{"_id":"5a9efb494f1c1bdd0b8b7499","slug":"71520368457-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंस्पेक्टर को नहीं मिली राहत, याचिका डिस्पॉज ऑफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंस्पेक्टर को नहीं मिली राहत, याचिका डिस्पॉज ऑफ
Updated Wed, 07 Mar 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंस्पेक्टर दिलशेर को नहीं मिली कैट से राहत, याचिका डिस्पॉज ऑफ
ट्रिब्यूनल ने संबंधित अथॉरिटी को चार महीने में जांच पूरी करने के दिए आदेश
याचिकाकर्ता को इंक्वायरी में सहयोग करने को भी कहा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पुलिस इंस्पेक्टर दिलशेर सिंह को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) से कोई राहत नहीं मिल सकी है। ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को इंस्पेक्टर दिलशेर की उनके खिलाफ बिना शोकॉज नोटिस दिए विभागीय जांच शुरू करने के आदेश पर रोक लगाने संबंधी याचिका को डिस्पॉज ऑफ कर दिया। साथ ही संबंधित अथॉरिटी को आदेश दिए हैं कि उनके खिलाफ चल रही जांच को चार महीने में समाप्त करें। वहीं याचिकाकर्ता इंस्पेक्टर दिलशेर को इस जांच में सहयोग करने के आदेश दिए हैं।
इससे पहले 8 फरवरी को दायर याचिका में इंस्पेक्टर दिलशेर सिंह ने ट्रिब्यूनल से विभाग द्वारा 30 जनवरी 2018 को उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी करने के आदेश को रद्द करने की अपील की थी, ताकि उनका नाम डीएसपी पद पर प्रमोशन के लिए डीपीसी के लिए भेजा जा सके। याचिका में भारत सरकार, यूटी प्रशासन को गृह सचिव के जरिए, डीजीपी, एसएसपी ट्रैफिक एंड सिक्योरिटी के अलावा डीएसपी वुमन एंड चाइल्ड सपोर्ट केयर यूनिट को भी पार्टी बनाया गया था। यूटी प्रशासन की ओर से पेश हुए एडवोकेट ने मामले में मंगलवार को जवाब दाखिल किया और याचिकाकर्ता के खिलाफ इंक्वायरी संबंधी रिकार्ड पेश किया। इस पर सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने याचिका डिस्पॉज ऑफ कर दी। याचिका में इंस्पेक्टर दिलशेर ने डीजीपी तेजिंदर सिंह लूथरा और डीएसपी अंजिता चेपियाल को नाम से पार्टी बनाया गया था।
बाक्स
यह कहा था याचिका में
इंस्पेक्टर दिलशेर सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि, उन्होंने 3 अप्रैल, 1989 को एएसआई ज्वाइन किया था। 9 दिसंबर, 1993 को उन्हें सब इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट किया गया। इसके बाद नवंबर 2009 में वह इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट हुए। पंजाब पुलिस सर्विस रूल्स 1959 के तहत वह वर्तमान में डीएसपी की पोस्ट के लिए योग्य हैं। इसके लिए पहले विभाग के समक्ष रिप्रेजेंटेशन दी, लेकिन विभाग स्तर पर कोई कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने व तीन अन्य इंस्पेक्टरों ने ट्रिब्यूनल में केस दायर किया। इस पर ट्रिब्यूनल ने 26 अप्रैल 2017 को विभाग और प्रशासन को योग्य इंस्पेक्टरों को प्रमोट कर उनकी रिप्रेजेंटेशन तय करने के आदेश दिए थे।
विज्ञापन
बाक्स
तीन इंस्पेक्टरों को डीएसपी बनाया, लेकिन उन्हें नहीं
