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Panchkula News: शिक्षकों की तबादला नीति पर हाईकोर्ट सख्त, तीन माह में दोबारा समीक्षा का आदेश

Tue, 25 Aug 2026 10:41 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 10:41 PM IST
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High Court strict on teachers' transfer policy; orders fresh review within three months.
हाईकोर्ट ने कहा- 2019 की तबादला नीति में कई खामियां
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कोर्ट ने कहा कि इससे अधिकारियों को मनमाने फैसले की गुंजाइश मिलती है
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की वर्ष 2019 की शिक्षक तबादला नीति पर कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने इस नीति की व्यापक स्तर पर दोबारा समीक्षा करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि नीति में कई खामियां और ऐसे प्रावधान हैं जिनसे अधिकारियों को बिना स्पष्ट मानदंड के निर्णय लेने की गुंजाइश मिलती है।
इन खामियों के कारण कर्मचारियों में असंतोष पैदा हो रहा है। बड़ी संख्या में शिक्षक अपनी शिकायतें लेकर अदालत पहुंच रहे हैं। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने पंजाब के स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को निर्देश दिए हैं। उन्हें एक समिति गठित कर तबादला नीति के सभी पहलुओं की दोबारा जांच करवानी होगी।
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समिति को तीन माह में खामियों को दूर कर पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी होगी। अदालत ने साफ किया कि संशोधित व्यवस्था में अधिकारियों को मनमाने ढंग से विवेकाधिकार इस्तेमाल करने की कोई गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए। नीति के कारण प्रशासन को कर्मचारियों के तबादले में अत्यधिक और अनियंत्रित अधिकार मिल रहे हैं। ऐसे अधिकारों से मनमाने फैसलों की संभावना बढ़ जाती है।
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याचिकाओं और शिकायतों का आधार :

हाईकोर्ट के समक्ष तबादलों से जुड़ी 26 याचिकाएं लंबित थीं। इनमें शिक्षकों ने तबादला आदेश जारी न होने की शिकायत की थी। कुछ शिक्षकों को तबादला होने के बावजूद कार्यमुक्त नहीं किया गया था। विभाग की वेबसाइट पर रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध न कराने की शिकायतें भी उठाई गई थीं। इन सभी मामलों की जड़ वर्ष 2019 की तबादला नीति से जुड़ी थी।




सरकार की स्वीकारोक्ति और आगे का मार्ग :

सुनवाई के दौरान विभाग की सचिव सोनाली गिरी अदालत में पेश हुईं। उन्होंने स्वीकार किया कि नीति की व्यापक स्तर पर दोबारा समीक्षा की आवश्यकता है। सोनाली गिरी ने यह भी माना कि नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे भविष्य में सामने आने वाले सभी संभावित विवादों का समाधान हो सके। सरकार की इस स्वीकारोक्ति के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल नीति की वैधता पर अंतिम फैसला देने के बजाय सरकार को खामियां दूर करने का अवसर देना उचित समझा।
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