{"_id":"60c7bb1a8ebc3ed231666131","slug":"asha-workers-demonstrated-outside-the-mission-director-s-office-regarding-the-demands-pkl-office-news-pkl416703551","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिशन निदेशक कार्यालय के बाहर मांगों को लेकर आशा वर्कर्स ने किया प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिशन निदेशक कार्यालय के बाहर मांगों को लेकर आशा वर्कर्स ने किया प्रदर्शन
विज्ञापन
पंचकूला। आशा वर्कर्स ने अपनी मांगो को लेकर सोमवार को मिशन निदेशक के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन को आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की प्रदेश अध्यक्ष प्रवेश, महासचिव सुरेखा, सीटू प्रदेश महासचिव जय भगवान ने संबोधित किया।
संगठन के नेताओं ने कहा की राज्य की बीस हजार से ज्यादा आशा वर्कर्स अपनी और परिवार की जिंदगी दांव पर लगाकर लगातार सेवाएं दे रही हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर सरकार और विभाग के आला अधिकारियों का रुख बेहद गैर जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर्स यूनियन ने मिशन निदेशक से कई बार अपनी समस्याओं के समाधान के लिए समय देने की अपील की है। लगातार समय न मिलने के बाद मजबूर होकर यूनियन का एक जन प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य मिशन निदेशक कार्यालय पर पहुंचा और जोरदार नारेबाजी की। आशा वर्कर्स ने बताया कि यूनियन से बातचीत में निदेशक ने कोविड-19 में जिन आशा वर्कर्स की मौत हुई है उनके परिवारजनों को केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाला 50 लाख का बीमा एवं राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला 10 लाख के बीमे पर अपनी सहमति जताई है। उन्होंने कहा है कि परिवार इस बीमे के लिए अपना दावा करें उसके बाद विभाग उसकी पैरवी करेगा।
यदि आशा एमडीएम एप डाउनलोड नहीं करना चाहती तो वह फोन भी वापस दे सकते हैं, परंतु एक बार एप के बारे में राज्य के नेता एक कार्यशाला करके समझ लें उसके बाद फैसला लें। हटाई गई आशा वर्कर्स को दोबारा काम पर रखने के बारे में भी सहमति बनी। मिशन डायरेक्टर द्वारा कहा गया कि आशाओं की काटी गई 50 फीसदी राशि पर यह फाइल मुख्यमंत्री के ऑफिस में लंबित पड़ी है। आशाओं को जोखिम भत्ता दिया जाने, हेल्थ वर्कर का दर्जा दिया जाने, न्यूनतम वेतन 24000 और सामाजिक सुरक्षा के बारे में उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार से बातचीत की जाएगी।
विज्ञापन
इस दौरान जन प्रतिनिधिमंडल में यूनियन की राज्य कोषाध्यक्ष सुधा, राज्य सचिव अंजू, राज्य सचिव अनीता, राज्य उपप्रधान रानी, कैथल की जिला प्रधान सुषमा, करनाल की जिला प्रधान सुदेश, रोहतक की जिला प्रधान अनीता, सीटू जिला प्रधान रमा देवी समेत राज्य भर से यूनियन के सैकड़ों जिला पदाधिकारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
संगठन के नेताओं ने कहा की राज्य की बीस हजार से ज्यादा आशा वर्कर्स अपनी और परिवार की जिंदगी दांव पर लगाकर लगातार सेवाएं दे रही हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं पर सरकार और विभाग के आला अधिकारियों का रुख बेहद गैर जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि आशा वर्कर्स यूनियन ने मिशन निदेशक से कई बार अपनी समस्याओं के समाधान के लिए समय देने की अपील की है। लगातार समय न मिलने के बाद मजबूर होकर यूनियन का एक जन प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य मिशन निदेशक कार्यालय पर पहुंचा और जोरदार नारेबाजी की। आशा वर्कर्स ने बताया कि यूनियन से बातचीत में निदेशक ने कोविड-19 में जिन आशा वर्कर्स की मौत हुई है उनके परिवारजनों को केंद्र सरकार द्वारा दिया जाने वाला 50 लाख का बीमा एवं राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला 10 लाख के बीमे पर अपनी सहमति जताई है। उन्होंने कहा है कि परिवार इस बीमे के लिए अपना दावा करें उसके बाद विभाग उसकी पैरवी करेगा।
विज्ञापन
यदि आशा एमडीएम एप डाउनलोड नहीं करना चाहती तो वह फोन भी वापस दे सकते हैं, परंतु एक बार एप के बारे में राज्य के नेता एक कार्यशाला करके समझ लें उसके बाद फैसला लें। हटाई गई आशा वर्कर्स को दोबारा काम पर रखने के बारे में भी सहमति बनी। मिशन डायरेक्टर द्वारा कहा गया कि आशाओं की काटी गई 50 फीसदी राशि पर यह फाइल मुख्यमंत्री के ऑफिस में लंबित पड़ी है। आशाओं को जोखिम भत्ता दिया जाने, हेल्थ वर्कर का दर्जा दिया जाने, न्यूनतम वेतन 24000 और सामाजिक सुरक्षा के बारे में उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार से बातचीत की जाएगी।
विज्ञापन
इस दौरान जन प्रतिनिधिमंडल में यूनियन की राज्य कोषाध्यक्ष सुधा, राज्य सचिव अंजू, राज्य सचिव अनीता, राज्य उपप्रधान रानी, कैथल की जिला प्रधान सुषमा, करनाल की जिला प्रधान सुदेश, रोहतक की जिला प्रधान अनीता, सीटू जिला प्रधान रमा देवी समेत राज्य भर से यूनियन के सैकड़ों जिला पदाधिकारी मौजूद रहे।