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दूषित मिली मिठाई, 50 किलो मौके पर नष्ट
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बुड़ैल में मिठाई की दुकान पर छापे के दौरान पकड़ी गई मिठाई।
चंडीगढ़। फेस्टिवल सीजन को ध्यान में रखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन के फूड सेफ्टी आफिसरों की टीम ने वीरवार को बुड़ैल में छापा मारा। इस दौरान कलाकंद, खोए और पेड़े के चार सैंपल लिए। इनको जांच के लिए लैब में भेज दिया गया है। जांच के दौरान पाया गया कि समोसे, बर्फी, गुलाब जामुन बहुत दूषित जगह में रखे गए थे। उन्हें वहां रखा गया, जिससे वे खाने लायक नहीं बचे। फूड सेफ्टी की टीम ने तुरंत 50 किलो समोसे, बर्फी व गुलाब जामुन को नष्ट कर दिया। साथ ही दो चालान भी किए।
त्योहारी सीजन में मिठाइयों व अन्य खाने-पीने के सामानों में होने वाली मिलावट पर नजर रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दो ज्वाइंट टीमों का गठन किया है। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों के किसी भी उल्लंघन की जांच के लिए यह टीमें 24 घंटे काम करेंगी। लोगों की शिकायतों के लिए प्रशासन ने एक 24×7 हेल्पलाइन नंबर 0172-2782457 भी जारी किया है।
प्रशासन ने लोगों से अनुरोध किया है कि मिठाई और कन्फेक्शनरी के आइटम केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खरीदें। त्योहार के वक्त न सिर्फ मिठाइयों बल्कि दूध व दुग्ध उत्पाद की भी खपत कई गुना बढ़ जाती है। इसका फायदा उठाने के लिए मुनाफाखोर खाद्य पदार्थों में मिलावट का जहर घोल देते हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग ने इन पर कार्रवाई के लिए टीमें गठित की हैं। ये टीमें शहर व आसपास के प्रतिष्ठानों में नियमित छापेमारी करेंगी। टीमों का फोकस दूध, दुग्ध पदार्थ, मिठाई व अन्य खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट पर ज्यादा रहेगा। फूड सेफ्टी ऑफिसर किसी व्यापारी या उत्पादक के अनैतिक गतिविधि में लिप्त पाए जाने पर उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई करे सकेंगे।
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पिछले साल हेल्थ डिपार्टमेंट ने मारे थे 50 छापे
फूड सेफ्टी ऑफिसर ने पिछले साल 50 छापे मारे थे। इस दौरान 52 सैंपल टेस्टिंग के लिए भेजे गए थे, जिसमें से कई फेल पाए गए थे। वहीं, इनमें से कई पर जुर्माना भी लगाया गया था। खाद्य आपूर्ति विभाग के एक अफसर ने बताया कि दिवाली के समय भी 15 चालान किए गए थे, वे मामले कोर्ट में लंबित हैं।
उल्लंघन करने पर हो सकती है जेल
स्वास्थ्य विभाग ने विक्रेताओं से सुरक्षित भोजन और उचित स्वच्छता जैसे लाइसेंस के प्रावधानों का पालन करने का आग्रह किया है। गौरतलब है कि स्टैंडर्ड से कम क्वालिटी का फूड बेचने के लिए 5 लाख तक जुर्माना है और नकली ब्रांडिंग कर सामान को बेचते हुए पकड़े जाने पर 3 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति के लिए नुकसान पहुंचाने वाले भोजन का मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जाता है, जिसके तहत एक साल की जेल का प्रावधान है और जुर्माने की राशि भी मजिस्ट्रेट की ओर से तय की जाती है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि लोगों को 24 घंटे के भीतर मिठाइयों का सेवन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें लपेटने के लिए केवल सिल्वर फाइल का इस्तेमाल किया जाए।
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त्योहारी सीजन में मिठाइयों व अन्य खाने-पीने के सामानों में होने वाली मिलावट पर नजर रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दो ज्वाइंट टीमों का गठन किया है। खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों के किसी भी उल्लंघन की जांच के लिए यह टीमें 24 घंटे काम करेंगी। लोगों की शिकायतों के लिए प्रशासन ने एक 24×7 हेल्पलाइन नंबर 0172-2782457 भी जारी किया है।
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प्रशासन ने लोगों से अनुरोध किया है कि मिठाई और कन्फेक्शनरी के आइटम केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खरीदें। त्योहार के वक्त न सिर्फ मिठाइयों बल्कि दूध व दुग्ध उत्पाद की भी खपत कई गुना बढ़ जाती है। इसका फायदा उठाने के लिए मुनाफाखोर खाद्य पदार्थों में मिलावट का जहर घोल देते हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग ने इन पर कार्रवाई के लिए टीमें गठित की हैं। ये टीमें शहर व आसपास के प्रतिष्ठानों में नियमित छापेमारी करेंगी। टीमों का फोकस दूध, दुग्ध पदार्थ, मिठाई व अन्य खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट पर ज्यादा रहेगा। फूड सेफ्टी ऑफिसर किसी व्यापारी या उत्पादक के अनैतिक गतिविधि में लिप्त पाए जाने पर उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई करे सकेंगे।
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पिछले साल हेल्थ डिपार्टमेंट ने मारे थे 50 छापे
फूड सेफ्टी ऑफिसर ने पिछले साल 50 छापे मारे थे। इस दौरान 52 सैंपल टेस्टिंग के लिए भेजे गए थे, जिसमें से कई फेल पाए गए थे। वहीं, इनमें से कई पर जुर्माना भी लगाया गया था। खाद्य आपूर्ति विभाग के एक अफसर ने बताया कि दिवाली के समय भी 15 चालान किए गए थे, वे मामले कोर्ट में लंबित हैं।
उल्लंघन करने पर हो सकती है जेल
स्वास्थ्य विभाग ने विक्रेताओं से सुरक्षित भोजन और उचित स्वच्छता जैसे लाइसेंस के प्रावधानों का पालन करने का आग्रह किया है। गौरतलब है कि स्टैंडर्ड से कम क्वालिटी का फूड बेचने के लिए 5 लाख तक जुर्माना है और नकली ब्रांडिंग कर सामान को बेचते हुए पकड़े जाने पर 3 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति के लिए नुकसान पहुंचाने वाले भोजन का मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जाता है, जिसके तहत एक साल की जेल का प्रावधान है और जुर्माने की राशि भी मजिस्ट्रेट की ओर से तय की जाती है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि लोगों को 24 घंटे के भीतर मिठाइयों का सेवन करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें लपेटने के लिए केवल सिल्वर फाइल का इस्तेमाल किया जाए।