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तियां तीज दियां
Updated Sun, 23 Jul 2017 02:18 AM IST
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तियां तीज दियां में मुटियारों का गिद्दा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एक ओर पतंगें...दूसरी ओर झूले...ढोल की थाप पर बोलियां और गिद्दा...यह दृश्य है पंजाब कला भवन सेक्टर-16 का। पंजाब कला भवन में शनिवार को ‘तियां तीज दियां’ के रंग में रंगा हुआ था। इस कार्यक्रम का आयोजन किया पंजाब कला परिषद ने। इस कार्यक्रम के दौरान मुटियारों ने गिद्दा किया और झूलों पर पींघे लीं। इस मौके पर बच्चे, महिलाएं, बुजुर्गों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में पंजाब कला परिषद की चेयरपर्सन सतिंदर सत्ती, प्रसिद्ध कलाकार अनीता शब्दीश मौजूद रहीं। कार्यक्रम में रंग जमाया पंजाब की लोक गायिका गुरमीत बावा और उनकी दोनों बेटियों ने। इस मौके पर पंजाबी आर्केस्ट्रा का रंग भी खूब जमा।
महिलाओं ने कोठे तेरे चढ़ के देखा सूरज वी मत्था टेकदा..., मैं वारी मैं वारी मेरी समिये..., कदे हां करके कदे हूं..., तुस्सी घर साडे आए असी फूले न समाए ..,जैसी बोलियां गायीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्जवलित करके की गई। इस मौके पर सतिंदर सत्ती ने कहा कि पंजाब आर्ट्स काउंसिल का उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा पंजाबी संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि इसी के अंतर्गत तियां तीज दियां कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत मानसा, चमकौर साहिब, नाभा, जालंधर, गुरदासपुर में भी आयोजन किए जाएंगे।
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लोक गायकी हमारी संस्कृति है : गुरमीत बावा
पंजाबी लोक गायकी का बड़ा नाम गुरमीत बावा और उनकी दोनो बेटियों की प्रस्तुति ने यहां बैठे दर्शकों का दिल जीत लिया। पंजाब कला भवन में इस मौके पर खासतौर से आईं गुरमीत बावा ने कहा कि लोक गायकी हमारी संस्कृति है और उसका संरक्षण हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि पंजाब की लोक गायकी अभी खत्म नहीं हुई है। ग्रामीण इलाकों में लोग इसको पसंद करते हैं। हालांकि शहरों में ऐसा कम है। वैसे, मां की गायन परंपरा को आगे बढ़ा रही लाची और ग्लोरी बावा ने संगीत शिक्षण शुरू किया। लाची ने कहा कि हेक के मामले में दुनिया में उनका कोई सानी नहीं है। 45 सेकेंड तक लंबी हेक के माध्यम से उन्होंने रिकार्ड भी कायम किया। उनकी उम्र बेशक ज्यादा है पर रिकार्ड अभी भी कायम है। ध्यान रहे कि गुरमीत बावा को देश के विभिन्न राज्यों के अलावा राष्ट्रपति अवार्ड और 20वीं सदी की सर्वश्रेष्ठ महिला गायिका का अवार्ड मिला। ध्यान रहे कि गुरमीत बावा और उनके पति किरपाल बावा दोनों सरकारी नौकरी करते थे। वह 1966 का दौर था जब मियां-बीवी संगीत के रास्ते पर हमराही बने। इसके बाद नौकरी छोड़ी और पूरी तरह से पंजाबी गीत-संगीत को समर्पित हो गए।
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स्टूडेंट्स के फोक आर्केस्ट्रा ने जीता दिल
सात कलाकार और पचास से ज्यादा फोक इंस्ट्रूमेंट। ऐसा संभव तक नहीं कि सभी इंस्टूूूमेंट आसानी से बजाए जाएं। पंजाब कला भवन के मंच पर फोक आर्केस्ट्रा के दौरान यही कमाल दिखाई दिया। यहां आरआर बावा गर्ल्स कालेज की स्टूडेंट्स ने अपने पंजाबी फोक से श्रोताओं का दिल जीत लिया। इसमें सिमरन, राधा, प्रभजोत, अमनप्रीत, मनजिंदर, ममता शामिल थीं। इस आर्केस्ट्रा में ढपली, बुगजू, छड़ा, चिमटा बजाया तो वहीं राधा ने जब शंख बजाया तो सभी का दिल बाग बाग हो गया। वहीं मनजिंदर की वीणा से निकले सुरों ने सबको मोहित कर डाला। इस मौके पर सिमरन ने कहा कि उन्होंने इन इंस्ट्रूमेंट को बजाने का अभ्यास कुछ समय पहले ही किया है। उन्होंने कहा कि उनका यह ग्रुप कई जिलों में परफार्म कर चुका है और यूथ फेस्ट में भी उनके ग्रुप ने वाहवाही बटोरी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एक ओर पतंगें...