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आधारहीन याचिका से बर्बाद किए कोर्ट के तीन साल, ठोका साढ़े सात लाख जुर्माना
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आधारहीन याचिका से बर्बाद किए कोर्ट के तीन साल, हाईकोर्ट ने ठोका साढ़े सात लाख जुर्माना
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जुर्माना राशि आर्मी वेलफेयर फंड व पैरामिलिट्री फोर्स के शहीदों के कोष में जमा करने के आदेश
तीनों याचिकाकर्ताओं से वसूले जाएंगे 2.5-2.5 लाख रुपये, डीसी करेंगे रिकवरी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पीजीआई के पीछे स्थित गांव नाडा में 48 कनाल और 12 मरला जमीन सरकारी अधिकारियों से सांठगांठ कर भू-माफियाओं द्वारा कब्जाने और इस पर प्लॉट्स काटकर बेचने के आरोप संबंधी जनहित याचिका को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साढ़े सात लाख का जुर्माना ठोका है। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के तीन साल बर्बाद किए हैं और उसे सबक सिखाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाकर्ताओं पर 2.5-2.5 लाख का जुर्माना लगाया है और यह राशि अर्मी वेलफेयर फंड और पैरामिलिट्री के शहीदों के लिए सौंपने के आदेश दिए हैं। रजिस्ट्रार जनरल इसकी वसूली के लिए डीसी को अधिकार देंगे और डीसी इसकी रिकवरी करेंगे।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया गया है कि वर्ष 1962-63 तक गांव नाडा में 1058 कनाल 5 मरला शामलात जमीन थी, जिसका खसरा नंबर-129 था। वर्ष 1966 में इस खसरा नंबर 129 के तीन हिस्से कर दिए गए, जिसमें से खसरा नंबर-129/1 में 1009 कनाल 13 मरले, 129/2 में 48 कनाल 12 मरले और खसरा नंबर-129/3 में बांट दिया गया। इसमें से खसरा नंबर- 129/2 की 48 कनाल 12 मरले जमीन गांव नाडा से चंडीगढ़ को ट्रांसफर कर दी गई थी। यह जमीन तो चंडीगढ़ में थी लेकिन पंजाब के साथ सटी हुई थी। इसका फायदा भू-माफिया ने उठाते हुए गत वर्ष से यह जमीन आगे प्लॉट्स काट कर बेचनी शुरू कर दी। जमीन खसरा नंबर 129/2 की थी जो चंडीगढ़ में है लेकिन इसे आगे बेच कर इसकी रजिस्ट्री खसरा नंबर-129/1 के नाम पर मोहाली की सब तहसील में किए जाने का आरोप लगाया गया। इसकी शिकायत याचिकाकर्ताओं ने चंडीगढ़ के एसएसपी को कर दी थी। शिकायत पर कोई भी कार्रवाई नहीं किए जाने पर इसकी शिकायत तहसीलदार को कर दी गई। बाद में इसकी शिकायत दिसंबर 2015 में प्रशासक के सलाहकार को की गई। इन सभी शिकायतों के बावजूद भी अभी तक इस शामलात जमीन पर भू-माफिया अवैध तरीके से कब्जा कर इसे आगे बेच रहे हैं। राजीव कुमार सहित तीन लोगों ने एडवोकेट मोहिंदर कुमार के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस अवैध कालोनी को हटाने और उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया और तीनों पर 2.5-2.5 लाख का जुर्माना लगाया है।
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जुर्माना राशि आर्मी वेलफेयर फंड व पैरामिलिट्री फोर्स के शहीदों के कोष में जमा करने के आदेश
तीनों याचिकाकर्ताओं से वसूले जाएंगे 2.5-2.5 लाख रुपये, डीसी करेंगे रिकवरी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पीजीआई के पीछे स्थित गांव नाडा में 48 कनाल और 12 मरला जमीन सरकारी अधिकारियों से सांठगांठ कर भू-माफियाओं द्वारा कब्जाने और इस पर प्लॉट्स काटकर बेचने के आरोप संबंधी जनहित याचिका को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साढ़े सात लाख का जुर्माना ठोका है। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के तीन साल बर्बाद किए हैं और उसे सबक सिखाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाकर्ताओं पर 2.5-2.5 लाख का जुर्माना लगाया है और यह राशि अर्मी वेलफेयर फंड और पैरामिलिट्री के शहीदों के लिए सौंपने के आदेश दिए हैं। रजिस्ट्रार जनरल इसकी वसूली के लिए डीसी को अधिकार देंगे और डीसी इसकी रिकवरी करेंगे।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया गया है कि वर्ष 1962-63 तक गांव नाडा में 1058 कनाल 5 मरला शामलात जमीन थी, जिसका खसरा नंबर-129 था। वर्ष 1966 में इस खसरा नंबर 129 के तीन हिस्से कर दिए गए, जिसमें से खसरा नंबर-129/1 में 1009 कनाल 13 मरले, 129/2 में 48 कनाल 12 मरले और खसरा नंबर-129/3 में बांट दिया गया। इसमें से खसरा नंबर- 129/2 की 48 कनाल 12 मरले जमीन गांव नाडा से चंडीगढ़ को ट्रांसफर कर दी गई थी। यह जमीन तो चंडीगढ़ में थी लेकिन पंजाब के साथ सटी हुई थी। इसका फायदा भू-माफिया ने उठाते हुए गत वर्ष से यह जमीन आगे प्लॉट्स काट कर बेचनी शुरू कर दी। जमीन खसरा नंबर 129/2 की थी जो चंडीगढ़ में है लेकिन इसे आगे बेच कर इसकी रजिस्ट्री खसरा नंबर-129/1 के नाम पर मोहाली की सब तहसील में किए जाने का आरोप लगाया गया। इसकी शिकायत याचिकाकर्ताओं ने चंडीगढ़ के एसएसपी को कर दी थी। शिकायत पर कोई भी कार्रवाई नहीं किए जाने पर इसकी शिकायत तहसीलदार को कर दी गई। बाद में इसकी शिकायत दिसंबर 2015 में प्रशासक के सलाहकार को की गई। इन सभी शिकायतों के बावजूद भी अभी तक इस शामलात जमीन पर भू-माफिया अवैध तरीके से कब्जा कर इसे आगे बेच रहे हैं। राजीव कुमार सहित तीन लोगों ने एडवोकेट मोहिंदर कुमार के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस अवैध कालोनी को हटाने और उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया और तीनों पर 2.5-2.5 लाख का जुर्माना लगाया है।
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