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Panchkula News: एनडीपीएस केस में पुलिस गवाहों की गैरहाजिरी, डीजीपी लॉ एंड ऑर्डर तलब
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गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद नहीं पेश हो रहे पुलिस गवाह
एफआईआर दर्ज करने में तेजी लेकिन ट्रायल में पहुंचते ही तत्परता गायब : हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामलों में पुलिस गवाहों की गैरहाजिरी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (लॉ एंड ऑर्डर) को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। यह निर्देश गवाहों के बार-बार अदालत में पेश न होने के कारण दिया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी अभियोजन पक्ष के गवाह होने के बावजूद पेश नहीं हो रहे हैं। गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद भी वे गवाही के लिए नहीं आ रहे। इससे मुकदमों में अनावश्यक देरी हो रही है। आरोपी के शीघ्र सुनवाई के मौलिक अधिकार पर इसका असर पड़ रहा है।
जस्टिस सुमित गोयल ने यह आदेश नसीब सिंह की जमानत याचिका पर दिया। नसीब सिंह के खिलाफ फिरोजपुर में 28 मार्च 2025 को एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। वह एक वर्ष पांच महीने से अधिक समय से जेल में है। अभियोजन पक्ष के 16 गवाहों में से किसी की गवाही अब तक नहीं हुई है।
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गवाहों की अनुपस्थिति पर चिंता :
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 20 नवंबर 2025 से 5 अगस्त 2026 तक के आदेश देखे। रिकॉर्ड से पता चला कि गवाहों की उपस्थिति के लिए बार-बार आदेश दिए गए। इसके बावजूद पुलिस गवाह अदालत में पेश नहीं हुए। कोर्ट ने कहा कि मुकदमे में देरी आरोपी की वजह से नहीं हुई। उसे लंबे समय तक जेल में रखकर इसका खामियाजा नहीं भुगताया जा सकता।
पुलिस की तत्परता पर सवाल :
अदालत ने टिप्पणी की कि एफआईआर दर्ज करने में पुलिस तेजी दिखाती है। आरोपी को गिरफ्तार करने में भी तत्परता नजर आती है लेकिन मामला ट्रायल में पहुंचने पर वही तत्परता गायब हो जाती है। बार-बार समन और गैर-जमानती वारंट के बावजूद गवाहों का न पहुंचना गंभीर समस्या है। पीठ ने नसीब सिंह को अगली सुनवाई तक अंतरिम नियमित जमानत दे दी।
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एफआईआर दर्ज करने में तेजी लेकिन ट्रायल में पहुंचते ही तत्परता गायब : हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामलों में पुलिस गवाहों की गैरहाजिरी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (लॉ एंड ऑर्डर) को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। यह निर्देश गवाहों के बार-बार अदालत में पेश न होने के कारण दिया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी अभियोजन पक्ष के गवाह होने के बावजूद पेश नहीं हो रहे हैं। गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद भी वे गवाही के लिए नहीं आ रहे। इससे मुकदमों में अनावश्यक देरी हो रही है। आरोपी के शीघ्र सुनवाई के मौलिक अधिकार पर इसका असर पड़ रहा है।
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जस्टिस सुमित गोयल ने यह आदेश नसीब सिंह की जमानत याचिका पर दिया। नसीब सिंह के खिलाफ फिरोजपुर में 28 मार्च 2025 को एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ था। वह एक वर्ष पांच महीने से अधिक समय से जेल में है। अभियोजन पक्ष के 16 गवाहों में से किसी की गवाही अब तक नहीं हुई है।
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गवाहों की अनुपस्थिति पर चिंता :
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 20 नवंबर 2025 से 5 अगस्त 2026 तक के आदेश देखे। रिकॉर्ड से पता चला कि गवाहों की उपस्थिति के लिए बार-बार आदेश दिए गए। इसके बावजूद पुलिस गवाह अदालत में पेश नहीं हुए। कोर्ट ने कहा कि मुकदमे में देरी आरोपी की वजह से नहीं हुई। उसे लंबे समय तक जेल में रखकर इसका खामियाजा नहीं भुगताया जा सकता।
पुलिस की तत्परता पर सवाल :
अदालत ने टिप्पणी की कि एफआईआर दर्ज करने में पुलिस तेजी दिखाती है। आरोपी को गिरफ्तार करने में भी तत्परता नजर आती है लेकिन मामला ट्रायल में पहुंचने पर वही तत्परता गायब हो जाती है। बार-बार समन और गैर-जमानती वारंट के बावजूद गवाहों का न पहुंचना गंभीर समस्या है। पीठ ने नसीब सिंह को अगली सुनवाई तक अंतरिम नियमित जमानत दे दी।