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Highcourt: 73 साल के व्यक्ति की सजा निलंबित, लगाने होंगे 20 पौधे; रखना होगा एक साल तक ख्याल

Sat, 14 Mar 2026 01:56 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sat, 14 Mar 2026 01:56 AM IST
सार

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 73 वर्षीय गुरदीप सिंह मनचंदा पांच साल के कठोर कारावास और 30 हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी। मामला 2013 में दर्ज फतेहगढ़ साहिब के एक पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था।

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73-year-old man's sentence suspended; must plant 20 trees and care for them for a year
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी ठहराए गए 73 वर्षीय गुरदीप सिंह मनचंदा की सजा को निलंबित करते हुए 20 पौधे लगाने और उनकी एक साल तक देखभाल करने की अनोखी शर्त रखी है। साथ ही पौधरोपण का प्रमाण भी फोटो के रूप में अदालत में पेश करना होगा।
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अदालत ने कहा कि अपील पहले ही स्वीकार की जा चुकी है और मामलों के भारी लंबित होने के कारण इसकी जल्द सुनवाई संभव नहीं है। ऐसे में अपील लंबित रहने के दौरान दोषी को लगातार जेल में रखना उचित नहीं होगा। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने गुरदीप सिंह द्वारा दायर उस आवेदन को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया जिसमें अपील लंबित रहने के दौरान सजा निलंबित करने की मांग की गई थी।
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मनचंदा ने 30 जुलाई 2024 के उस फैसले के खिलाफ लंबित अपील के दौरान सजा निलंबित करने के लिए अर्जी की थी जिसमें उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें पांच साल के कठोर कारावास और 30 हजार जुर्माने की सजा सुनाई थी। यह मामला वर्ष 2013 में दर्ज फतेहगढ़ साहिब के एक पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ था।
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याची ने दलील दी कि जिस मूल आपराधिक मामले के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप बना था उसमें ट्रायल कोर्ट फरवरी 2019 में मनचंदा को बरी कर चुकी है। अन्य तीन मामलों में भी उन्हें अदालत से राहत मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ता 73 वर्ष के हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।


याची और सरकार की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया और पाया कि याचिकाकर्ता मूल आपराधिक मामले में पहले ही बरी हो चुका है। साथ ही हिरासत प्रमाणपत्र के अनुसार वह एक वर्ष चार महीने और 27 दिन जेल में बिता चुका है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि अपील के लंबित रहने के दौरान आरोपी को जेल में रखने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं रहेगा। मनचंदा बिना अदालत की अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकेगा। 
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