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2426 शिफ्ट अटेंडेंट की नियुक्ति को हाईकोर्ट से मिली हरी झंडी
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चंडीगढ़। उत्तर हरियाणा व दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के शिफ्ट अटेंडेंट पद के 2426 पदों के लिए चल रही नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भर्ती को हरी झंडी दे दी है।
याचिकाएं दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने शिफ्ट अटेंडेंट के 2426 पदों के लिए आवेदन मांगा था। विज्ञापन के अनुसार 160 अंक की परीक्षा होनी थी, 24 अंकों का इंटरव्यू था तथा 16 अंक अनुभव के लिए थे। कोर्ट को बताया गया कि लिखित परीक्षा के बाद जब इंटरव्यू के लिए बुलाया गया तो कट ऑफ में अनुभव के अंक नहीं जोड़े गए। इस निर्णय को चुनौती देते हुए सिंगल बेंच के समक्ष कुछ याचिकाएं दाखिल की गईं और सिंगल बेंच ने 25 दिन के भीतर बिना सरकार का लिखित पक्ष लिए याचिकाओं को मंजूर कर लिया।
सिंगल बेंच ने सरकार को लिखित परीक्षा के अंकों के साथ अनुभव के अंक जोड़ने के बाद कट ऑफ बनाकर इंटरव्यू के लिए आवेदकों को बुलाने का आदेश दिया था। सिंगल बेंच के आदेश को आयोग ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दे दी। खंडपीठ के समक्ष आयोग ने दलील दी कि यदि लिखित परीक्षा के अंकों के साथ अनुभव के अंक शुरू में ही जोड़ देंगे तो कई मेधावी शुरू में ही नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। अनुभव के अंकों को चयन सूची बनाते हुए जोड़ने का निर्णय लिया गया था।
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हाईकोर्ट ने आयोग की दलील से सहमति जताते हुए कहा कि आयोग का तर्क सही है। हाईकोर्ट ने कहा कि वैसे भी आयोग को भर्ती की प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। हाईकोर्ट का नीतिगत मामलों में दखल केवल तभी होना चाहिए जब भर्ती में किसी तरह के द्वेष या दुर्भावना के चलते कोई निर्णय लिया गया हो। इस मामले में भी किसी एक वर्ग के आवेदकों के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह नियम सभी आवेदकों के लिए समान है। ऐसे में सिंगल बेंच का आदेश सही नहीं है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने सभी अपील को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल के फैसले को खारिज कर दिया।
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याचिकाएं दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने शिफ्ट अटेंडेंट के 2426 पदों के लिए आवेदन मांगा था। विज्ञापन के अनुसार 160 अंक की परीक्षा होनी थी, 24 अंकों का इंटरव्यू था तथा 16 अंक अनुभव के लिए थे। कोर्ट को बताया गया कि लिखित परीक्षा के बाद जब इंटरव्यू के लिए बुलाया गया तो कट ऑफ में अनुभव के अंक नहीं जोड़े गए। इस निर्णय को चुनौती देते हुए सिंगल बेंच के समक्ष कुछ याचिकाएं दाखिल की गईं और सिंगल बेंच ने 25 दिन के भीतर बिना सरकार का लिखित पक्ष लिए याचिकाओं को मंजूर कर लिया।
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सिंगल बेंच ने सरकार को लिखित परीक्षा के अंकों के साथ अनुभव के अंक जोड़ने के बाद कट ऑफ बनाकर इंटरव्यू के लिए आवेदकों को बुलाने का आदेश दिया था। सिंगल बेंच के आदेश को आयोग ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दे दी। खंडपीठ के समक्ष आयोग ने दलील दी कि यदि लिखित परीक्षा के अंकों के साथ अनुभव के अंक शुरू में ही जोड़ देंगे तो कई मेधावी शुरू में ही नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। अनुभव के अंकों को चयन सूची बनाते हुए जोड़ने का निर्णय लिया गया था।
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हाईकोर्ट ने आयोग की दलील से सहमति जताते हुए कहा कि आयोग का तर्क सही है। हाईकोर्ट ने कहा कि वैसे भी आयोग को भर्ती की प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। हाईकोर्ट का नीतिगत मामलों में दखल केवल तभी होना चाहिए जब भर्ती में किसी तरह के द्वेष या दुर्भावना के चलते कोई निर्णय लिया गया हो। इस मामले में भी किसी एक वर्ग के आवेदकों के लिए कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह नियम सभी आवेदकों के लिए समान है। ऐसे में सिंगल बेंच का आदेश सही नहीं है। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने सभी अपील को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट की सिंगल के फैसले को खारिज कर दिया।