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Highcourt News: 1700 प्रतिशत मुनाफा कमा रहे निजी अस्पताल, हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से दोबारा मांगा जवाब

Mon, 17 Oct 2022 10:51 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 17 Oct 2022 10:51 PM IST
सार

याची ने नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइस अथॉरिटी के ऑफिस मेमो का उदाहरण देते हुए गुरुग्राम के एक अस्पताल ने डेंगू के इलाज को लेकर दी गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उस मामले में अस्पताल ने 1700 प्रतिशत मुनाफा कमाया था।

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1700 percent profit in the treatment of private hospitals, High Court seeks reply from Punjab government
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विस्तार

चंडीगढ़ के निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान दवाओं पर कमाए जाने वाले 1700 प्रतिशत मुनाफे और दवाओं को किसी पूर्व निर्धारित स्थान से खरीदने की अस्पतालों द्वारा की गई बाध्यता के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। याचिका पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, हरियाणा सरकार, पंजाब सरकार और नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइस अथॉरिटी पहले ही जवाब दाखिल कर चुके हैं। पंजाब के जवाब से असंतुष्टि जताते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें नए सिरे से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

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याचिका दाखिल करते हुए हिसार निवासी संदीप कुमार गुप्ता ने बताया था कि उनकी पत्नी को लीवर की बीमारी के कारण दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इलाज के दौरान जो दवाएं लिखी जा रही थीं, उन्हें अस्पताल में मौजूद दवाखाने से ही खरीदने के लिए बाध्य किया गया था। इसके चलते इलाज का खर्च अधिक बढ़ गया था। क्योंकि अस्पताल में मौजूद दवाखाने और बाहर की केमिस्ट शॉप के रेट में अधिक अंतर था। याची ने कहा कि हमारा संविधान जीवन का अधिकार देता है, जिसका मतलब केवल सांस लेने और जानवरों की तरह रहने से नहीं है। इस अधिकार की व्याख्या में हेल्दी लाइफ भी है। निजी अस्पताल जिस प्रकार मनमाना रवैया अपना रहे है, उससे इस सांविधानिक अधिकार का हनन हो रहा है।
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याची ने नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइस अथॉरिटी के ऑफिस मेमो का उदाहरण देते हुए गुरुग्राम के एक अस्पताल ने डेंगू के इलाज को लेकर दी गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उस मामले में अस्पताल ने 1700 प्रतिशत मुनाफा कमाया था। साथ ही फरवरी 2018 में जारी ऑफिस मेमो में तीन अन्य अस्पतालों से जुड़ी रिपोर्ट भी दी थी, जिसमें 1700 प्रतिशत मुनाफे की बात कही गई। याची ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार के कर्मियों के इलाज के लिए इन अस्पतालों से अनुबंध किया जाता है।
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कर्मियों के इलाज की एवज में मोटा बिल बनाया जाता है। जैसा कि सामने है कि 1700 प्रतिशत मुनाफा कमाया जा रहा है। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि केंद्र व राज्य सरकारों को यह अस्पताल कितनी चपत लगा रहे हैं। साथ ही इलाज को इतना मंहगा कर देने के कारण गरीब लोगों के लिए इलाज के लिए जो सरकारी योजनाएं हैं, उनका पैसा बीच में ही खत्म हो जाता है और आगे का इलाज इन्हें अपनी जेब से करवाना पड़ता है। इस कारण कई लोग इलाज बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं, जो सांविधानिक अधिकारों का हनन है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि अस्पतालों के अति लाभ कमाने को लेकर जांच की जाए और वसूली गई, अतिरिक्त राशि को मरीजों को वापस किया जाए। साथ ही अधिकतम लाभ कमाने की सीमा तय की जाए, ताकि लोगों के साथ अन्याय न हो।

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