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Panchkula News: आत्मसमर्पण के बिना अपील के साथ दाखिल कर सकते हैं सजा निलंबन की याचिका
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में यह स्पष्ट किया है कि आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बाद बिना आत्मसमर्पण किए सजा निलंबन से जुड़ी याचिका अपील के साथ वैध है। हाईकोर्ट ने आदेश में याची को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने की मोहलत भी दी है।
अदालत ने कहा कि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो हाईकोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण न करने पर भी अपील को अमान्य ठहराती हो। पुनरीक्षण याचिका और सजा निलंबन की अर्जी विधिक रूप से स्वीकार्य है, भले ही आरोपी ने आत्मसमर्पण न किया हो या हिरासत में न हो। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका की स्वीकार्यता और सुनवाई के लिए उपयुक्तता दोनों अलग-अलग बातें हैं। यदि आरोपी ने कानून की प्रक्रिया की जानबूझकर अवहेलना की है तो सजा निलंबन देना न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अनादर के समान होगा।
यह आदेश एक ऐसे मामले में आया है जहां आरोपी को धोखाधड़ी और जालसाजी का दोषी ठहराया गया था। बठिंडा निवासी आरोपी ने सजा के खिलाफ अपील दाखिल की और आत्मसमर्पण के लिए समय मांगते हुए और सजा निलंबन की याचिका भी दाखिल कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की आयु (62 वर्ष) और हृदय रोग से पीड़ित होने के आधार पर उसे कोर्ट में पेश होने के लिए समय दिया और सजा निलंबन याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए मामला स्थगित कर दिया।
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में यह स्पष्ट किया है कि आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बाद बिना आत्मसमर्पण किए सजा निलंबन से जुड़ी याचिका अपील के साथ वैध है। हाईकोर्ट ने आदेश में याची को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने की मोहलत भी दी है।
अदालत ने कहा कि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जो हाईकोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण न करने पर भी अपील को अमान्य ठहराती हो। पुनरीक्षण याचिका और सजा निलंबन की अर्जी विधिक रूप से स्वीकार्य है, भले ही आरोपी ने आत्मसमर्पण न किया हो या हिरासत में न हो। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका की स्वीकार्यता और सुनवाई के लिए उपयुक्तता दोनों अलग-अलग बातें हैं। यदि आरोपी ने कानून की प्रक्रिया की जानबूझकर अवहेलना की है तो सजा निलंबन देना न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अनादर के समान होगा।
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यह आदेश एक ऐसे मामले में आया है जहां आरोपी को धोखाधड़ी और जालसाजी का दोषी ठहराया गया था। बठिंडा निवासी आरोपी ने सजा के खिलाफ अपील दाखिल की और आत्मसमर्पण के लिए समय मांगते हुए और सजा निलंबन की याचिका भी दाखिल कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की आयु (62 वर्ष) और हृदय रोग से पीड़ित होने के आधार पर उसे कोर्ट में पेश होने के लिए समय दिया और सजा निलंबन याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए मामला स्थगित कर दिया।
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