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पीयू छात्र संघ में सक्रिय रहे नेता संभाल रहे देश के बड़े पदों की जिम् मेदारी

Fri, 31 Aug 2018 01:56 AM IST
Updated Fri, 31 Aug 2018 01:56 AM IST
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पीयू छात्र संघ में सक्रिय रहे नेता संभाल रहे देश के बड़े पदों की जिम्
मेदारी
पीयू छात्र संघ चुनाव लड़ने वाले छात्र राष्ट्रीय स्तर के बन चुके हैं नेता
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पीयू ने दिए सुषमा स्वराज, सत्यपाल जैन, पवन बंसल, राजीव प्रताप रूड़ी जैसे दिए कई बडे़ नेता
स्टूडेंट्स राजनीति के माध्यम से स्टूडेंट्स तलाश रहे अपनी राजनीतिक जमीन

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी से छात्र संघ चुनाव लड़ने वाले कई नेताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति में सक्रिय हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव लड़ने वाले नेताओं और नेत्रियों ने देश की राजनीति में अहम योगदान दिया है। विदेश मंत्री के पद पर जहां सुषमा स्वराज हैं। वहीं पूर्व रेलमंत्री के पद पर कांग्रेसी नेता पवन बंसल, अतिरिक्त सालिसिटर जनरल के पद पर सत्यपाल जैन बने हुए हैं। पीयू की राजनीति के बाद ही इन नेताओं की किस्मत चमकी है।
पीयू से पढ़ने वाले मौजूदा समय के चंडीगढ़ के मेयर देवेश मोदगिल भी पंजाब यूनिवर्सिटी की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। पंजाब के कई कैबिनेट मिनस्टिर भी यहां से पढ़ चुके हैं। पीयू में छात्र संघ चुनाव के माध्यम से स्टूडेंट्स अपनी राजनीतिक जमीन तलाशते हैं। वहीं उस समय चुनाव और अब के चुनाव में जमीन आसमान का अंतर है। पहले अप्रत्यक्ष चुनाव होते थे लेकिन अब प्रत्यक्ष चुनाव होते हैं। सीधे स्टूडेंट्स ही वोट डालते हैं और स्टूडेंट काउंसिल के पदाधिकारियों को चुनते हैं। नई पीढ़ी में भी कई छात्र नेता विधानसभा तक पहुंचे तो निरंतर कोशिश कर रहे हैं।
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पीयू कांउसिल के सचिव रहे पवन बंसल
पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री पवन बंसल 1970-71 में पीयू स्टूडेंट काउंसिल के सेक्रेटरी चुने गए थे। उन्होंने बताया कि उस वक्त क्लास रिप्रेजेंटेटिव ही पदाधिकारियों को चुनते थे। उस समय दो और वाइस प्रेसिडेंट चुने गए थे। पवन बंसल का कहना है कि उस वक्त भी चुनाव काफी कठिन होता था। 45 डिपार्टमेंट रिप्रेजेंटेटिव (डीआर) होते थे और उनको मैनेज करना कठिन काम था। प्रचार और मनाकर बस में अपने समर्थकाें को ले जाना अच्छा था। अगर चुनाव के दौरान वोटर और पार्टी के लोग नाराज हो जाते थे। उन्हें मनाने के लिए पूरा प्रयास किया जाता था।
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एबीवीपी में सक्रिय रहीं सुषमा स्वराज विदेश मंत्री तक बनीं
एबीवीपी में सक्रिय रहीं सुषमा स्वराज विदेश मंत्री तक बन चुकी हैं। वही भी स्टूडेंट्स वेलफेयर की गतिविधियों में लगातार सक्रिय थीं। डेकलेमेशन कंपीटीशन में उनका कोई विकल्प नहीं था। वो एबीवीपी से जुड़ी थी। पवन बंसल के सेक्रेटरी बनने के बाद वह एक साल बाद पीयू में आई थीं। अंबाला से आकर लॉ विभाग में दाखिला लिया था। 1977 में पहली बार एमएलए का चुनाव लड़ा और जीती। इसके बाद उन्हाेंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कई अहम पदों पर वह नेता बनी रहीं।


