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राष्ट्रव्यापी हड़ताल : हरियाणा में 28-29 मार्च को बसों का चक्का रहेगा जाम, दफ्तरों में नहीं होगा काम
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चंडीगढ़। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़े हरियाणा के अधिकतर कर्मचारी 28-29 मार्च को हड़ताल पर रहेंगे। इससे दफ्तरों में कामकाज न के बराबर होगा और बसों का चक्का जाम रहेगा। प्रदेश सरकार ने दफ्तरों में कामकाज और बसों का संचालन सुचारू बनाए रखने के लिए कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश रद्द कर दिए हैं। डीसी को जिला मुख्यालयों, रोडवेज डिपो के आसपास धारा-144 लागू करनी होगी।
कर्मचारियों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा व अन्य यूनियन सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगी। भारतीय मजदूर संघ व हरियाणा रोडवेज कर्मचारी एकता यूनियन हड़ताल में शामिल नहीं होगी। संघ व सांझा मोर्चा ने हड़ताल की तैयारी पूरी होने का दावा किया है। मोर्चा ने रोडवेज कर्मचारियों से अपील की है कि सरकार की फूट डालो-राज करो नीति से सचेत रहें।
साथ ही बड़ा फैसला लिया है कि हड़ताल में शामिल नहीं होने वाले पदाधिकारी व कार्यकर्ता यूनियनों से बर्खास्त किए जाएंगे। सांझा मोर्चा के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश ग्रेवाल, इंद्र सिंह बधाना, दलबीर किरमारा, वीरेंद्र सिगरोहा, सरबत सिंह पूनिया, जयबीर घणघस, विनोद शर्मा, दिनेश हुड्डा, कृष्ण कादियान, रमेश श्योकंद, आजाद गिल, सुरेंद्र सिंह, विरेंद्र लोहिया, जयभगवान कादियान, प्रताप भनवाला, सुखविंदर बयाना, अमित महाराणा, अजमेर सिंह ने कहा कि मांगें पूरी न होने से कर्मचारियों में गुस्सा है। रोडवेज को निजीकरण से बचाने के लिए 10 यूनियन पहली बार एक मंच पर आई हैं। हड़ताल में शामिल न होने वाले संगठन सरकार के हाथों में न खेलें। कर्मचारियों के हित में मोर्चा में शामिल होकर हड़ताल को सफल बनाएं। 2200 रोडवेज बसें प्रदेश व अन्य राज्यों में सेवाएं नहीं देंगी।
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हड़ताल का व्यापक असर होगा : लांबा
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान सुभाष लांबा, राज्य वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने दावा किया कि हड़ताल का व्यापक असर होगा। सरकारी, अर्ध सरकारी विभागों, निगम, बोर्ड, टीचिंग एंड नॉन टीचिंग स्टाफ, यूनिवर्सिटी कर्मचारी, पालिका, परिषद, नगर निगम, अग्निशमन विभाग व विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में काम करने वाले लाखों कर्मचारी इसमें भाग लेंगे। पंजाब की तर्ज पर हरियाणा में भी कच्चे कर्मचारी तुरंत पक्का किए जाएं।
ये हैं प्रमुख मांगें
निजीकरण पर रोक लगाएं, विभाग में 10 हजार सरकारी बसें शामिल करें, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करें, खाली पदों पर पक्की भर्ती की जाए, परिचालक व लिपिक का वेतनमान 35400 करें, 1992 से 2003 के मध्य लगे कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से पक्का किया जाए, 2016 भर्ती चालकों व कर्मशाला में कार्यरत कर्मचारियों को पक्का करें। 2016 भर्ती चालकों व कर्मशाला के कच्चे कर्मचारियों को कौशल रोजगार निगम के अधीन न किया जाए।
इन कदमों से नाराजगी
श्रम कानूनों को समाप्त कर श्रम कोड बनाना, ईएसआई, ईपीएफ, वेजिज एक्ट आदि कानूनों को समाप्त कर पूंजीपतियों के हक के कानून बनाना, रिक्त पड़े पदों पर नियमित भर्ती न करना, ठेका प्रथा, निजीकरण कर जनता की सेवा के लिए बनाए गए विभागों को बंद करने, देश की परिसंपत्तियों को पूंजीपतियों को बेचना।
हड़ताल राजनीति से प्रेरित : भामसं
भारतीय मजदूर संघ से संबंधित हरियाणा राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण लाल गुर्जर, प्रदेश महासचिव डॉ. किरण बाला पूनिया व संगठन मंत्री हनुमान गोदारा ने कहा कि हड़ताल का आह्वान राजनीति से प्रेरित है। सिर्फ राजनीतिक दलों के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए ये यूनियनें संबद्ध हैं। पिछले वर्षों में विभिन्न राजनीतिक दलों और वैचारिक झुकाव की सरकारों को देखा है, लेकिन श्रमिकों की समस्या काफी हद तक अनसुलझी है।
