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चुनाव के लिए 6 फरवरी की तारीख स्वीकार नहीं, 26 जनवरी से पहले की तारीख बताएं : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। मेयर चुनाव 6 फरवरी तक टालने के डीसी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने शनिवार को यूटी प्रशासन को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यह तारीख स्वीकार नहीं की जा सकती और अगली सुनवाई पर प्रशासन को 26 जनवरी से पहले की तारीख तय कर अदालत को सूचित करने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए आम आदमी पार्टी व कांग्रेस गठबंधन से मेयर पद के दावेदार कुलदीप कुमार ने डीसी के उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी जिसके तहत चुनाव के लिए 6 फरवरी तारीख तय की गई थी। याची की दलील थी कि एक बार डीसी ने चुनाव कार्यक्रम तय कर दिया तो उसके बाद उसे इसमें संशोधन का अधिकार नहीं है। इस मुद्दे पर करीब एक घंटे तक बहस चली। इस दौरान प्रशासन ने कहा कि कानून-व्यवस्था की समस्या के चलते 18 जनवरी को चुनाव नहीं करवाया जा सका था। हाईकोर्ट ने इस पर प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि ऐसा है तो यह डीजीपी की नाकामी है।
इस पर प्रशासन की ओर से कहा गया कि आगामी दिनों में संवेदनशील कार्यक्रमों को देखते हुए चुनाव के लिए 6 फरवरी तारीख तय की गई है। सोमवार को राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा है और इसके चलते शहर में चुनाव नहीं करवाया जा सकता। इसके बाद 26 जनवरी के कार्यक्रम के चलते भी चुनाव तब तक संभव नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था की दलील देते हुए चुनाव टालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह तो केवल मेयर चुनाव है और इसमें कानून-व्यवस्था की दलील दी जा रही है तो आम चुनाव कैसे संपन्न करवाएंगे। यदि अगली सुनवाई पर कानून-व्यवस्था की दलील प्रशासन की ओर से दी गई तो हम प्रशासन को अयोग्य करार दे देंगे जो दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगली सुनवाई पर कोई फर्जी दलील स्वीकार नहीं की जाएगी और यदि आपके अधिकारी चुनाव करवाने के लिए तैयार नहीं होंगे तो अदालत को इसके लिए आदेश जारी करना पड़ेगा। ऐसे में हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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इस पर प्रशासन की ओर से कहा गया कि आगामी दिनों में संवेदनशील कार्यक्रमों को देखते हुए चुनाव के लिए 6 फरवरी तारीख तय की गई है। सोमवार को राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा है और इसके चलते शहर में चुनाव नहीं करवाया जा सकता। इसके बाद 26 जनवरी के कार्यक्रम के चलते भी चुनाव तब तक संभव नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था की दलील देते हुए चुनाव टालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह तो केवल मेयर चुनाव है और इसमें कानून-व्यवस्था की दलील दी जा रही है तो आम चुनाव कैसे संपन्न करवाएंगे। यदि अगली सुनवाई पर कानून-व्यवस्था की दलील प्रशासन की ओर से दी गई तो हम प्रशासन को अयोग्य करार दे देंगे जो दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
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हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगली सुनवाई पर कोई फर्जी दलील स्वीकार नहीं की जाएगी और यदि आपके अधिकारी चुनाव करवाने के लिए तैयार नहीं होंगे तो अदालत को इसके लिए आदेश जारी करना पड़ेगा। ऐसे में हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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