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नर्स से खराब हुई कैंसर के मरीज की लाखों रुपये की दवाई, पीजीआई चंडीगढ़ को करनी पड़ी भरपाई
Wed, 31 Jul 2019 11:06 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 31 Jul 2019 11:06 AM IST
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pgi chandigarh
नर्स की गलती से कैंसर मरीज की सवा दो लाख की खराब हुई दवा की भरपाई मंगलवार को पीजीआई ने कर दी है। पीजीआई ने मरीज को बुलाकर दवा दी और मरीज ने उसे लगवा ली है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में मरीज को एक हफ्ते की देरी से कीमो लगा है। सूत्रों का दावा है कि दवा के लिए पीजीआई ने कंपनी में संपर्क किया था।
कंपनी ने पीजीआई की बात मानकर कीमो की एक डोज उपलब्ध करवाई। मरीज के परिजनों का कहना है कि दवा उनके मरीज को लग गई है। अब वे कोई कार्रवाई नहीं चाहते। हालांकि, परिजनों ने मंगलवार को इस मामले की शिकायत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भी भेज दी थी।
यह मामला बीते हफ्ते का है। चंडीगढ़ निवासी मरीज रंजनी कौशल को पेट में कैंसर है। इसकी रोकथाम के लिए उन्हें क्रिमजा कीमो की डोज हर हफ्ते लगती थी। इसकी कीमत बाजार में सवा दो लाख रुपये है। बीते वीरवार को उन्हें दवा लगनी थी। वीरवार को वह कीमो के साथ न्यू ओपीडी के डे केयर सेंटर पहुंचीं।
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डे केयर सेंटर में मौजूद नर्स बबीता ने कीमो चढ़ाने के लिए दवाई ली और उसे डेक्सट्रास में डाल दी, जबकि यह दवा नार्मल एनएस सॉल्यूशन में डालकर चढ़ानी थी। बबीता ने गलती से डेक्सट्रास (ग्लूकोज के मॉलिक्यूलर फार्मूला) में डाल दी। इससे दवा खराब हो गई। वह किसी काम की नहीं रही। बस यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।
बता दें कि पहले पीजीआई की तरफ से कहा गया कि दवा मुहैया करवा दी जाएगी, लेकिन बाद में इससे मना कर दिया गया। उसके बाद इस मामले को पीजीआई डायरेक्टर ने अपने हाथ में लिया और मरीज को कंपनी की तरफ से दवा मुहैया करवा दी है।
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कंपनी ने पीजीआई की बात मानकर कीमो की एक डोज उपलब्ध करवाई। मरीज के परिजनों का कहना है कि दवा उनके मरीज को लग गई है। अब वे कोई कार्रवाई नहीं चाहते। हालांकि, परिजनों ने मंगलवार को इस मामले की शिकायत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भी भेज दी थी।
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यह मामला बीते हफ्ते का है। चंडीगढ़ निवासी मरीज रंजनी कौशल को पेट में कैंसर है। इसकी रोकथाम के लिए उन्हें क्रिमजा कीमो की डोज हर हफ्ते लगती थी। इसकी कीमत बाजार में सवा दो लाख रुपये है। बीते वीरवार को उन्हें दवा लगनी थी। वीरवार को वह कीमो के साथ न्यू ओपीडी के डे केयर सेंटर पहुंचीं।
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डे केयर सेंटर में मौजूद नर्स बबीता ने कीमो चढ़ाने के लिए दवाई ली और उसे डेक्सट्रास में डाल दी, जबकि यह दवा नार्मल एनएस सॉल्यूशन में डालकर चढ़ानी थी। बबीता ने गलती से डेक्सट्रास (ग्लूकोज के मॉलिक्यूलर फार्मूला) में डाल दी। इससे दवा खराब हो गई। वह किसी काम की नहीं रही। बस यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।
बता दें कि पहले पीजीआई की तरफ से कहा गया कि दवा मुहैया करवा दी जाएगी, लेकिन बाद में इससे मना कर दिया गया। उसके बाद इस मामले को पीजीआई डायरेक्टर ने अपने हाथ में लिया और मरीज को कंपनी की तरफ से दवा मुहैया करवा दी है।