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कर्मचारियों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सर्व कर्मचारी संघ, हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा व अन्य यूनियन सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगी। भारतीय मजदूर संघ व हरियाणा रोडवेज कर्मचारी एकता यूनियन हड़ताल में शामिल नहीं होगी। संघ व सांझा मोर्चा ने हड़ताल की तैयारी पूरी होने का दावा किया है। मोर्चा ने रोडवेज कर्मचारियों से अपील की है कि सरकार की फूट डालो-राज करो नीति से सचेत रहें।
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साथ ही बड़ा फैसला लिया है कि हड़ताल में शामिल नहीं होने वाले पदाधिकारी व कार्यकर्ता यूनियनों से बर्खास्त किए जाएंगे। सांझा मोर्चा के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश ग्रेवाल, इंद्र सिंह बधाना, दलबीर किरमारा, वीरेंद्र सिगरोहा, सरबत सिंह पूनिया, जयबीर घणघस, विनोद शर्मा, दिनेश हुड्डा, कृष्ण कादियान, रमेश श्योकंद, आजाद गिल, सुरेंद्र सिंह, विरेंद्र लोहिया, जयभगवान कादियान, प्रताप भनवाला, सुखविंदर बयाना, अमित महाराणा, अजमेर सिंह ने कहा कि मांगें पूरी न होने से कर्मचारियों में गुस्सा है। रोडवेज को निजीकरण से बचाने के लिए 10 यूनियन पहली बार एक मंच पर आई हैं। हड़ताल में शामिल न होने वाले संगठन सरकार के हाथों में न खेलें। कर्मचारियों के हित में मोर्चा में शामिल होकर हड़ताल को सफल बनाएं। 2200 रोडवेज बसें प्रदेश व अन्य राज्यों में सेवाएं नहीं देंगी।
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हड़ताल का व्यापक असर होगा : लांबा
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान सुभाष लांबा, राज्य वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने दावा किया कि हड़ताल का व्यापक असर होगा। सरकारी, अर्ध सरकारी विभागों, निगम, बोर्ड, टीचिंग एंड नॉन टीचिंग स्टाफ, यूनिवर्सिटी कर्मचारी, पालिका, परिषद, नगर निगम, अग्निशमन विभाग व विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में काम करने वाले लाखों कर्मचारी इसमें भाग लेंगे। पंजाब की तर्ज पर हरियाणा में भी कच्चे कर्मचारी तुरंत पक्का किए जाएं।
ये हैं प्रमुख मांगें
निजीकरण पर रोक लगाएं, विभाग में 10 हजार सरकारी बसें शामिल करें, पुरानी पेंशन स्कीम बहाल की जाए, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करें, खाली पदों पर पक्की भर्ती की जाए, परिचालक व लिपिक का वेतनमान 35400 करें, 1992 से 2003 के मध्य लगे कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से पक्का किया जाए, 2016 भर्ती चालकों व कर्मशाला में कार्यरत कर्मचारियों को पक्का करें। 2016 भर्ती चालकों व कर्मशाला के कच्चे कर्मचारियों को कौशल रोजगार निगम के अधीन न किया जाए।
इन कदमों से नाराजगी
श्रम कानूनों को समाप्त कर श्रम कोड बनाना, ईएसआई, ईपीएफ, वेजिज एक्ट आदि कानूनों को समाप्त कर पूंजीपतियों के हक के कानून बनाना, रिक्त पड़े पदों पर नियमित भर्ती न करना, ठेका प्रथा, निजीकरण कर जनता की सेवा के लिए बनाए गए विभागों को बंद करने, देश की परिसंपत्तियों को पूंजीपतियों को बेचना।
हड़ताल राजनीति से प्रेरित : भामसं
भारतीय मजदूर संघ से संबंधित हरियाणा राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण लाल गुर्जर, प्रदेश महासचिव डॉ. किरण बाला पूनिया व संगठन मंत्री हनुमान गोदारा ने कहा कि हड़ताल का आह्वान राजनीति से प्रेरित है। सिर्फ राजनीतिक दलों के अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए ये यूनियनें संबद्ध हैं। पिछले वर्षों में विभिन्न राजनीतिक दलों और वैचारिक झुकाव की सरकारों को देखा है, लेकिन श्रमिकों की समस्या काफी हद तक अनसुलझी है।