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अभी खत्म नहीं हुआ 26/11 का मामला : मलिक
Panchkula
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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आशीष वर्मा
पंचकूला। मुंबई हमले के दोषी आतंकवादी अजमल कसाब को फांसी देना बिल्कुल सही है। हालांकि सरकार का यह फैसला थोड़ा देरी से आया है। ऐसे मामलों में देरी का प्रभाव खास तौर से उन लोगों पर पड़ता है जो आतंकवादी को पकड़ते हैं या फिर उन पर जिनके अपने आतंकवादी मुठभेड़ में शहीद होते हैं। यह कहना है कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के आर्मी चीफ रहे पूर्व जनरल वीपी मलिक का। कसाब को फांसी दिए जाने के बाद अमर उजाला के साथ बातचीत में मलिक ने कहा कि अभी 26/11 का मामला ठंडा नहीं पड़ा है, क्याेंकि अब तक उन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है जिन्होंने कसाब को तैयार किया था। वे आज भी पाकिस्तान में खुले आम घूम रहे हैं। यदि कसाब के अंत के बाद जेहादी संगठन भारत पर अपनी गतिविधियां बढ़ाते हैं तो भारत को इसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए। यही नहीं देश की खुफिया एजेंसियों को अब और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
उन्होंने इस बात से इनकार किया कि कसाब को फांसी दिए जाने के बाद भारत पाकिस्तान के बीच जो रिश्ते बन रहे हैं, उन पर कोई असर पड़ रहा है। इस मसले पर भारत ने अपने पड़ोसी मुल्क से जरूर बातचीत की होगी। वहीं अफजल गुरु को फांसी में देरी होने के मुद्दे पर उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
सरबजीत और कसाब का मामला अलग-अलग
जब जनरल मलिक से पूछा गया कि क्या इस फैसले के बाद सरबजीत की रिहाई पर कोई असर पड़ेगा तो उन्होंने कहा कि दोनों अलग-अलग मामले हैं। इन्हें जोड़ने की कोशिश न की जाए। यदि पाकिस्तान इन मामलों को आपस में जोड़ता है तो यह बहुत ही ओछी हरकत होगी। ऐसा होने से एक नई विचारधारा शुरू हो जाएगी।
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पंचकूला। मुंबई हमले के दोषी आतंकवादी अजमल कसाब को फांसी देना बिल्कुल सही है। हालांकि सरकार का यह फैसला थोड़ा देरी से आया है। ऐसे मामलों में देरी का प्रभाव खास तौर से उन लोगों पर पड़ता है जो आतंकवादी को पकड़ते हैं या फिर उन पर जिनके अपने आतंकवादी मुठभेड़ में शहीद होते हैं। यह कहना है कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के आर्मी चीफ रहे पूर्व जनरल वीपी मलिक का। कसाब को फांसी दिए जाने के बाद अमर उजाला के साथ बातचीत में मलिक ने कहा कि अभी 26/11 का मामला ठंडा नहीं पड़ा है, क्याेंकि अब तक उन लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है जिन्होंने कसाब को तैयार किया था। वे आज भी पाकिस्तान में खुले आम घूम रहे हैं। यदि कसाब के अंत के बाद जेहादी संगठन भारत पर अपनी गतिविधियां बढ़ाते हैं तो भारत को इसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए। यही नहीं देश की खुफिया एजेंसियों को अब और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
उन्होंने इस बात से इनकार किया कि कसाब को फांसी दिए जाने के बाद भारत पाकिस्तान के बीच जो रिश्ते बन रहे हैं, उन पर कोई असर पड़ रहा है। इस मसले पर भारत ने अपने पड़ोसी मुल्क से जरूर बातचीत की होगी। वहीं अफजल गुरु को फांसी में देरी होने के मुद्दे पर उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
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सरबजीत और कसाब का मामला अलग-अलग
जब जनरल मलिक से पूछा गया कि क्या इस फैसले के बाद सरबजीत की रिहाई पर कोई असर पड़ेगा तो उन्होंने कहा कि दोनों अलग-अलग मामले हैं। इन्हें जोड़ने की कोशिश न की जाए। यदि पाकिस्तान इन मामलों को आपस में जोड़ता है तो यह बहुत ही ओछी हरकत होगी। ऐसा होने से एक नई विचारधारा शुरू हो जाएगी।
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