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कानूनी मामलों के बढ़ने से डाक्टर-मरीज के रिश्ते में आई कमी
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फोटो समाचार
कानूनी मामलों के बढ़ने से डाक्टर-मरीज में आई विश्वास की कमी
मेडिकोस लीगल एक्शन ग्रुप की ओर से आयोजित की गई वार्षिक कांफ्रेंस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मेडिकोस लीगल एक्शन ग्रुप (एमएलएजी) ने रविवार को आईएमए कांप्लेक्स सेक्टर 35 के ग्रेवाल आडिटोरियम में पांचवीं वार्षिक कांफ्रेंस आयोजित की। इसमें देश भर के 400 से अधिक डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। इस साल कॉन्फ्रेंस का थीम ‘डिफेंडिंग द डॉक्टर्स इन द इरा ऑफ इन्क्रीजिंग ट्रस्ट डेफिसिट (विश्वास की कमी के युग में डॉक्टरों की रक्षा) है। आर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. नीरज नागपाल ने बताया कि डॉक्टर्स आज भी समाज के सबसे नैतिक क्षेत्रों में काम करने वाले हैं। भारत में डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी मामलों की बढ़ती संख्या के कारण डॉक्टर और मरीज में विश्वास की कमी बनी है। ऐसे माहौल में वे रक्षात्मक उपचार का रास्ता अपना रहे हैं। डॉक्टरों से गैर-वास्तविक उम्मीदें लगाई जा रही हैं और स्वास्थ्य सेवा में निवेश करने के लिए सरकारों की लगातार विफलता के लिए उन्हें दोषी ठहराए जाने का प्रचार किया जा रहा है। कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन जस्टिस अजय के मित्तल ने किया।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को निराश नहीं होना चाहिए और इस घटे हुए विश्वास को फिर से बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए। इस दौरान ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. पुरविश पारिख की ओर से कम्युनिकेशन स्किल्स पर तीन घंटे की वर्कशाप हुई। इस वर्ष डॉ. लक्ष्मी गर्ग ओरेशन का सम्मान डॉ. हितेश भट्ट को गया। स्वर्गीय डॉ. सुनील के सिंह की पत्नी सरिता सिंह, जो ड्यूटी पर रहते हुए मारे गए थे, को 2019 के लिए एमएलएजी टी सेथुलक्ष्मी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। डॉक्टरों के खिलाफ दायर किए गए अदालती मामलों की तैयारी के बारे में एक पैनल चर्चा भी की गई। इस मौके पर चंडीगढ़ हेल्थ डायरेक्टर डॉ. जी दीवान भी मौजूद रहे।
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कानूनी मामलों के बढ़ने से डाक्टर-मरीज में आई विश्वास की कमी
मेडिकोस लीगल एक्शन ग्रुप की ओर से आयोजित की गई वार्षिक कांफ्रेंस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मेडिकोस लीगल एक्शन ग्रुप (एमएलएजी) ने रविवार को आईएमए कांप्लेक्स सेक्टर 35 के ग्रेवाल आडिटोरियम में पांचवीं वार्षिक कांफ्रेंस आयोजित की। इसमें देश भर के 400 से अधिक डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। इस साल कॉन्फ्रेंस का थीम ‘डिफेंडिंग द डॉक्टर्स इन द इरा ऑफ इन्क्रीजिंग ट्रस्ट डेफिसिट (विश्वास की कमी के युग में डॉक्टरों की रक्षा) है। आर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. नीरज नागपाल ने बताया कि डॉक्टर्स आज भी समाज के सबसे नैतिक क्षेत्रों में काम करने वाले हैं। भारत में डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी मामलों की बढ़ती संख्या के कारण डॉक्टर और मरीज में विश्वास की कमी बनी है। ऐसे माहौल में वे रक्षात्मक उपचार का रास्ता अपना रहे हैं। डॉक्टरों से गैर-वास्तविक उम्मीदें लगाई जा रही हैं और स्वास्थ्य सेवा में निवेश करने के लिए सरकारों की लगातार विफलता के लिए उन्हें दोषी ठहराए जाने का प्रचार किया जा रहा है। कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन जस्टिस अजय के मित्तल ने किया।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को निराश नहीं होना चाहिए और इस घटे हुए विश्वास को फिर से बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए। इस दौरान ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. पुरविश पारिख की ओर से कम्युनिकेशन स्किल्स पर तीन घंटे की वर्कशाप हुई। इस वर्ष डॉ. लक्ष्मी गर्ग ओरेशन का सम्मान डॉ. हितेश भट्ट को गया। स्वर्गीय डॉ. सुनील के सिंह की पत्नी सरिता सिंह, जो ड्यूटी पर रहते हुए मारे गए थे, को 2019 के लिए एमएलएजी टी सेथुलक्ष्मी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। डॉक्टरों के खिलाफ दायर किए गए अदालती मामलों की तैयारी के बारे में एक पैनल चर्चा भी की गई। इस मौके पर चंडीगढ़ हेल्थ डायरेक्टर डॉ. जी दीवान भी मौजूद रहे।
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