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Panchkula News: शून्य से नीचे के तापमान में भी जीवित रहती हैं चींटियां

Sun, 25 May 2025 09:01 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 25 May 2025 09:01 PM IST
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Ants survive even in sub-zero temperatures
अमर उजाला ब्यूरो
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पटियाला। चींटियां अत्यंत ठंडी परिस्थितियों के अनुकूल होती हैं। यह शून्य से नीचे के तापमान में भी जीवित रहती हैं। इन चींटियों ने यह गुण करीब 50-60 मिलियन वर्ष पहले हिमालय निर्माण के दौरान इस क्षेत्र में ऐसी विलक्षणता हासिल की। जिससे कि यह बड़े स्तर पर इस क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय गुण प्राप्त कर सकीं। यह है पंजाबी यूनिवर्सिटी की ओर से किया गया एक अध्ययन। जिसमें हिमालय पर्वत पर रहने वाली चींटियों की प्रजातियों और उनकी विलक्षणताओं के बारे में पता लगाया गया है। यह शोध कार्य यूनिवर्सिटी के जीव विज्ञान एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. डॉ. हिमेंद्र भारती की देखरेख में शोधकर्ता जसप्रीत कौर द्वारा किया गया।
पीयू में किए गए इस शोध के परिणाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। विकासवादी जीव विज्ञान में यह अपनी तरह का पहला प्रयास है। डॉ. जसप्रीत कौर ने बताया कि इस अध्ययन के अंतर्गत इन चींटियों के बारे में विभिन्न नए तथ्य व आंकड़े एकत्रित करना तथा उन तथ्यों व आंकड़ों का विस्तार से अध्ययन करना संभव हो पाया है। डॉ. जसप्रीत कौर ने बताया कि अध्ययनों से पता चला है कि ये चींटियां ऐसे कठोर वातावरण में जीवित रहने के लिए लगातार विकसित होती रही हैं, जिसके तहत उनके शरीर में कुछ नई विकासवादी विशेषताएं विकसित हुई हैं।
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प्रो. हिमेंद्र भारती ने बताया कि स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी के माध्यम से हिमालय की 15 ऐसी प्रजातियों की जन्म प्रक्रिया में अपरिपक्व अवस्थाओं के विकासात्मक रहस्यों का विस्तार से अध्ययन किया गया है। उन्होंने कहा कि इन प्रजातियों के विकासात्मक संबंधों को पर्यावरण के आधार पर भी समझा गया है। उन्होंने कहा कि शोध के परिणाम पूरी तरह से क्षेत्रीय जीव विज्ञान और प्राकृतिक इतिहास पर आधारित हैं। जो एक दुर्लभ विषय है। उन्होंने कहा कि इन चींटियों की पैदाइश से जुड़े लारवा स्तर में उल्लेखनीय पारिस्थितिक विशिष्टताएं देखी गई हैं, जो इस क्षेत्र की कठोर परिस्थितियों में जीवित रहती हैं। बहुत कठोर सर्दियों को भी सहन करती हैं। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य संबंधित क्षेत्र में अनुकूलन से जुड़ी ऐसी अनूठी विशेषताओं और उनके इस स्तर तक विकास की यात्रा को समझना है।
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वीसी डॉ. जगदीप सिंह ने इस शोध कार्य की सराहना की और शोधकर्ता और पर्यवेक्षक को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पंजाबी यूनिवर्सिटी में भाषा, साहित्य और संस्कृति के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में करवाए जा रहे इस स्तर के अध्ययन इस बात का प्रमाण हैं कि यूनिवर्सिटी वैश्विक ज्ञान प्रवृत्तियों के साथ तालमेल बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि ऐसे शोध कार्यों को और बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है।
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