दूसरी ओर झूले...ढोल की थाप पर बोलियां और गिद्दा...यह दृश्य है पंजाब कला भवन सेक्टर-16 का। पंजाब कला भवन में शनिवार को ‘तियां तीज दियां’ के रंग में रंगा हुआ था। इस कार्यक्रम का आयोजन किया पंजाब कला परिषद ने। इस कार्यक्रम के दौरान मुटियारों ने गिद्दा किया और झूलों पर पींघे लीं। इस मौके पर बच्चे, महिलाएं, बुजुर्गों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में पंजाब कला परिषद की चेयरपर्सन सतिंदर सत्ती, प्रसिद्ध कलाकार अनीता शब्दीश मौजूद रहीं। कार्यक्रम में रंग जमाया पंजाब की लोक गायिका गुरमीत बावा और उनकी दोनों बेटियों ने। इस मौके पर पंजाबी आर्केस्ट्रा का रंग भी खूब जमा।
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महिलाओं ने कोठे तेरे चढ़ के देखा सूरज वी मत्था टेकदा..., मैं वारी मैं वारी मेरी समिये..., कदे हां करके कदे हूं..., तुस्सी घर साडे आए असी फूले न समाए ..,जैसी बोलियां गायीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्जवलित करके की गई। इस मौके पर सतिंदर सत्ती ने कहा कि पंजाब आर्ट्स काउंसिल का उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा पंजाबी संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा कि इसी के अंतर्गत तियां तीज दियां कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत मानसा, चमकौर साहिब, नाभा, जालंधर, गुरदासपुर में भी आयोजन किए जाएंगे।
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लोक गायकी हमारी संस्कृति है : गुरमीत बावा
पंजाबी लोक गायकी का बड़ा नाम गुरमीत बावा और उनकी दोनो बेटियों की प्रस्तुति ने यहां बैठे दर्शकों का दिल जीत लिया। पंजाब कला भवन में इस मौके पर खासतौर से आईं गुरमीत बावा ने कहा कि लोक गायकी हमारी संस्कृति है और उसका संरक्षण हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि पंजाब की लोक गायकी अभी खत्म नहीं हुई है। ग्रामीण इलाकों में लोग इसको पसंद करते हैं। हालांकि शहरों में ऐसा कम है। वैसे, मां की गायन परंपरा को आगे बढ़ा रही लाची और ग्लोरी बावा ने संगीत शिक्षण शुरू किया। लाची ने कहा कि हेक के मामले में दुनिया में उनका कोई सानी नहीं है। 45 सेकेंड तक लंबी हेक के माध्यम से उन्होंने रिकार्ड भी कायम किया। उनकी उम्र बेशक ज्यादा है पर रिकार्ड अभी भी कायम है। ध्यान रहे कि गुरमीत बावा को देश के विभिन्न राज्यों के अलावा राष्ट्रपति अवार्ड और 20वीं सदी की सर्वश्रेष्ठ महिला गायिका का अवार्ड मिला। ध्यान रहे कि गुरमीत बावा और उनके पति किरपाल बावा दोनों सरकारी नौकरी करते थे। वह 1966 का दौर था जब मियां-बीवी संगीत के रास्ते पर हमराही बने। इसके बाद नौकरी छोड़ी और पूरी तरह से पंजाबी गीत-संगीत को समर्पित हो गए।
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स्टूडेंट्स के फोक आर्केस्ट्रा ने जीता दिल
सात कलाकार और पचास से ज्यादा फोक इंस्ट्रूमेंट। ऐसा संभव तक नहीं कि सभी इंस्टूूूमेंट आसानी से बजाए जाएं। पंजाब कला भवन के मंच पर फोक आर्केस्ट्रा के दौरान यही कमाल दिखाई दिया। यहां आरआर बावा गर्ल्स कालेज की स्टूडेंट्स ने अपने पंजाबी फोक से श्रोताओं का दिल जीत लिया। इसमें सिमरन, राधा, प्रभजोत, अमनप्रीत, मनजिंदर, ममता शामिल थीं। इस आर्केस्ट्रा में ढपली, बुगजू, छड़ा, चिमटा बजाया तो वहीं राधा ने जब शंख बजाया तो सभी का दिल बाग बाग हो गया। वहीं मनजिंदर की वीणा से निकले सुरों ने सबको मोहित कर डाला। इस मौके पर सिमरन ने कहा कि उन्होंने इन इंस्ट्रूमेंट को बजाने का अभ्यास कुछ समय पहले ही किया है। उन्होंने कहा कि उनका यह ग्रुप कई जिलों में परफार्म कर चुका है और यूथ फेस्ट में भी उनके ग्रुप ने वाहवाही बटोरी है।