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संस्कृति के संरक्षण के लिए लड़ना चाहिए: डा. सुखदेव सिंह सिरसा
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फोटो सहित
मां बोली और विरसे से जोड़ना होगा युवा पीढ़ी को
सबहेड
पंजाबी कान्फ्रेंस के दूसरे दिन यूके से आए एमपी तनमनजीत सिंह ढेसी ने कहा, पंजाबी भाईचारे को कायम रखना होगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाबी कान्फ्रेंस पंजाबियों को स्व आलोचना का एक ऐसा मंच प्रदान करती है, जहां हम समूह पंजाबी, चाहे वह दुनिया के किसी कोने में बसते हों, एक जगह एकत्रित होकर पंजाबी भाईचारे की चुनौतियों, समस्याओं और उसके विस्तार पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं। यह विचार पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में आयोजित पंजाबी कान्फ्रेंस ‘अमली पंजाबी कान्फ्रेंस’ के दूसरे दिन शनिवार को यूके से पहुंचे एमपी तनमनजीत सिंह ढेसी ने रखे। उन्होंने कहा कि हम दुनिया में कहीं भी बस जाएं, लेकिन आज हमें अपनी संस्कृति और अपनी भाषा को सही दिशा में ले जाने के लिए युवा पीढ़ियों को जोड़ना होगा। यह कार्यक्रम केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा की तरफ से करवाया जा रहा है।
संस्कृति को बचाने की जरूरत: डा. सुखदेव सिंह सिरसा
पंजाबी साहित्य अकादमी के पूर्व प्रधान और पंजाब यूनिवर्सिटी की बाबा फरीद चेयर के प्रमुख डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि वर्तमान समय में हमें अपनी संस्कृति को बचाने की जरूरत है। इसमें लेखकों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि युवाओं को पंजाबी संस्कृति के बारे में अधिक से अधिक जागरूक करने की जरूरत है। मंच की अध्यक्षता डा. साधु सिंह कैनेडा ने की। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाईचारों का मौजूदा संकट गंभीर भी है, घातक भी। इसलिए पंजाबी भाईचारा को बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें नसल वाद, धार्मिक भेदभाव के विरोध में एक साथ होकर काम करना होगा। डा. साधु सिंह ने कहा कि गुरुआें की शिक्षा के लिए पंजाबी जाने जाते हैं। इसलिए भारत में भ्रष्टाचार, अन्याय और भेदभाव को दूर करने के लिए हम सब को लड़ना होगा। प्रिंसिपल श्रवण सिंह ने बाबा फरीद की मिसाल दे कर पंजाबी संस्कृति से युवाओं एवं अन्य लोगों को अधिक से अधिक जोड़ने पर बल दिया। इस मौके पर श्रवण जफर (इंग्लैंड), जसविंदर एवं जनरल सिंह कहानीकार (कैनेडा), सुरिंदर मीत (इंग्लैंड), पंजाबी साहित्य अकादमी के सीनियर प्रधान सुरिंदर केले, शिरोमणि कवि दर्शन बुटर और प्रसिद्ध विद्वान डा. करमजीत सिंह ने भी संबोधन किया। मंच का संचालन डॉ. करमजीत सिंह ने किया। अंत में दर्शकों ने सवालों भी पूछे।
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मां बोली और विरसे से जोड़ना होगा युवा पीढ़ी को
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पंजाबी कान्फ्रेंस के दूसरे दिन यूके से आए एमपी तनमनजीत सिंह ढेसी ने कहा, पंजाबी भाईचारे को कायम रखना होगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाबी कान्फ्रेंस पंजाबियों को स्व आलोचना का एक ऐसा मंच प्रदान करती है, जहां हम समूह पंजाबी, चाहे वह दुनिया के किसी कोने में बसते हों, एक जगह एकत्रित होकर पंजाबी भाईचारे की चुनौतियों, समस्याओं और उसके विस्तार पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं। यह विचार पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में आयोजित पंजाबी कान्फ्रेंस ‘अमली पंजाबी कान्फ्रेंस’ के दूसरे दिन शनिवार को यूके से पहुंचे एमपी तनमनजीत सिंह ढेसी ने रखे। उन्होंने कहा कि हम दुनिया में कहीं भी बस जाएं, लेकिन आज हमें अपनी संस्कृति और अपनी भाषा को सही दिशा में ले जाने के लिए युवा पीढ़ियों को जोड़ना होगा। यह कार्यक्रम केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा की तरफ से करवाया जा रहा है।
संस्कृति को बचाने की जरूरत: डा. सुखदेव सिंह सिरसा
पंजाबी साहित्य अकादमी के पूर्व प्रधान और पंजाब यूनिवर्सिटी की बाबा फरीद चेयर के प्रमुख डॉ. सुखदेव सिंह सिरसा ने कहा कि वर्तमान समय में हमें अपनी संस्कृति को बचाने की जरूरत है। इसमें लेखकों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि युवाओं को पंजाबी संस्कृति के बारे में अधिक से अधिक जागरूक करने की जरूरत है। मंच की अध्यक्षता डा. साधु सिंह कैनेडा ने की। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाईचारों का मौजूदा संकट गंभीर भी है, घातक भी। इसलिए पंजाबी भाईचारा को बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें नसल वाद, धार्मिक भेदभाव के विरोध में एक साथ होकर काम करना होगा। डा. साधु सिंह ने कहा कि गुरुआें की शिक्षा के लिए पंजाबी जाने जाते हैं। इसलिए भारत में भ्रष्टाचार, अन्याय और भेदभाव को दूर करने के लिए हम सब को लड़ना होगा। प्रिंसिपल श्रवण सिंह ने बाबा फरीद की मिसाल दे कर पंजाबी संस्कृति से युवाओं एवं अन्य लोगों को अधिक से अधिक जोड़ने पर बल दिया। इस मौके पर श्रवण जफर (इंग्लैंड), जसविंदर एवं जनरल सिंह कहानीकार (कैनेडा), सुरिंदर मीत (इंग्लैंड), पंजाबी साहित्य अकादमी के सीनियर प्रधान सुरिंदर केले, शिरोमणि कवि दर्शन बुटर और प्रसिद्ध विद्वान डा. करमजीत सिंह ने भी संबोधन किया। मंच का संचालन डॉ. करमजीत सिंह ने किया। अंत में दर्शकों ने सवालों भी पूछे।
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