{"_id":"5acd1ff34f1c1b1a3d8b4712","slug":"51523392499-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीएमसीएच 32 में आंखों के कैंसर का इलाज शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीएमसीएच 32 में आंखों के कैंसर का इलाज शुरू
Updated Wed, 11 Apr 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीएमसीएच में आंखों के कैंसर का इलाज शुरू
12 मरीजों का हुआ इलाज, नई तकनीक से भी दो पेशेंट का हुआ इलाज
अब भी कई लोगों को नहीं पता है कि आंखों में भी कैंसर हो सकता है
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अब आंखों के कैंसर होने पर रोशनी नहीं गंवानी पड़ेगी। इस गंभीर बीमारी का इलाज जीएमसीएच सेक्टर-32 में उपलब्ध है। अब तक 12 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इनमें दो से तीन मरीजों का इलाज ब्रेकीथैरेपी और अन्य का लेजर और रेडियोेथैरेपी से किया गया है। जीएमसीएच के ऑप्थेलमोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. सुदेश आर्या ने बताया कि आंखों के कैंसर का सही समय पर इलाज नहीं मिलने से आंखों की रोशनी जा सकती है। यह काफी गंभीर बीमारी है, लेकिन लोगों को इस बारे में जागरूकता नहीं है। इस वजह से इलाज संभव नहीं हो पाता। अब इसका इलाज जीएमसीएच में भी उपलब्ध है, जो अन्य संस्थानों के मुकाबले काफी सस्ता है। बताया जा रहा है कि आंखों के कैंसर के बारे में मरीजों को पता नहीं है। इस वजह से देरी होती है और रोशनी गंवानी पड़ती है।
बॉक्स
कितना खतरनाक है आंखों का कैंसर
दस हजार में से एक बच्चे को होता है कैंसर
2 साल की उम्र में ही सामने आ जाता है रेटिना कैंसर
कैंसर के मरीज की आंखों की पुतली का हिस्सा सफेद हो जाता है।
बीमारी आगे बढ़ने पर आंख बाहर निकलने लगती हैं।
बीमारी गंभीर होने पर ब्रेन और हड्डियों का कैंसर होने का खतरा
आखिरी चरण में आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
आंखों के कैंसर के लक्षण
आंख की पुतली का सफेद हो जाना (ल्यूकोकोरिया)
आंखों से तिरछा देखना (भेंगापन)
मोतियाबिंद के कारण आंखों में दर्द होना (बहुत कम मामलों में)
आंखों की दोनों पुतलियों के रंग में अंतर होना
एक आंख से धुंधला दिखाई देना
आंख की पुतली के रंग का बदलना या इस पर काला धब्बा पड़ना
आंख का लाल होना या आंख में दर्द होना, या फिर दोनों
आंख में उभार आना
आंखों की रोशनी लगातार कमजोर होना
ब्रेकेथैरेपी से किया जा रहा इलाज
आंखों के कैंसर के इलाज ब्रेकेथैरेपी, लेजर और रेडियोथैरेपी किया जा रहा है। इनमें सबसे लेटेस्ट ब्रेकेथैरेपी है, जिसमें एक विशेष प्रकार के रेडियोधर्मी बीज से कैंसर का इलाज होता है। ये सीधे कैंसर पर रखा जाता है, ताकि आंखों के दूसरे हिस्सों पर कोई प्रभाव न पड़े। यह बीज भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) मुंबई द्वारा रेडियोधर्मी आयोडीन 125 (आई 125) की मुफ्त आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा कैंसर के इलाज के लिए अन्य सुविधाएं भी जीएमसीएच में उपलब्ध हैं। जैसे कि बहुआयामी नेत्र इमेजिंग, माइक्रोस्कोप बड़े स्थान आकार वाला लेजर, शिशुओं की रेटिना के चित्र को कैप्चर करने, उपचार योजना प्रणाली और एक उच्चस्तर का समर्पित ऑपरेशन थियेटर उपलब्ध है। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) ने आपरेशन थियेटर और आइसोलेशन रूम की मंजूरी भी दी है।
कोट
संस्थान में आंखों के कैंसर का इलाज उपलब्ध है, लेकिन अब भी इस बारे में लोग जागरूक नहीं हैं। संस्थान में उच्च स्तर और आधुनिक तकनीक से इलाज किया जा रहा। आंखों के कैंसर में सही वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर रोशनी तक जा सकती है। आम तौर पर लोगों को पता ही नहीं है कि आंखों में भी कैंसर हो सकता है। इस वजह से कई लोग अपनी रोशनी गंवा देते हैं।
