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सीबीआई जज ने खुद पर आरोपों का दिया जवाब

Sat, 28 Aug 2021 02:56 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 28 Aug 2021 02:56 AM IST
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CBI Judge Replied to the allegations against himself
चंडीगढ़। डेरा सच्चा सौदा के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या के मामले में सीबीआई जज सुशील कुमार ने खुद पर लगे आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने अपनी टिप्पणियां सीलबंद लिफाफे में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को सौंप दी हैं। सभी पक्षों ने टिप्पणियों पर अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। सीबीआई ने केस ट्रांसफर करने का निर्णय भी हाईकोर्ट पर छोड़ दिया। वहीं, हाईकोर्ट ने सीबीआइ कोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी की फुटेज को जज की टिप्पणियों का हिस्सा बताते हुए सीलबंद लिफाफे में रखे जाने का आदेश दिया। साथ ही सीबीआई अदालत के फैसले पर दो सितंबर तक रोक लगा दी है। सीबीआई 26 अगस्त को अपना फैसला सुनाने जा रही थी।
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यह है याचिका : रंजीत सिंह के बेटे जगसीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है कि केस में लगातार सुनवाई टाली जाती रही। जगसीर ने सीबीआई जज और वकील पर आरोप लगाते हुए केस में एक तरफा फैसला सुनाने का अंदेशा जताया है। इस कारण केस को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट से पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की किसी अन्य सीबीआई अदालत को ट्रांसफर किया जाए।
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रंजीत सिंह के बेटे का आरोप
रंजीत सिंह के बेटे जगसीर सिंह ने याचिका में बताया कि 2002 में उनके पिता की हत्या हुई थी। मामले में आरोपी सिरसा डेरा प्रमुख राम रहीम के आरोपी होने की वजह से केस लंबे समय तक चलता रहा। सीबीआई जज आने से सुनवाई लगातार टाली जा रही है। कई बार सरकारी वकील भी सुनवाई को टालने की मांग कर देते हैं। याची ने कहा कि एकतरफा फैसला सुनाया जा सकता है। साथ ही यह भी बताया गया कि सीबीआई जज के खिलाफ एक अन्य मामले में भी आरोपियों के संपर्क में रहने की शिकायत मुख्य न्यायाधीश को भेजी गई थी जो फिलहाल विचाराधीन है। याचिका के बाद हाईकोर्ट के आदेश के चलते सीबीआई जज ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर टिप्पणियां हाईकोर्ट में सौंपी। इन टिप्पणियों की सभी पक्षों को केवल देखने की अनुमति दी गई, जिसके बाद सभी ने अपना पक्ष रखने के लिए मोहलत मांग ली। सीबीआई ने अपने जवाब में वकील केपी सिंह का बचाव करते हुए कहा कि वह वहां पर सीबीआई की सहायता के लिए मौजूद रहते हैं किसी तरह का कोई दबाव बनाने के लिए लिए नहीं। साथ ही सीबीआई ने कहा कि हाईकोर्ट चाहे तो केस को कहीं और ट्रांसफर कर सकता है।
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