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‘ऐसे में कैसे पूरा होगा विजेंदर बनने का सपना’
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2016 01:05 AM IST
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बाक्सिंग रिंग बदहाल
- फोटो : अमर उजाला
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पंचकूला में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन प्रतिभा को निखारने के लिए संसाधन की बहुत कमी है। पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित सरकारी स्कूल में बाक्सिंग की प्रतिभाएं हैं और उनको निखारने के लिए बाक्सिंग रिंग भी है, लेकिन वह लंबे समय से बदहाल है। ऐसे में स्कूल में पढ़ रहे खिलाड़ी जो बॉक्सर विजेंदर की तरह बनने का सपना संजोए हुए हैं वह काफी चिंतित हैं।
सेक्टर-6 के सरकारी स्कूल का बॉक्सिंग रिंग पिछले कई वर्षों से बदहाल पड़ा हुआ है। इस ओर न तो स्कूल प्रबंधन का ध्यान है और न ही शिक्षा विभाग सुध ले रहा है। इसके चलते स्टेट लेवल तक बॉक्सिंग खेलने वाले स्टूडेंट्स अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। गौरतलब है कि जब स्कूल में बॉक्सिंग सेंटर बनाया गया था तो कई स्कूलों के स्टूडेंट्स प्रैक्टिस के लिए आते थे, लेकिन अब स्कूल में न तो कोच हैं, न ही कोई संसाधन है।
जिले में सिर्फ दो ही बॉक्सिंग रिंग
पंचकूला के दो ही स्कूलों में बॉक्सिंग रिंग है। पहली सेक्टर-12ए के सार्थक मॉडल और दूसरी सेक्टर-6 के सरकारी स्कूल में है। इसमें से भी सेक्टर 6 के स्कूल की रिंग बदहाल पड़ी हुई है। ऐसे में अब सिर्फ सेक्टर 12ए के सार्थक स्कूल में ही बॉक्सिंग रिंग उपलब्ध है। इस कारण दूर के सेक्टरों से आने वाले खिलाड़ी सार्थक स्कूल में प्रैक्टिस के लिए नहीं जा पाते और उनकी प्रतिभा दब जाती है।
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कोट्स
स्टेट लेवल में ब्रॉंज मेडल जीत चुके जसविंद्र सिंह का कहना है कि स्कूल की रिंग प्रैक्टिस के लायक नहीं है। इसे जल्द से दुरुस्त करवाना चाहिए, ताकि खिलाड़ियों को परेशानी न झेलनी पड़े।
स्टेट लेवल और नेशनल लेवल तक खेल चुके रवि कुमार का कहना है कि रिंग की देखरेख करने की जीम्मेदारी शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन की होती है। पर किसी ने भी सेक्टर छह के स्कूल की रिंग की देखबाल नहीं की नतीजन वह टूटी पड़ी हुई है।
स्कूल के नौंवी कक्षा के छात्र प्रेम का कहना है कि उनका बॉक्सिंग सीखने का काफी मन करता है। टीवी पर भी अक्सर बॉक्सिंग के मैच देखता रहता हूं तो खेलने की चाह होती है। परंतु स्कूल एवं शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण सीख नहीं पा रहा।
कोट्स
इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं थी। मंगलवार को मैं स्कूल का दौरा करूंगा। बॉक्सिंग रिंग को दुरुस्त करने के लिए प्रिंसिपल से बात करूंगा। इसे जल्द ठीक करवाया जाएगा।
एचएस सैनी, जिला शिक्षा अधिकारी पंचकूला
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सेक्टर-6 के सरकारी स्कूल का बॉक्सिंग रिंग पिछले कई वर्षों से बदहाल पड़ा हुआ है। इस ओर न तो स्कूल प्रबंधन का ध्यान है और न ही शिक्षा विभाग सुध ले रहा है। इसके चलते स्टेट लेवल तक बॉक्सिंग खेलने वाले स्टूडेंट्स अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। गौरतलब है कि जब स्कूल में बॉक्सिंग सेंटर बनाया गया था तो कई स्कूलों के स्टूडेंट्स प्रैक्टिस के लिए आते थे, लेकिन अब स्कूल में न तो कोच हैं, न ही कोई संसाधन है।
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जिले में सिर्फ दो ही बॉक्सिंग रिंग
पंचकूला के दो ही स्कूलों में बॉक्सिंग रिंग है। पहली सेक्टर-12ए के सार्थक मॉडल और दूसरी सेक्टर-6 के सरकारी स्कूल में है। इसमें से भी सेक्टर 6 के स्कूल की रिंग बदहाल पड़ी हुई है। ऐसे में अब सिर्फ सेक्टर 12ए के सार्थक स्कूल में ही बॉक्सिंग रिंग उपलब्ध है। इस कारण दूर के सेक्टरों से आने वाले खिलाड़ी सार्थक स्कूल में प्रैक्टिस के लिए नहीं जा पाते और उनकी प्रतिभा दब जाती है।
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स्टेट लेवल में ब्रॉंज मेडल जीत चुके जसविंद्र सिंह का कहना है कि स्कूल की रिंग प्रैक्टिस के लायक नहीं है। इसे जल्द से दुरुस्त करवाना चाहिए, ताकि खिलाड़ियों को परेशानी न झेलनी पड़े।
स्टेट लेवल और नेशनल लेवल तक खेल चुके रवि कुमार का कहना है कि रिंग की देखरेख करने की जीम्मेदारी शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन की होती है। पर किसी ने भी सेक्टर छह के स्कूल की रिंग की देखबाल नहीं की नतीजन वह टूटी पड़ी हुई है।
स्कूल के नौंवी कक्षा के छात्र प्रेम का कहना है कि उनका बॉक्सिंग सीखने का काफी मन करता है। टीवी पर भी अक्सर बॉक्सिंग के मैच देखता रहता हूं तो खेलने की चाह होती है। परंतु स्कूल एवं शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण सीख नहीं पा रहा।
कोट्स
इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं थी। मंगलवार को मैं स्कूल का दौरा करूंगा। बॉक्सिंग रिंग को दुरुस्त करने के लिए प्रिंसिपल से बात करूंगा। इसे जल्द ठीक करवाया जाएगा।
एचएस सैनी, जिला शिक्षा अधिकारी पंचकूला