प्रशासन की ओर से दायर रिव्यू पिटीशन को भी ट्रिब्यूनल 14 नवंबर, 2017 को खारिज कर चुकी है। इसके बाद विभाग ने उनके साथ के तीन इंस्पेक्टरों को प्रमोट कर डीएसपी बना दिया, लेकिन उसकी प्रमोशन के लिए डीपीसी नहीं की। बल्कि उनके खिलाफ एक पुराने मामले में इंक्वायरी खोल दी ताकि उनका नाम डीएसपी पद पर प्रमोशन के लिए न जा सके। याचिकाकर्ता के अनुसार विभाग ने डीपीसी के लिए बैठक 22 जनवरी को की थी, जबकि उनके खिलाफ इंक्वायरी 30 जनवरी को खोली गई है। उनके अनुसार वर्तमान में तीन पोस्ट डीएसपी की खाली थी। इनमें से दो पर इंस्पेक्टर दलीप रत्न और हरजीत कौर को प्रमोट कर डीएसपी बना दिया गया है।
डीएसपी पर लगाया था केस वापस लेने के लिए धमकाने का आरोप
इंस्पेक्टर दिलशेर ने याचिका में आरोप लगाया कि आलाअधिकारियों के कहने पर एक डीएसपी ने उन्हें आफिस बुलाकर उन पर केस और अवमानना याचिका वापस लेने को लेकर धमकाया था। साथ ही ऐसा न करने पर उनके खिलाफ डिपार्टमेंटल इंक्वायरी खोलने की बात कही थी। इंस्पेक्टर ने इस बातचीत की वीडियो रिकार्डिंग कर ली और इसकी सीडी भी केस के साथ लगाई थी। इसके अलावा दोनों के बीच की बातचीत की ट्रांसक्रिप्टेड भी याचिका के साथ लगाई थी।
इस मामले में खोली थी इंक्वायरी
याचिकाकर्ता के अनुसार जुलाई 2017 में उन्होंने एक्स इंडिया लीव के लिए अप्लाई किया था। 20 जुलाई को संबंधित अथॉरिटी की ओर से उनकी छुट्टी मंजूर कर दी गई। उन्हें 1 अगस्त से 29 अक्तूबर 2017 के लिए कनाडा में रहने वाले बेटे से मिलने जाने के लिए विभागीय स्तर पर मंजूरी मिल गई थी। लेकिन, किन्हीं कारणों से कनाडा एंबेसी की ओर से उन्हें इस दौरान का वीजा नहीं मिल पाया, जिससे वह विदेश नहीं जा सके थे। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 29 अक्तूबर 2017 को विभाग में रिपोर्ट कर दी थी और ड्यूटी पर चार्ज संभाल लिया था। इसी मामले में अब उनके खिलाफ इंक्वायरी खोली गई है, जो अवैध, मनमाने और अन्यायपूर्ण तरीके से की गई कार्रवाई है।
विज्ञापन
ट्रिब्यूनल ने संबंधित अथॉरिटी को चार महीने में जांच पूरी करने के दिए आदेश
याचिकाकर्ता को इंक्वायरी में सहयोग करने को भी कहा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पुलिस इंस्पेक्टर दिलशेर सिंह को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) से कोई राहत नहीं मिल सकी है। ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को इंस्पेक्टर दिलशेर की उनके खिलाफ बिना शोकॉज नोटिस दिए विभागीय जांच शुरू करने के आदेश पर रोक लगाने संबंधी याचिका को डिस्पॉज ऑफ कर दिया। साथ ही संबंधित अथॉरिटी को आदेश दिए हैं कि उनके खिलाफ चल रही जांच को चार महीने में समाप्त करें। वहीं याचिकाकर्ता इंस्पेक्टर दिलशेर को इस जांच में सहयोग करने के आदेश दिए हैं।
इससे पहले 8 फरवरी को दायर याचिका में इंस्पेक्टर दिलशेर सिंह ने ट्रिब्यूनल से विभाग द्वारा 30 जनवरी 2018 को उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी करने के आदेश को रद्द करने की अपील की थी, ताकि उनका नाम डीएसपी पद पर प्रमोशन के लिए डीपीसी के लिए भेजा जा सके। याचिका में भारत सरकार, यूटी प्रशासन को गृह सचिव के जरिए, डीजीपी, एसएसपी ट्रैफिक एंड सिक्योरिटी के अलावा डीएसपी वुमन एंड चाइल्ड सपोर्ट केयर यूनिट को भी पार्टी बनाया गया था। यूटी प्रशासन की ओर से पेश हुए एडवोकेट ने मामले में मंगलवार को जवाब दाखिल किया और याचिकाकर्ता के खिलाफ इंक्वायरी संबंधी रिकार्ड पेश किया। इस पर सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने याचिका डिस्पॉज ऑफ कर दी। याचिका में इंस्पेक्टर दिलशेर ने डीजीपी तेजिंदर सिंह लूथरा और डीएसपी अंजिता चेपियाल को नाम से पार्टी बनाया गया था।
