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Panchkula News: कहीं गिरफ्तारी का डर, कहीं मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप, कहीं मुनाफे का लालच, तीन से 26.40 लाख ठगे
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पंचकूला। साइबर ठगों ने पंचकूला में तीन अलग-अलग तरीकों से आईटीबीपी के सब इंस्पेक्टर समेत तीन लोगों से 26 लाख 40 हजार 865 रुपये ठग लिए। पहले दो मामलों में ठगों ने खुद को सरकारी विभागों और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराया, जबकि तीसरे मामले में निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा देकर एक महिला को जाल में फंसाया। तीनों शिकायतों पर सेक्टर-20 साइबर थाना पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर सब इंस्पेक्टर से 7.50 लाख ठगे
रामगढ़ स्थित आईटीबीपी में तैनात सब इंस्पेक्टर को ठगों ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर 7.50 लाख रुपये ठग लिए। शिकायत के अनुसार, 29 सितंबर को उनके मोबाइल पर फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को शिमला पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड पर जारी सिम का इस्तेमाल अपराध में हुआ है।
इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को पुणे एटीएस का वरिष्ठ निरीक्षक बताया और वीडियो कॉल की। वह पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया। आरोपियों ने सब इंस्पेक्टर को जम्मू-कश्मीर में उग्रवादियों से संबंध होने और गिरफ्तारी का डर दिखाया। उन्हें घर पर रहकर ऑनलाइन जांच में शामिल होने और हर दो घंटे में अपनी गतिविधियों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज भेजकर उनकी बचत और बैंक खातों की जानकारी भी हासिल कर ली।
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आरोपियों के कहने पर पीड़ित ने 11 और 12 अक्टूबर को अलग-अलग बैंक खातों में सात लाख रुपये जमा कराए और 50 हजार रुपये यूपीआई से भेजे। रकम लौटाने और मामले से मुक्त करने का प्रमाणपत्र देने का भरोसा दिया गया, लेकिन पैसे वापस नहीं मिले।
आधार कार्ड से मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाकर बुजुर्ग से सात लाख ऐंठे
पिंजौर निवासी 65 वर्षीय सुरक्षा गार्ड को 25 अगस्त को फोन कर ठगी के जाल में फंसाया गया। कॉल करने वाले ने खुद को दूरसंचार विभाग का कर्मचारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल अपराध में हुआ है। इसके बाद कथित दिल्ली पुलिस अधिकारी ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपना आधार कार्ड दो लाख रुपये में एक अपराधी को बेचा है और इससे जुड़े बैंक खाते में करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है।
ठगों ने पीड़ित की बात कथित आईपीएस अधिकारी और सीबीआई टीम लीडर से भी करवाई। गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देने और जांच के नाम पर रकम जमा कराने को कहा गया। बैंक के नाम से पत्र भेजकर 16 सितंबर को सात लाख रुपये एक खाते में जमा करवा लिए गए। 24 घंटे में रकम लौटाने का भरोसा दिया और किसी को जानकारी न देने की हिदायत दी। करीब एक महीने बाद परिवार को बताने पर ठगी का पता चला।
शेयर ट्रेडिंग में 52 लाख का मुनाफा दिखाकर महिला से 11.40 लाख ठगे
सेक्टर-12ए में किराये पर रहने वाली 35 वर्षीय गृहिणी को वर्क फ्रॉम होम के अवसर तलाशते समय जनवरी में व्हाट्सएप पर शेयर ट्रेडिंग से रोजाना मुनाफा कमाने का संदेश मिला। कौस्तुभ नाम के व्यक्ति ने निवेश संबंधी सुझाव दिए और एक ऐप डाउनलोड करवाकर खाता खुलवाया। शुरुआत में मुनाफा दिखाई देने पर महिला को आरोपियों पर भरोसा हो गया।
