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Panchkula News: ससुराल और घर में छिपाए सबूत एसीबी, पांच दिन के रिमांड पर विकास से उगलवाएगी राज

Sat, 04 Apr 2026 01:58 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 04 Apr 2026 01:58 AM IST
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ACB Uncovers Evidence Hidden at In-laws' and Own Home; Set to Extract Secrets from Vikas During Five-Day Remand.
ससुराल-घर में छिपाए सबूत, एसीबी 5 दिन के रिमांड पर विकास से उगलवाएगी राज
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। नगर निगम के खजाने में सेंधमारी कर 159 करोड़ रुपये डकारने वाले गिरोह के मुख्य सूत्रधारों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। कालका के ईओ और पूर्व पूर्व सीनियर अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक के ससुराल-घर में छिपाए सबूतों का राज अब एसीबी उगलवाने की तैयारी कर रही है।
हरियाणा स्टेट विजिलेंस (एसीबी) ने इस घोटाले के मास्टरमाइंड माने जा रहे पूर्व सीनियर अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक को गिरफ्तार कर शुक्रवार को अदालत में पेश किया। विजिलेंस ने गहन पूछताछ और अहम सबूतों की बरामदगी के लिए आरोपी का 7 दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन अदालत ने 5 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की है। अब अगले पांच दिनों तक विजिलेंस की टीम विकास कौशिक से इस घोटाले की एक-एक एंट्री का हिसाब मांगेगी। जांच का मुख्य केंद्र जाली मोहरों, फर्जी डेबिट नोट्स और गबन की गई रकम से खड़ी की गई संपत्तियों का खुलासा करना है। एसीबी को अंदेशा है कि विकास कौशिक ने नगर निगम के नाम पर बनाई गई जाली मोहरें और फर्जी दस्तावेज अपने पैतृक गांव इंद्रगढ़ (रोहतक) और अपनी ससुराल बड़ीवरा (जींद) में छिपा रखे हैं। रिमांड के दौरान टीम इन ठिकानों पर छापे मारकर बरामदगी करेगी।
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जानकारी के अनुसार आरोपी विकास कौशिक निवासी सेक्टर-12ए पंचकूला को 2 अप्रैल को सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद मेडिकल करवाया गया था। संपत्तियों का भी होगा खुलासा एसीबी अब विकास कौशिक की निजी डायरी और उन बेनामी संपत्तियों का कच्चा चिट्ठा खंगाल रही है, जो गबन की राशि से खरीदी गई थीं। ट्राइसिटी के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब के कई हिस्सों में विजिलेंस की टीमें छापे मार रही है। रिमांड के दौरान उम्मीद जताई जा रही है कि विकास कुछ ऐसे सफेदपोशों और बैंक अधिकारियों के नाम उगलेगा जिनकी शह पर 158 करोड़ रुपये का सरकारी बजट डकार लिया गया।
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गबन मामले की परतें खुलेंगी
सूत्रों के अनुसार इस घोटाले में कई सरकारी, गैर-सरकारी और बैंक कर्मियों की संलिप्तता हो सकती है जिसकी जांच जारी है। विजिलेंस जल्द ही इस मामले में रिटायर्ड अधिकारियों और नगर निगम के पूर्व अकाउंटेंट को भी जांच में शामिल कर सकती है। आरोप है कि गबन के दौरान उनके फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। ऐसे में उनकी पहचान कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हस्ताक्षर असली हैं या नकली। मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विजिलेंस टीम ट्राइसिटी समेत हरियाणा और पंजाब के विभिन्न स्थानों पर लगातार छापे मार रही है। यह एक जटिल और बहुस्तरीय वित्तीय घोटाला है जिसमें सरकारी फंड के दुरुपयोग की हर एंट्री की जांच की जाएगी। आरोपी से पूछताछ के दौरान और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।
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