राजीव प्रताप रूड़ी ने हासिल की सफलता
चंडीगढ़ के गवर्नमेंट कॉलेज से राजीव प्रताप रूड़ी छात्र चुनावों में प्रेसिडेंट चुने गए। इसके बाद 1983-84 में पंजाब यूनिवर्सिटी से पुसू पार्टी से चुनाव लड़ा था। उसके बाद वह पीयू काउंसिल के सेक्रेटरी चुने गए। वो पीयू में लॉ केस्टूडेंट थे। वह दो नंबर हॉस्टल में रहते थे। 1996 वो बिहार के छपड़ा के सांसद बने। फिलहाल वह केंद्रीय राज्य मंत्री हैं।

सत्यपाल जैन जुडे़ रहे एबीवीपी से
चंडीगढ़ के पूर्व सांसद और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन एबीवीपी से जुडे़ रहे। वह छात्र राजनीति में सक्रिय थेे। स्टूडेंट्स की हक की लड़ाई के लिए वह हमेशा आगे आ गए। छात्र राजनीति में काफी एक्टिव थे। उनका दाखिला एमए पॉलिटिकल साइंस में था। 1974 में क्लास के डीआर बने। इसके बाद इसी साल जनरल सेक्रेटरी के लिए चुनाव लड़ा। उनको 43 में से 27 वोट मिली और जीत गए। जून 1975 में विभाग में लॉ में दाखिला लेने गए तो इमरजेंसी लगी थी। 18 जुलाई 1975 को उनको वहीं से अरेस्ट कर लिया गया। उन्होंने बताया कि अब प्रत्यक्ष चुनाव होते हैं। इससे मुझे बहुत खुशी है। लेकिन एक चीज है कि पहले जैसे मुद्दे अब राजनीतिक पार्टियों की ओर से उठाए नहीं जा रहे हैं। अब पार्टियां केवल राजनीतिक हित केलिए चुनाव लड़ती है। उन्हें छात्रों को मुद्दों को साल भर उठाना चाहिए। पहले स्टूडेंट्स के मुद्दों को लेकर छात्र नेता लड़ाई करते थे। अब वह अपने हित के लिए लड़ाई कर रहे हैं। मेरा मानना है कि स्टूडेंट्स को सही तरीके से चुनाव मुद्दों पर लड़ना चाहिए। छात्र संगठन के जीते सदस्य सिंडीकेट और सीनेट में भ्ी शामिल होने चाहिए।

प्रत्यक्ष चुनाव से आखिरी प्रेसिडेंट रहे जगमोहन कंग
पंजाब में कैबिनेट मिनिस्टर रहे जगमोहन कंग 1974-75 में अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में पीयू स्टूडेंट काउंसिल के आखिरी प्रेसिडेंट रहे थे। उन्होंने उस वक्त की अकाली दल की छात्र पार्टी से चुनाव लड़ा था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली। वह पंजाब सरकार में पशुपालन व डेयरी समेत टूरिज्म विभाग के मंत्री भी रहे हैं। 1992 और 2002 तक वह एमएलएस बने। इसके बाद खरड़ से 2012 में फिर वह एमएलए चुने गए।



अश्विनी सेखड़ी भी बन चुके तीन बार विधायक
तीन बार विधायक रहे अश्विनी सेखड़ी 1980-81 में पीयू स्टूडेंट काउंसिल के प्रेसिडेंट बने। इसके बाद 1985 में वो बटाला से कांग्रेस की तरफ से विधायक चुने गए। मिनिस्टर ऑफ स्टेट ऑफ टूरिज्म एंड कल्चर भी बनाया गया था।

कुलजीत नागरा भी बन चुके हैं एमएलए
फतेहगढ़ साहिब से एमएलए चुने गए कुलजीत नागरा ने पीयू से एलएलबी की और छात्र राजनीति में लगातार सक्रिय रहे। वो पुसू पार्टी से जुड़े थे।
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