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Panchkula News: 86 लाख मिले, फिर भी नहीं बनीं सिविल अस्पताल की सड़कें

Sun, 30 Aug 2026 01:38 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 01:38 AM IST
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8.6 million received, yet Civil Hospital roads remain unbuilt.
एक साल से फाइलों में अटका सड़क निर्माण, 25 साल पुरानी जल-सीवरेज पाइपलाइन ने बढ़ाई मुसीबत; बारिश में घुटनों तक भरता है पानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। जिले के सबसे बड़े राजकीय सिविल अस्पताल में जलभराव और जर्जर सड़कों की समस्या से मरीजों और चिकित्सकों को कब राहत मिलेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अस्पताल की सड़कों के पुनर्निर्माण और तारकोल बिछाने के लिए पिछले साल एग्रीकल्चर एंड मार्केटिंग बोर्ड को 86 लाख रुपये का बजट हस्तांतरित किया गया था, लेकिन एक साल बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। मानसून में थोड़ी सी बारिश होते ही अस्पताल परिसर में घुटनों तक पानी भर जाता है। जर्जर सड़कों और बंद जल एवं सीवरेज निकासी पाइपलाइन ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
अस्पताल परिसर में नलकूप और अमृत औषधालय के निर्माण के चलते भी बदहाली बढ़ी है। मिट्टी धंसने के कारण जल निकासी और मल निकासी की नालियां जाम हो चुकी हैं। अस्पताल के अंदर और बाहर की सड़कें अलग-अलग विभागों के अधीन होने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
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86 लाख का बजट फाइलों में अटका
स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल जुलाई में अस्पताल परिसर की सड़कों के पुनर्निर्माण और तारकोल बिछाने के लिए एग्रीकल्चर एंड मार्केटिंग बोर्ड को 86 लाख रुपये हस्तांतरित किए थे। इस राशि से मुख्य द्वार से बाह्य रोगी विभाग, आपातकालीन वार्ड और नए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल तक की सड़कों का जीर्णोद्धार होना था। वाहन पार्किंग स्थल को भी पक्का किया जाना था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार बजट मिलने के बाद भी न तो निविदा प्रक्रिया शुरू हुई और न ही मौके का निरीक्षण किया गया।
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दो बार रिमाइंडर, फिर भी नहीं शुरू हुआ काम
स्वास्थ्य विभाग ने अगस्त और दिसंबर में दो बार स्मरण पत्र भेजे, लेकिन कार्रवाई के बजाय आश्वासन ही मिले। एक साल बीतने के बाद सड़कें और जर्जर हो गई हैं। गड्ढों में पानी भरने से मरीजों और अन्य लोगों के गिरने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।

25 साल पुरानी पाइपलाइन भी बनी मुसीबत
अस्पताल की जल एवं मल निकासी व्यवस्था करीब 25 साल पुरानी है। यह प्रणाली वर्ष 2000 के आसपास बिछाई गई थी। इसके बाद न तो इसकी पर्याप्त मरम्मत हुई और न ही क्षमता बढ़ाई गई। पाइपलाइन में जाम और टूट-फूट के कारण बारिश का पानी और गंदा पानी सही तरीके से बाहर नहीं निकल पा रहा है।
चार दिन पहले हुई तेज बारिश में अस्पताल परिसर में चारों तरफ घुटनों तक पानी भर गया था। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने निकासी का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। नालियां खोलने के बाद भी पानी नहीं निकला तो अस्पताल प्रबंधन ने मोटर से नली जोड़कर पानी बाहर निकलवाया। अब दोबारा बारिश होने पर जलभराव का खतरा बना हुआ है।


कोट
पिछले साल एग्रीकल्चर एंड मार्केटिंग बोर्ड को 86 लाख रुपये का बजट हस्तांतरित होने के काफी समय बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। इसके बाद विभाग को ई-मेल के जरिए कई बार स्मरण पत्र भी भेजे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अब हालात यह हैं कि स्वास्थ्य विभाग को मानसून में बरसात के पानी की निकासी के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से मदद लेनी पड़ रही है।
-डा. आरएस चौहान, पीएमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग
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