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एसीपी वेतन का हिस्सा नहीं बल्कि यह भत्ता है : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। हरियाणा के सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों व कॉलेजों के गैर शिक्षक कर्मियों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा झटका देते हुए उन्हें एसीपी (अश्योर्ड कॅरियर प्रोग्रेशन) के लिए अयोग्य करार दिया है। हाईकोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है। इस फैसले से हरियाणा में हजारों शिक्षक व गैर शिक्षक प्रभावित होंगे।
याचिका दाखिल करते हुए सरकारी सहायता पाने वाले स्कूलों के शिक्षकों ने कहा कि सरकारी शिक्षकों की तरह वह भी वेतन व डीए के साथ एसीपी के हकदार हैं। शिक्षकों की ओर से दलील दी गई कि एसीपी भी वेतन का हिस्सा होता है और ऐसे में उन्हें एसीपी का लाभ दिया जाए। वहीं कॉलेज के गैर शिक्षक कर्मियों की ओर से कहा गया कि सहायता प्राप्त कॉलेज के शिक्षकों को एसीपी का लाभ दिया जा रहा है, जबकि गैर शिक्षकों को नहीं। ऐसा करना उनके साथ अन्याय है।
इस पर हरियाणा सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में स्पष्ट कर चुका है कि सहायता प्राप्त कॉलेज या स्कूल के कर्मी सरकारी कर्मी की भांति केवल वेतन और डीए के हकदार हैं। इसके अतिरिक्त और किसी भी भत्ते के लिए वह दावा नहीं कर सकते हैं। कॉलेज के गैर शिक्षकों की याचिका पर हरियाणा सरकार ने कहा कि एआईसीटीई के प्रावधानों के अनुसार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने वेतन में बदलाव की सिफारिश की थी। इसके अनुरूप ही उनके वेतन को बदला गया था। साथ ही सरकार ने कहा कि एसीपी सरकारी कर्मियों को प्रमोशन के अभाव में आगे बढ़ाने का माध्यम है। इसे वेतन के हिस्से के रूप में नहीं देखा जा सकता है। वैसे भी शिक्षकों की और गैर शिक्षकों की श्रेणी अलग है।
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हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद हरियाणा सरकार के निर्णय पर मुहर लगाते हुए कहा कि नियम में कहीं यह प्रावधान नहीं है कि ऐसे कर्मियों को एसीपी का लाभ दिया जाएगा। नियम के अनुसार लाभ देना है या नहीं देना है यह निर्णय सरकार को लेने की छूट है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने एसीपी को वेतन का हिस्सा न मानते हुए इस लाभ की उम्मीद लगाए बैठे हजारों लोगों को बड़ा झटका दे दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए सरकारी सहायता पाने वाले स्कूलों के शिक्षकों ने कहा कि सरकारी शिक्षकों की तरह वह भी वेतन व डीए के साथ एसीपी के हकदार हैं। शिक्षकों की ओर से दलील दी गई कि एसीपी भी वेतन का हिस्सा होता है और ऐसे में उन्हें एसीपी का लाभ दिया जाए। वहीं कॉलेज के गैर शिक्षक कर्मियों की ओर से कहा गया कि सहायता प्राप्त कॉलेज के शिक्षकों को एसीपी का लाभ दिया जा रहा है, जबकि गैर शिक्षकों को नहीं। ऐसा करना उनके साथ अन्याय है।
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इस पर हरियाणा सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में स्पष्ट कर चुका है कि सहायता प्राप्त कॉलेज या स्कूल के कर्मी सरकारी कर्मी की भांति केवल वेतन और डीए के हकदार हैं। इसके अतिरिक्त और किसी भी भत्ते के लिए वह दावा नहीं कर सकते हैं। कॉलेज के गैर शिक्षकों की याचिका पर हरियाणा सरकार ने कहा कि एआईसीटीई के प्रावधानों के अनुसार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने वेतन में बदलाव की सिफारिश की थी। इसके अनुरूप ही उनके वेतन को बदला गया था। साथ ही सरकार ने कहा कि एसीपी सरकारी कर्मियों को प्रमोशन के अभाव में आगे बढ़ाने का माध्यम है। इसे वेतन के हिस्से के रूप में नहीं देखा जा सकता है। वैसे भी शिक्षकों की और गैर शिक्षकों की श्रेणी अलग है।
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हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद हरियाणा सरकार के निर्णय पर मुहर लगाते हुए कहा कि नियम में कहीं यह प्रावधान नहीं है कि ऐसे कर्मियों को एसीपी का लाभ दिया जाएगा। नियम के अनुसार लाभ देना है या नहीं देना है यह निर्णय सरकार को लेने की छूट है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने एसीपी को वेतन का हिस्सा न मानते हुए इस लाभ की उम्मीद लगाए बैठे हजारों लोगों को बड़ा झटका दे दिया है।