विज्ञापन
- प्रो. सुदेश आर्या, एचओडी ऑप्थेलमोलॉजी डिपार्टमेंट, जीएमसीएच-32
विज्ञापन
12 मरीजों का हुआ इलाज, नई तकनीक से भी दो पेशेंट का हुआ इलाज
अब भी कई लोगों को नहीं पता है कि आंखों में भी कैंसर हो सकता है
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
अब आंखों के कैंसर होने पर रोशनी नहीं गंवानी पड़ेगी। इस गंभीर बीमारी का इलाज जीएमसीएच सेक्टर-32 में उपलब्ध है। अब तक 12 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इनमें दो से तीन मरीजों का इलाज ब्रेकीथैरेपी और अन्य का लेजर और रेडियोेथैरेपी से किया गया है। जीएमसीएच के ऑप्थेलमोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. सुदेश आर्या ने बताया कि आंखों के कैंसर का सही समय पर इलाज नहीं मिलने से आंखों की रोशनी जा सकती है। यह काफी गंभीर बीमारी है, लेकिन लोगों को इस बारे में जागरूकता नहीं है। इस वजह से इलाज संभव नहीं हो पाता। अब इसका इलाज जीएमसीएच में भी उपलब्ध है, जो अन्य संस्थानों के मुकाबले काफी सस्ता है। बताया जा रहा है कि आंखों के कैंसर के बारे में मरीजों को पता नहीं है। इस वजह से देरी होती है और रोशनी गंवानी पड़ती है।
बॉक्स
कितना खतरनाक है आंखों का कैंसर
दस हजार में से एक बच्चे को होता है कैंसर
2 साल की उम्र में ही सामने आ जाता है रेटिना कैंसर
कैंसर के मरीज की आंखों की पुतली का हिस्सा सफेद हो जाता है।
बीमारी आगे बढ़ने पर आंख बाहर निकलने लगती हैं।
बीमारी गंभीर होने पर ब्रेन और हड्डियों का कैंसर होने का खतरा
आखिरी चरण में आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
आंखों के कैंसर के लक्षण
आंख की पुतली का सफेद हो जाना (ल्यूकोकोरिया)
आंखों से तिरछा देखना (भेंगापन)
मोतियाबिंद के कारण आंखों में दर्द होना (बहुत कम मामलों में)
आंखों की दोनों पुतलियों के रंग में अंतर होना
एक आंख से धुंधला दिखाई देना
आंख की पुतली के रंग का बदलना या इस पर काला धब्बा पड़ना
आंख का लाल होना या आंख में दर्द होना, या फिर दोनों
आंख में उभार आना
आंखों की रोशनी लगातार कमजोर होना
ब्रेकेथैरेपी से किया जा रहा इलाज
आंखों के कैंसर के इलाज ब्रेकेथैरेपी, लेजर और रेडियोथैरेपी किया जा रहा है। इनमें सबसे लेटेस्ट ब्रेकेथैरेपी है, जिसमें एक विशेष प्रकार के रेडियोधर्मी बीज से कैंसर का इलाज होता है। ये सीधे कैंसर पर रखा जाता है, ताकि आंखों के दूसरे हिस्सों पर कोई प्रभाव न पड़े। यह बीज भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) मुंबई द्वारा रेडियोधर्मी आयोडीन 125 (आई 125) की मुफ्त आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा कैंसर के इलाज के लिए अन्य सुविधाएं भी जीएमसीएच में उपलब्ध हैं। जैसे कि बहुआयामी नेत्र इमेजिंग, माइक्रोस्कोप बड़े स्थान आकार वाला लेजर, शिशुओं की रेटिना के चित्र को कैप्चर करने, उपचार योजना प्रणाली और एक उच्चस्तर का समर्पित ऑपरेशन थियेटर उपलब्ध है। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) ने आपरेशन थियेटर और आइसोलेशन रूम की मंजूरी भी दी है।
विज्ञापन
कोट
संस्थान में आंखों के कैंसर का इलाज उपलब्ध है, लेकिन अब भी इस बारे में लोग जागरूक नहीं हैं। संस्थान में उच्च स्तर और आधुनिक तकनीक से इलाज किया जा रहा। आंखों के कैंसर में सही वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर रोशनी तक जा सकती है। आम तौर पर लोगों को पता ही नहीं है कि आंखों में भी कैंसर हो सकता है। इस वजह से कई लोग अपनी रोशनी गंवा देते हैं।
विज्ञापन
- प्रो. सुदेश आर्या, एचओडी ऑप्थेलमोलॉजी डिपार्टमेंट, जीएमसीएच-32