महिला ने मार्च में अलग-अलग बैंक खातों में 4.95 लाख रुपये जमा कराए। ऐप पर उनकी रकम बढ़कर मुनाफे सहित 52 लाख रुपये से अधिक दिखाई जाने लगी। जब उन्होंने पैसे निकालने चाहे तो आरोपियों ने टैक्स और सुरक्षा राशि के नाम पर 5,97,865 रुपये और जमा कराने को कहा। रकम जमा कराने के बाद ऐप ने काम करना बंद कर दिया और पैसे नहीं निकले। इस तरह महिला से कुल 11,40,865 रुपये की ठगी हुई।
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डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर सब इंस्पेक्टर से 7.50 लाख ठगे
रामगढ़ स्थित आईटीबीपी में तैनात सब इंस्पेक्टर को ठगों ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर 7.50 लाख रुपये ठग लिए। शिकायत के अनुसार, 29 सितंबर को उनके मोबाइल पर फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को शिमला पुलिस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड पर जारी सिम का इस्तेमाल अपराध में हुआ है।
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इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को पुणे एटीएस का वरिष्ठ निरीक्षक बताया और वीडियो कॉल की। वह पुलिस की वर्दी में दिखाई दिया। आरोपियों ने सब इंस्पेक्टर को जम्मू-कश्मीर में उग्रवादियों से संबंध होने और गिरफ्तारी का डर दिखाया। उन्हें घर पर रहकर ऑनलाइन जांच में शामिल होने और हर दो घंटे में अपनी गतिविधियों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज भेजकर उनकी बचत और बैंक खातों की जानकारी भी हासिल कर ली।
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आरोपियों के कहने पर पीड़ित ने 11 और 12 अक्टूबर को अलग-अलग बैंक खातों में सात लाख रुपये जमा कराए और 50 हजार रुपये यूपीआई से भेजे। रकम लौटाने और मामले से मुक्त करने का प्रमाणपत्र देने का भरोसा दिया गया, लेकिन पैसे वापस नहीं मिले।
आधार कार्ड से मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाकर बुजुर्ग से सात लाख ऐंठे
पिंजौर निवासी 65 वर्षीय सुरक्षा गार्ड को 25 अगस्त को फोन कर ठगी के जाल में फंसाया गया। कॉल करने वाले ने खुद को दूरसंचार विभाग का कर्मचारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल अपराध में हुआ है। इसके बाद कथित दिल्ली पुलिस अधिकारी ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपना आधार कार्ड दो लाख रुपये में एक अपराधी को बेचा है और इससे जुड़े बैंक खाते में करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है।
ठगों ने पीड़ित की बात कथित आईपीएस अधिकारी और सीबीआई टीम लीडर से भी करवाई। गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देने और जांच के नाम पर रकम जमा कराने को कहा गया। बैंक के नाम से पत्र भेजकर 16 सितंबर को सात लाख रुपये एक खाते में जमा करवा लिए गए। 24 घंटे में रकम लौटाने का भरोसा दिया और किसी को जानकारी न देने की हिदायत दी। करीब एक महीने बाद परिवार को बताने पर ठगी का पता चला।
शेयर ट्रेडिंग में 52 लाख का मुनाफा दिखाकर महिला से 11.40 लाख ठगे
सेक्टर-12ए में किराये पर रहने वाली 35 वर्षीय गृहिणी को वर्क फ्रॉम होम के अवसर तलाशते समय जनवरी में व्हाट्सएप पर शेयर ट्रेडिंग से रोजाना मुनाफा कमाने का संदेश मिला। कौस्तुभ नाम के व्यक्ति ने निवेश संबंधी सुझाव दिए और एक ऐप डाउनलोड करवाकर खाता खुलवाया। शुरुआत में मुनाफा दिखाई देने पर महिला को आरोपियों पर भरोसा हो गया।
महिला ने मार्च में अलग-अलग बैंक खातों में 4.95 लाख रुपये जमा कराए। ऐप पर उनकी रकम बढ़कर मुनाफे सहित 52 लाख रुपये से अधिक दिखाई जाने लगी। जब उन्होंने पैसे निकालने चाहे तो आरोपियों ने टैक्स और सुरक्षा राशि के नाम पर 5,97,865 रुपये और जमा कराने को कहा। रकम जमा कराने के बाद ऐप ने काम करना बंद कर दिया और पैसे नहीं निकले। इस तरह महिला से कुल 11,40,865 रुपये की ठगी हुई।