{"_id":"146-15902","slug":"Panchkula-15902-146","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुंबई के बैंक मैनेजर से कालका में धोखाधड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुंबई के बैंक मैनेजर से कालका में धोखाधड़ी
Panchkula
Updated Sat, 23 Mar 2013 05:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंचकूला/कालका। मुंबई स्थित एक बैंक में बतौर मैनेजर तैनात यमुनानगर जिले के बिलासपुर निवासी कृष्ण सिंह के साथ कालका में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस संबंध में कालका थाने में पिंजौर के दो युवकों और उनकी मां के साथ-साथ कुल पांच लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 467, 468, 420, 120 बी व 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
पुलिस के मुताबिक कृष्ण सिंह कालका क्षेत्र में प्लाट खरीदना चाहते थे। इसी बीच उनकी मुलाकात पिंजौर के एचएमटी सुभाष नगर निवासी युवक हरबंस सिंह और बलजिंद्र सिंह से हुई। दोनों युवक सगे भाई हैं। इन्होंने कालका के लोहगढ़ इलाके में खुद का चार बिस्वे का प्लाट होने की बात कही। कृष्ण सिंह को प्लाट देखा पसंद आ गया। उन्होंने बयाने के तौर पर 27 जनवरी 2012 को युवकों को आठ लाख 55 हजार रुपये भी दे दिए।
फर्जी इकरारनामा
जांच में सामने आया है कि लोहगढ़ में दिखाई जमीन का मालिकाना हक आरोपियों के पास नहीं था। आरोपी हरबंस सिंह, बलजिंद्र सिंह, इनकी मां तारावती ने रमित शर्मा और गुरनाम सिंह के साथ मिलकर उस जमीन का फर्जी इकरारनामा तैयार किया। इसमें मालिकाना हक अपने नाम दिखाया।
विज्ञापन
रजिस्टरी के समय हुआ खुलासा
रजिस्टरी के समय कृष्ण सिंह को पता चला कि जिनको पैसे दिए हैं, वे प्लाट के मालिक ही नही हैं। जब बेचने वालों से बात की गई तो वे जवाब नहीं दे सके। जिसके बाद पुलिस में शिकायत पहुंची। पुलिस की जांच में पता चला कि प्लाट का मालिकाना हक लीलावती के पास है, जोकि चंडीगढ़ में रहती है। पूछताछ में उन्होंने बयाना होने से इंकार किया। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने जो फर्जी इकरारनामा तैयार किया, उसमें लीलावती की जगह तारावती को जमीन का मालिक दर्शाया, जबकि तारावती जमीन की मालिक ही नहीं है।
विज्ञापन
पुलिस के मुताबिक कृष्ण सिंह कालका क्षेत्र में प्लाट खरीदना चाहते थे। इसी बीच उनकी मुलाकात पिंजौर के एचएमटी सुभाष नगर निवासी युवक हरबंस सिंह और बलजिंद्र सिंह से हुई। दोनों युवक सगे भाई हैं। इन्होंने कालका के लोहगढ़ इलाके में खुद का चार बिस्वे का प्लाट होने की बात कही। कृष्ण सिंह को प्लाट देखा पसंद आ गया। उन्होंने बयाने के तौर पर 27 जनवरी 2012 को युवकों को आठ लाख 55 हजार रुपये भी दे दिए।
विज्ञापन
फर्जी इकरारनामा
जांच में सामने आया है कि लोहगढ़ में दिखाई जमीन का मालिकाना हक आरोपियों के पास नहीं था। आरोपी हरबंस सिंह, बलजिंद्र सिंह, इनकी मां तारावती ने रमित शर्मा और गुरनाम सिंह के साथ मिलकर उस जमीन का फर्जी इकरारनामा तैयार किया। इसमें मालिकाना हक अपने नाम दिखाया।
विज्ञापन
रजिस्टरी के समय हुआ खुलासा
रजिस्टरी के समय कृष्ण सिंह को पता चला कि जिनको पैसे दिए हैं, वे प्लाट के मालिक ही नही हैं। जब बेचने वालों से बात की गई तो वे जवाब नहीं दे सके। जिसके बाद पुलिस में शिकायत पहुंची। पुलिस की जांच में पता चला कि प्लाट का मालिकाना हक लीलावती के पास है, जोकि चंडीगढ़ में रहती है। पूछताछ में उन्होंने बयाना होने से इंकार किया। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने जो फर्जी इकरारनामा तैयार किया, उसमें लीलावती की जगह तारावती को जमीन का मालिक दर्शाया, जबकि तारावती जमीन की मालिक ही नहीं है।