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नैनो मैटीरियल कम करेगा फॉरेंसिक जांच के पेंडिंग केस

Tue, 09 Oct 2018 02:37 AM IST
Updated Tue, 09 Oct 2018 02:37 AM IST
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नैनो मैटीरियल कम करेगा फॉरेंसिक जांच के पेंडिंग केस
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फिंगर प्रिंट जांच के लिए नैनो मैटेरियल तैयार, अब निपटेंगे पेंडिंग केस
पीयू के फारेंसिक साइंस के सहायक प्रोफेसर को मिली सफलता, श्वेता शर्मा ने डेट रेप ड्रग्स पर किया शोध

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। देशभर में फारेंसिक प्रयोगशालाओं में जांच के लिए फिंगर प्रिंट के ढेर लगे हैं। हजारों केस पेंडिंग हैं। इन्हीं केसों की रिपोर्ट समय पर तैयार हो, इसके लिए पीयू के फारेंसिक विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. विशाल शर्मा ने नैनो मैटेरियल तैयार किए हैं। इसी तरह फारेंसिक विभाग की चेयरपर्सन ने डेट रेप ड्रग्स की पहचान में रिसर्च किया है। एक सेंसर तैयार किया है। इसका खुलासा सोमवार को वैज्ञानिकों ने प्रेसवार्ता के दौरान किया।

विस्फोट के बाद तैयार हुआ नैनो पाउडर
फिंगर प्रिंट की जांच के लिए सहायक प्रोफेसर डॉ. राहुल शर्मा ने नैनो मैटेरियल तैयार किया है। यह कैमिकल प्रोसेस है। मैटल नाइट्रेट को एल्युमिनियम के साथ मिक्स करते हैं। इसमें जिंक, कोबाल्ट आदि हो सकता है। बंद अंधेरे कमरे में इसे एक बर्तन में मिलाया जाता है। उसके बाद अल्ट्रा वॉलेट किरणें इसमें डाली जाती हैं। इसे 450 से 500 डिग्री पर गर्म किया जाता है। जैसे ही उसका तापमान 3000 डिग्री तक पहुंचता है तो उसमें हल्का विस्फोट होता है और उससे पाउडर तैयार होता है, जो 30 नैनीमीटर तक होता है। फिंगर प्रिंट जहां होते हैं, वहां इसका छिड़काव किया जाता है और उसके बाद रिजल्ट सामने होते हैं। क्राइम करने वाले व्यक्ति का पता लग जाता है। यह रिसर्च प्रकाशित हो गया है। सरकार इसे अपनाकर काम आसान कर सकती है।
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जरूरी है सजा दिलाना
पीयू में फारेसिंक साइंस की चेयरपर्सन डॉ. श्वेता शर्मा ने डेट रेप ड्रग्स पर रिसर्च किया है। उन्होंने एक सेंसर तैयार किया है, जो डाइजेपाम दवा की पहचान करेगा। यदि कोल्ड ड्रिंक या जूस में मिलाकर कोई दवा पिलाई जाती है तो सेंसर से उसका पता लग जाएगा। रेप आदि की घटनाओं में ऐसे ही उदाहरण सामने आते हैं। फारेंसिक टेक्सीकोलॉजी से यह रिसर्च जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि किसी भी महिला के साथ घटना होती है, तो पहले वह अपना बचाव करें। यदि घटनाएं होती हैं तो ऐसे में आरोपी के नाखून मारे या बाल खींचें। नाखूनों में लगी त्वचा व बालों के जरिये डीएनए का पता लगाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि लिपिस्टिक के जरिये भी इसकी जांच हो सकती है।
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ये हैं सुझाव
फारेंसिक साइंस के लिए जागरूकता जरूरी है। इसके लिए कक्षा आठ से ही यह विषय पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
एसिड अटैक हुआ है तो उस पर पानी अधिक से अधिक डालें। कम पानी हो तो उसका प्रयोग न करें। अन्यथा डालने पर जलन अधिक होगी।
यदि किसी व्यक्ति ने जहर निगल लिया है, तो उसका असर कम करने के लिए सॉल्ट वाटर पिलाएं।
रोटी को जलाकर कार्बन की तरह बना लें और उसे विषाक्त खाए व्यक्ति को खिला दें। यह कार्बन जहर को सोख लेगा।

लिखित स्याही की उम्र का पता लगेगी
सहायक प्रोफेसर डॉ. विशाल शर्मा ने यूवी-विज स्पेक्ट्रोस्कापी के जरिये लिखित स्याही की उम्र का पता लगाया है। क्राइम में शामिल लोग दस्तावेजों पर ओवर राइटिंग आदि की जाती है। इस विधि के जरिये वह पकड़े जाएंगे। उन्हें सजा दिलाई जा सकेगी।
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