभ लोग धड़ल्ले से उठाते हैं।
पूर्व आयुक्त ने बनाई थी कमेटी, आज तक नहीं बनी रिपोर्ट
पूर्व आयुक्त केके यादव ने 7 दिसंबर 2020 को एक कमेटी बनाई थी। इसमें बीएंडआर विभाग के हेडक्वार्टर के एसडीई, क्षेत्रीय एसडीई या जूनियर इंजीनियर, अतिक्रमण हटाओ दस्ते के क्षेत्रीय निरीक्षक को रखा गया था। इसके अलावा हेडक्वार्टर के एसडीई को कमेटी का नोडल ऑफिसर भी बनाया गया था। टीम को हर सेक्टर में जाकर सर्वे कर अवैध और मानक से ज्यादा विज्ञापनों की रिपोर्ट देनी थी। वहीं, निगम के आर्किटेक्ट से क्षेत्र में तय मानक के अनुसार विज्ञापन का आकार व स्वीकृति के आधार पर रिपोर्ट देनी थी। दोनों रिपोर्ट के आधार पर संबंधित व्यक्ति को एक तय सीमा का नोटिस देना था। उसके बाद कार्रवाई करनी थी। सर्वे की शुरुआत भी सेक्टर-7 से हुई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट की जानकारी किसी के पास नहीं है।
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कोट-
बिना अनुमति विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई है। नियमानुसार जिस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी होगी, तत्काल की जाएगी।
-आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम
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शहर में हार्डिंग, बैनर या किसी भी प्रकार के विज्ञापन के लिए वैसे तो काफी सख्ती है, लेकिन जब तक शिकायत न मिले तब तक कोई कार्रवाई नहीं होती है। दक्षिण के सेक्टरों में बुरा हाल है। बिजली के पोल से लेकर चौकों पर कई बोर्ड टंगे हुए हैं। रोड विंग सड़कों और रोड गलियों तक ही सीमित रह जाता है, वहीं अतिक्रमण हटाओ दस्ता मार्केट से अतिक्रमण हटाने तक सीमित है। विज्ञापन विभाग सिर्फ अनुमति देता है। अनुमति के अनुसार विज्ञापन का आकार, जगह या संख्या देखने का काम वह नहीं करता। इसी का लाभ लोग धड़ल्ले से उठाते हैं।
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पूर्व आयुक्त ने बनाई थी कमेटी, आज तक नहीं बनी रिपोर्ट
पूर्व आयुक्त केके यादव ने 7 दिसंबर 2020 को एक कमेटी बनाई थी। इसमें बीएंडआर विभाग के हेडक्वार्टर के एसडीई, क्षेत्रीय एसडीई या जूनियर इंजीनियर, अतिक्रमण हटाओ दस्ते के क्षेत्रीय निरीक्षक को रखा गया था। इसके अलावा हेडक्वार्टर के एसडीई को कमेटी का नोडल ऑफिसर भी बनाया गया था। टीम को हर सेक्टर में जाकर सर्वे कर अवैध और मानक से ज्यादा विज्ञापनों की रिपोर्ट देनी थी। वहीं, निगम के आर्किटेक्ट से क्षेत्र में तय मानक के अनुसार विज्ञापन का आकार व स्वीकृति के आधार पर रिपोर्ट देनी थी। दोनों रिपोर्ट के आधार पर संबंधित व्यक्ति को एक तय सीमा का नोटिस देना था। उसके बाद कार्रवाई करनी थी। सर्वे की शुरुआत भी सेक्टर-7 से हुई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट की जानकारी किसी के पास नहीं है।
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बिना अनुमति विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की योजना बनाई है। नियमानुसार जिस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी होगी, तत्काल की जाएगी।
-आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम