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गड़बड़झाला : पीपीपी से मिलान नहीं हो रहे 79 हजार राशन कार्ड होंगे रद्द
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चंडीगढ़। नौकरियों के फर्जीवाड़े के बाद हरियाणा में अब राशन कार्ड गड़बड़झाला सामने आया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की बीपीएल सूची में शामिल 79 हजार राशन कार्डों की परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में जानकारी नहीं है। इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर सरकार ने जिलास्तर पर इन राशन कार्डों की वेरिफिकेशन का काम शुरू कर दिया है। जांच में भी इनका रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है, विभाग अब इन कार्ड को रद्द करने की तैयारी में है।
इस समय प्रदेश में अंत्योदय योजना और बीपीएल के तहत 11 लाख 41 हजार परिवार लाभार्थी हैं। इनमें से गुलाबी कार्ड वाले 248134 और बीपीएल कार्डधारक 892749 हैं। कार्डधारकों के रिकॉर्ड का परिवार पहचान पत्र के साथ इनके मिलान का कार्य चल रहा है। प्रथम चरण में 79 हजार ऐसे उपभोक्ता हैं, जिनका रिकॉर्ड पीपीपी में नहीं है। जिला स्तर पर 70 प्रतिशत से अधिक वेरिफिकेशन पूरी की जा चुकी है, जिसमें ये कार्डधारक नहीं मिल रहे हैं। गौरतलब है कि दो साल पहले भी विभाग ने बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया था और करीब 3.20 लाख कार्ड रद्द किए थे। विभाग के तत्कालीन एसीएस अनुराग रस्तोगी इस मामले में डीएफएससी की बैठक लेकर जांच के निर्देश दे चुके हैं।
डीबीटी से पकड़ में आया मामला
जून माह में हैफेड द्वारा तेल उपलब्ध नहीं कराए जाने पर सरकार ने घोषणा की थी कि तेल के बदले पात्र लोगों के बैंक खातों में 250-250 रुपये डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) से डाले जाएंगे। विभाग जब पीपीपी से लोगों का डाटा लिया और बैंक खाते लिए तो 10 लाख 62 हजार उपभोक्ताओं का ही डाटा मिल पाया। जबकि कुल पात्र 11.41 लाख हैं। करीब 79 हजार लोगों का न तो डाटा मिला है और न ही इन लोगों ने तेल के पैसे लेने के लिए विभाग से संपर्क साधा। इसके बाद मामला पकड़ में आया।
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पीपीपी और पीडीएस के 5 लाख परिवारों की जानकारी में अंतर
हरियाणा में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से करीब 27 लाख परिवार योजनाओं का लाभ लेते हैं। जांच में पीपीपी और पीडीएस (पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) के 5 लाख परिवारों की जानकारी में अंतर है। विभाग ने इनकी भी जांच का काम शुरू कर दिया है। अब तक 2.51 लाख की वेरिफिकेशन हो चुकी है और शेष पर काम जारी है। सरकार ने 1 नवंबर से 456 योजनाओं का लाभ लेने के लिए पीपीपी अनिवार्य कर दिया है। गौरतलब है कि प्रदेश में करीब 70 लाख परिवार हैं और इनमें से 65 लाख का पीपीपी के लिए सत्यापन हो चुका है।
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इस समय प्रदेश में अंत्योदय योजना और बीपीएल के तहत 11 लाख 41 हजार परिवार लाभार्थी हैं। इनमें से गुलाबी कार्ड वाले 248134 और बीपीएल कार्डधारक 892749 हैं। कार्डधारकों के रिकॉर्ड का परिवार पहचान पत्र के साथ इनके मिलान का कार्य चल रहा है। प्रथम चरण में 79 हजार ऐसे उपभोक्ता हैं, जिनका रिकॉर्ड पीपीपी में नहीं है। जिला स्तर पर 70 प्रतिशत से अधिक वेरिफिकेशन पूरी की जा चुकी है, जिसमें ये कार्डधारक नहीं मिल रहे हैं। गौरतलब है कि दो साल पहले भी विभाग ने बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया था और करीब 3.20 लाख कार्ड रद्द किए थे। विभाग के तत्कालीन एसीएस अनुराग रस्तोगी इस मामले में डीएफएससी की बैठक लेकर जांच के निर्देश दे चुके हैं।
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डीबीटी से पकड़ में आया मामला
जून माह में हैफेड द्वारा तेल उपलब्ध नहीं कराए जाने पर सरकार ने घोषणा की थी कि तेल के बदले पात्र लोगों के बैंक खातों में 250-250 रुपये डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) से डाले जाएंगे। विभाग जब पीपीपी से लोगों का डाटा लिया और बैंक खाते लिए तो 10 लाख 62 हजार उपभोक्ताओं का ही डाटा मिल पाया। जबकि कुल पात्र 11.41 लाख हैं। करीब 79 हजार लोगों का न तो डाटा मिला है और न ही इन लोगों ने तेल के पैसे लेने के लिए विभाग से संपर्क साधा। इसके बाद मामला पकड़ में आया।
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पीपीपी और पीडीएस के 5 लाख परिवारों की जानकारी में अंतर
हरियाणा में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से करीब 27 लाख परिवार योजनाओं का लाभ लेते हैं। जांच में पीपीपी और पीडीएस (पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) के 5 लाख परिवारों की जानकारी में अंतर है। विभाग ने इनकी भी जांच का काम शुरू कर दिया है। अब तक 2.51 लाख की वेरिफिकेशन हो चुकी है और शेष पर काम जारी है। सरकार ने 1 नवंबर से 456 योजनाओं का लाभ लेने के लिए पीपीपी अनिवार्य कर दिया है। गौरतलब है कि प्रदेश में करीब 70 लाख परिवार हैं और इनमें से 65 लाख का पीपीपी के लिए सत्यापन हो चुका है।