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ट्रिब्यून फ्लाई ओवर पर 5 साल लगी रोक ने शहर को एक दशक पीछे धकेल दिया: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। ट्रिब्यून फ्लाई ओवर पर 5 साल तक लगी रोक ने इस शहर को एक दशक पीछे धकेल दिया है। इस शहर की संकल्पना और निर्माण 1950 में 5 लाख की आबादी को ध्यान में रखकर किया गया था, आज इस पर ट्राइसिटी के 15 लाख लोगों का बोझ है। आज की जरूरत यातायात को सुगम बनाने की है न की वाहनों का उपयोग रोकने की। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्रिब्यून फ्लाई ओवर के निर्माण पर लगी रोक को हटाने के लिए जारी विस्तृत आदेश में यह टिप्पणियां की है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 20 नवंबर, 2019 को इस फ्लाई ओवर के निर्माण पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि रोक के आदेश को पांच साल बीत गए हैं, चंडीगढ़ का निर्माण और संकल्पना वर्ष 1950 में हुई थी और यह हमेशा वैसा ही नहीं रह सकता क्योंकि विकास सतत प्रक्रिया है। शहर की योजना 5 लाख लोगों के लिए बनाई गई थी और आज हम उस त्रि-शहर से निपट रहे हैं, जो 15 लाख से अधिक की आबादी वाले पंचकूला, मोहाली और न्यू चंडीगढ़ से घिरा है। सरकारी भवनों वाले दो राज्यों की राजधानी होने के कारण चंडीगढ़ तक पहुंच और यात्रा के मुद्दे पर विचार बेहद जरूरी है। अधिकारी यातायात की स्थिति को कम करने के लिए मेट्रो की योजना बना रहे हैं और ऐसे में बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं आसान बनाने की जरूरत है न की वाहनों का उपयोग न करने के समय में वापस जाने की।
डेराबस्सी से चंडीगढ़ आने वाले वाहनों को ट्रैफिक जाम के कारण करीब डेढ़ घंटे का समय लग जाता है। जीरकपुर नगर पालिका दिल्ली/डेराबस्सी की ओर से शहर में प्रवेश करने से ठीक पहले है। यह नया शहरी उच्च जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र है जो रहने की उच्च लागत के कारण विकसित हुआ है और ऊंची इमारतों वाले फ्लैटों और अपार्टमेंटों की आसान उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में लोग जीरकपुर में रहने लगे हैं। वहां से रोजाना अपने काम, शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन उद्देश्यों के लिए चंडीगढ़ पहुंचते हैं। इस सब को देखते हुए यह स्पष्ट है कि पुल के निर्माण पर पांच साल पहले लगाई गई रोक के कारण शहर एक दशक पीछे चला गया है। जरूरत यातायात को सुगम बनाने की थी न कि विकास को अवरुद्ध करने की। हमारी राय मेंं रोक के कारण न केवल लागत में वृद्धि हुई है, बल्कि इससे शहर प्रगति और विकास नहीं कर पाया है, जो समय की आवश्यकता थी।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 20 नवंबर, 2019 को इस फ्लाई ओवर के निर्माण पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि रोक के आदेश को पांच साल बीत गए हैं, चंडीगढ़ का निर्माण और संकल्पना वर्ष 1950 में हुई थी और यह हमेशा वैसा ही नहीं रह सकता क्योंकि विकास सतत प्रक्रिया है। शहर की योजना 5 लाख लोगों के लिए बनाई गई थी और आज हम उस त्रि-शहर से निपट रहे हैं, जो 15 लाख से अधिक की आबादी वाले पंचकूला, मोहाली और न्यू चंडीगढ़ से घिरा है। सरकारी भवनों वाले दो राज्यों की राजधानी होने के कारण चंडीगढ़ तक पहुंच और यात्रा के मुद्दे पर विचार बेहद जरूरी है। अधिकारी यातायात की स्थिति को कम करने के लिए मेट्रो की योजना बना रहे हैं और ऐसे में बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं आसान बनाने की जरूरत है न की वाहनों का उपयोग न करने के समय में वापस जाने की।
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डेराबस्सी से चंडीगढ़ आने वाले वाहनों को ट्रैफिक जाम के कारण करीब डेढ़ घंटे का समय लग जाता है। जीरकपुर नगर पालिका दिल्ली/डेराबस्सी की ओर से शहर में प्रवेश करने से ठीक पहले है। यह नया शहरी उच्च जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र है जो रहने की उच्च लागत के कारण विकसित हुआ है और ऊंची इमारतों वाले फ्लैटों और अपार्टमेंटों की आसान उपलब्धता के कारण बड़ी संख्या में लोग जीरकपुर में रहने लगे हैं। वहां से रोजाना अपने काम, शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन उद्देश्यों के लिए चंडीगढ़ पहुंचते हैं। इस सब को देखते हुए यह स्पष्ट है कि पुल के निर्माण पर पांच साल पहले लगाई गई रोक के कारण शहर एक दशक पीछे चला गया है। जरूरत यातायात को सुगम बनाने की थी न कि विकास को अवरुद्ध करने की। हमारी राय मेंं रोक के कारण न केवल लागत में वृद्धि हुई है, बल्कि इससे शहर प्रगति और विकास नहीं कर पाया है, जो समय की आवश्यकता थी।
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