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Highcourt: 30 साल पुराने पारिवारिक भूमि विवाद को विराम, हाईकोर्ट ने पारिवारिक समझौते को माना वैध

Sat, 13 Dec 2025 02:36 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sat, 13 Dec 2025 02:36 AM IST
सार

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमीन संयुक्त हिंदू परिवार की नहीं, बल्कि स्व-अर्जित थी। इस वजह से भूमि के मालिक को इसे अपनी इच्छा से बांटने का पूर्ण अधिकार था।

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30-year-old family land dispute put to rest, settlement agreement valid
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फाजिल्का के निहाल खेड़ा गांव की 94 कनाल 3 मरले कृषि भूमि पर चले आ रहे करीब 30 साल पुराने पारिवारिक विवाद का अंत करते हुए पारिवारिक सेटलमेंट को पूरी तरह वैध माना है। 
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह जमीन संयुक्त हिंदू परिवार की नहीं, बल्कि स्व-अर्जित थी। इस वजह से भूमि के मालिक को इसे अपनी इच्छा से बांटने का पूर्ण अधिकार था। जस्टिस दीपक गुप्ता ने साल 1994 में आए प्रथम अपीलीय अदालत के फैसले को रद्द करते हुए 1992 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बहाल कर दिया, जिसमें याची का मुकदमा खारिज कर दिया गया था। 
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मुकदमा पृथ्वी राज (पुत्र मुख राम) की ओर से दायर किया गया था। इसमें दावा किया गया कि विवादित भूमि संयुक्त हिंदू परिवार की है और उसके पिता मुख राम द्वारा 1987 में अपने भाई सूरजा राम को आधी जमीन देने का डिक्री गलत है। पारिवारिक संपत्ति का इस तरह बंटवारा नहीं हो सकता, पृथ्वी राज ने भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाने की भी मांग की थी। यह भूमि मूल रूप से हर कृष्ण के पास किरायेदार के रूप में थी। बाद में किरायेदारी हक उनके पुत्र मुख राम को मिले। 
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1952 के पंजाब ऑक्यूपेंसी टेनेंट्स एक्ट के तहत कानूनी रूप से मालिकाना हक मुख राम को मिला। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि मालिकाना हक मुख राम को कानून के तहत पहली बार मिला, न कि पूर्वजों से विरासत में। इसलिए यह भूमि पुश्तैनी नहीं मानी जा सकती। भूमि स्व-अर्जित मानने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि कि मुख राम को इसे अपनी मर्जी से बांटने का अधिकार था।  
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