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नाबालिग से दुष्कर्म के मुख्य आरोपी को जमानत: अपने बयान से मुकरी पीड़िता, कहा-पिता के कहने पर लगाए थे आरोप

Wed, 23 Sep 2026 09:32 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला Published by: Nivedita Updated Wed, 23 Sep 2026 09:32 AM IST
सार

एमडीसी थाने में 18 अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नाबालिग 17 अप्रैल की शाम मनीमाजरा से सकेतड़ी जा रही थी। डॉल्फिन चौक के पास आरोपी अपने दो साथियों के साथ ऑटो में आया और उसे जबरन साथ ले गया। बाद में जंगल के पास एक कमरे में उसके साथ दुष्कर्म किया गया। 

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Bail granted to prime accused in minor misdeed case Victim retracts statement panchkula
कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म और अपहरण के मामले में पंचकूला की पाॅक्सो मामलों की विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी को नियमित जमानत दे दी।
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अदालत ने उसे 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए। सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने पहले बयानों से मुकर गई। उसने अदालत में कहा कि पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष पहले लगाए गए आरोप उसने अपने पिता के कहने और दबाव में लगाए थे।

पुलिस के अनुसार, एमडीसी थाने में 18 अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नाबालिग 17 अप्रैल की शाम मनीमाजरा से सकेतड़ी जा रही थी। डॉल्फिन चौक के पास आरोपी अपने दो साथियों के साथ ऑटो में आया और उसे जबरन साथ ले गया। शिकायत के मुताबिक बाद में जंगल के पास एक कमरे में उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पुलिस ने 23 अप्रैल को समीर खान को गिरफ्तार किया था।
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बचाव पक्ष ने कहा- चार्जशीट दाखिल, मुख्य गवाह की गवाही पूरी
जमानत याचिका पर बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और 18 अगस्त को आरोप तय किए जा चुके हैं। मुख्य गवाह पीड़िता का बयान भी दर्ज हो चुका है। अभी करीब 25 गवाहों के बयान बाकी हैं, जिसके चलते मुकदमे की सुनवाई में समय लग सकता है। पीड़िता के अदालत में दिए बयान को भी बचाव पक्ष ने जमानत का आधार बनाया।
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सरकारी वकील ने जमानत का किया विरोध
सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता के पिता समेत कई महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही अभी बाकी है। इसके अलावा डीएनए रिपोर्ट भी लंबित है। आरोपी के जेल से बाहर आने पर गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी जताई गई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीड़िता के अदालत में दिए बयान और मुकदमे की प्रक्रिया में लगने वाले समय को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर कर ली। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत का आदेश मामले के अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेगा।
 
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