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Panchkula News: सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठगी, आरोपी की जमानत खारिज
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2.10 लाख की ठगी मामले में कोर्ट सख्त, अन्य मामलों में संलिप्तता बनी वजह
संवाद
पंचकूला। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 2.10 लाख रुपये की ठगी के मामले में कोर्ट ने 52 वर्षीय आरोपी पृथ्वी राज की जमानत याचिका खारिज कर दी। 21 फरवरी 2026 को एडिशनल सेशन जज ने फैसला सुनाते हुए आरोपों की गंभीरता, अन्य समान मामलों में संलिप्तता और जांच की स्थिति को आधार बनाया।
मामला 13 अक्टूबर 2025 को चंडीमंदिर थाने में दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार मोरनी निवासी नमन शर्मा, ललित शर्मा, दीक्षित और निर्मल से सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर 2.10 लाख रुपये ठगे गए।
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने दलील दी कि पृथ्वी राज मुख्य आरोपी है। मामले में 10 हजार रुपये की रिकवरी हो चुकी है, जबकि सह-अभियुक्तों की गिरफ्तारी अभी बाकी है। साथ ही आरोपी चार अन्य समान मामलों का भी सामना कर रहा है।
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अदालत ने माना कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। व्हाट्सएप चैट और ट्रांसक्रिप्ट से ठगी के आरोपों की पुष्टि होती है। आरोपी ने कमीशन के रूप में 70 हजार रुपये लिए थे, जिनमें से 10 हजार रुपये बरामद किए जा चुके हैं। अन्य मामलों में संलिप्तता को देखते हुए अदालत ने जमानत देना उचित नहीं समझा।
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पंचकूला। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 2.10 लाख रुपये की ठगी के मामले में कोर्ट ने 52 वर्षीय आरोपी पृथ्वी राज की जमानत याचिका खारिज कर दी। 21 फरवरी 2026 को एडिशनल सेशन जज ने फैसला सुनाते हुए आरोपों की गंभीरता, अन्य समान मामलों में संलिप्तता और जांच की स्थिति को आधार बनाया।
मामला 13 अक्टूबर 2025 को चंडीमंदिर थाने में दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार मोरनी निवासी नमन शर्मा, ललित शर्मा, दीक्षित और निर्मल से सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर 2.10 लाख रुपये ठगे गए।
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सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने दलील दी कि पृथ्वी राज मुख्य आरोपी है। मामले में 10 हजार रुपये की रिकवरी हो चुकी है, जबकि सह-अभियुक्तों की गिरफ्तारी अभी बाकी है। साथ ही आरोपी चार अन्य समान मामलों का भी सामना कर रहा है।
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अदालत ने माना कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। व्हाट्सएप चैट और ट्रांसक्रिप्ट से ठगी के आरोपों की पुष्टि होती है। आरोपी ने कमीशन के रूप में 70 हजार रुपये लिए थे, जिनमें से 10 हजार रुपये बरामद किए जा चुके हैं। अन्य मामलों में संलिप्तता को देखते हुए अदालत ने जमानत देना उचित नहीं समझा।