विज्ञापन
बाक्स
यह कहा था याचिका में
इंस्पेक्टर दिलशेर सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि, उन्होंने 3 अप्रैल, 1989 को एएसआई ज्वाइन किया था। 9 दिसंबर, 1993 को उन्हें सब इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट किया गया। इसके बाद नवंबर 2009 में वह इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट हुए। पंजाब पुलिस सर्विस रूल्स 1959 के तहत वह वर्तमान में डीएसपी की पोस्ट के लिए योग्य हैं। इसके लिए पहले विभाग के समक्ष रिप्रेजेंटेशन दी, लेकिन विभाग स्तर पर कोई कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने व तीन अन्य इंस्पेक्टरों ने ट्रिब्यूनल में केस दायर किया। इस पर ट्रिब्यूनल ने 26 अप्रैल 2017 को विभाग और प्रशासन को योग्य इंस्पेक्टरों को प्रमोट कर उनकी रिप्रेजेंटेशन तय करने के आदेश दिए थे।
विज्ञापन
बाक्स
तीन इंस्पेक्टरों को डीएसपी बनाया, लेकिन उन्हें नहीं
प्रशासन की ओर से दायर रिव्यू पिटीशन को भी ट्रिब्यूनल 14 नवंबर, 2017 को खारिज कर चुकी है। इसके बाद विभाग ने उनके साथ के तीन इंस्पेक्टरों को प्रमोट कर डीएसपी बना दिया, लेकिन उसकी प्रमोशन के लिए डीपीसी नहीं की। बल्कि उनके खिलाफ एक पुराने मामले में इंक्वायरी खोल दी ताकि उनका नाम डीएसपी पद पर प्रमोशन के लिए न जा सके। याचिकाकर्ता के अनुसार विभाग ने डीपीसी के लिए बैठक 22 जनवरी को की थी, जबकि उनके खिलाफ इंक्वायरी 30 जनवरी को खोली गई है। उनके अनुसार वर्तमान में तीन पोस्ट डीएसपी की खाली थी। इनमें से दो पर इंस्पेक्टर दलीप रत्न और हरजीत कौर को प्रमोट कर डीएसपी बना दिया गया है।
डीएसपी पर लगाया था केस वापस लेने के लिए धमकाने का आरोप
इंस्पेक्टर दिलशेर ने याचिका में आरोप लगाया कि आलाअधिकारियों के कहने पर एक डीएसपी ने उन्हें आफिस बुलाकर उन पर केस और अवमानना याचिका वापस लेने को लेकर धमकाया था। साथ ही ऐसा न करने पर उनके खिलाफ डिपार्टमेंटल इंक्वायरी खोलने की बात कही थी। इंस्पेक्टर ने इस बातचीत की वीडियो रिकार्डिंग कर ली और इसकी सीडी भी केस के साथ लगाई थी। इसके अलावा दोनों के बीच की बातचीत की ट्रांसक्रिप्टेड भी याचिका के साथ लगाई थी।
इस मामले में खोली थी इंक्वायरी
याचिकाकर्ता के अनुसार जुलाई 2017 में उन्होंने एक्स इंडिया लीव के लिए अप्लाई किया था। 20 जुलाई को संबंधित अथॉरिटी की ओर से उनकी छुट्टी मंजूर कर दी गई। उन्हें 1 अगस्त से 29 अक्तूबर 2017 के लिए कनाडा में रहने वाले बेटे से मिलने जाने के लिए विभागीय स्तर पर मंजूरी मिल गई थी। लेकिन, किन्हीं कारणों से कनाडा एंबेसी की ओर से उन्हें इस दौरान का वीजा नहीं मिल पाया, जिससे वह विदेश नहीं जा सके थे। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 29 अक्तूबर 2017 को विभाग में रिपोर्ट कर दी थी और ड्यूटी पर चार्ज संभाल लिया था। इसी मामले में अब उनके खिलाफ इंक्वायरी खोली गई है, जो अवैध, मनमाने और अन्यायपूर्ण तरीके से की गई कार्रवाई है।