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Panchkula News: पर्ल ग्रुप की 17.55 एकड़ जमीन बिक्री मामले में पूर्व तहसीलदार को जमानत

Fri, 18 Sep 2026 01:43 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2026 01:43 AM IST
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Bail granted to former Tehsildar in Pearl Group's 17.55-acre land sale case.
4.20 करोड़ रुपये में बिक्री और रजिस्ट्री से जुड़ा है मामला, अदालत ने गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ पर लगाई रोक
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एंटी करप्शन ब्यूरो ने 14 जुलाई को किया था गिरफ्तार, अंबाला जेल में बंद था जोगिंदर शर्मा
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। रायपुररानी क्षेत्र में पर्ल ग्रुप की प्रतिबंधित 17.55 एकड़ जमीन की करीब 4.20 करोड़ रुपये में बिक्री और रजिस्ट्री से जुड़े मामले में गिरफ्तार पूर्व तहसीलदार जोगिंदर शर्मा को जिला अदालत से नियमित जमानत मिल गई है। हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो ने उन्हें 14 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वह अंबाला जेल में बंद थे। अदालत ने जमानत देते हुए गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने और बिना अनुमति विदेश जाने पर रोक लगाई है।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मामले में आरोपी के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और चालान भी तैयार किया जा चुका है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी की निशानदेही पर कोई आपत्तिजनक सामान भी बरामद नहीं हुआ। इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने जोगिंदर शर्मा की नियमित जमानत मंजूर कर ली।
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प्रतिबंधित जमीन का रिकॉर्ड बदलने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार संबंधित जमीन पर्ल ग्रुप की संपत्तियों से जुड़ी थी और वर्ष 2016 तथा 2019 से इस पर प्रतिबंध दर्ज था। आरोप है कि प्रतिबंध की जानकारी होने के बावजूद राजस्व विभाग के अधिकारियों और जमीन मालिक सुरमुख सिंह की मिलीभगत से रिकॉर्ड में बदलाव कर प्रतिबंध हटा दिया गया। जांच के अनुसार 22 दिसंबर 2025 को प्रतिबंध हटाने की रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके 11 दिन बाद 2 जनवरी 2026 को सेल डीड नंबर 1491 और 1492 के माध्यम से 17.55 एकड़ जमीन कुनाल छिलाना और सौरभ को करीब 4.20 करोड़ रुपये में बेच दी गई। 9 जनवरी को जमीन की म्यूटेशन दर्ज हुई और 17 जनवरी को उसे मंजूरी दी गई। बाद में एसडीएम पंचकूला ने 16 फरवरी को विवादित प्रविष्टियां रद्द कर जमीन पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिया।
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बचाव पक्ष ने पूर्व तहसीलदार की भूमिका पर उठाए सवाल
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि जमीन की बिक्री और म्यूटेशन की कार्रवाई के समय जोगिंदर शर्मा रायपुररानी में तहसीलदार के पद पर तैनात नहीं थे। उनके अनुसार वर्ष 2021 में जीपीए का पंजीकरण उन्होंने अपने वैधानिक दायित्व के तहत किया था। बाद में जमीन की स्थिति सामने आने पर उन्होंने बिक्री विलेख के पंजीकरण से इन्कार कर दिया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जोगिंदर शर्मा को नियमित जमानत दे दी।
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