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सेक्टर-21 में कुतों का आंतक
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सेक्टर-21 में कुत्तों का आतंक, हमला कर एक को काटा
सबहेड
डर के कारण स्थानीय लोगों ने पार्कों में जाना बंद किया, 30 से ज्यादा लोगों को काट चुके हैं अब तक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेक्टर-21 में लावारिस कुत्तों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कुत्तों ने स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है। कुत्तों का आतंक इतना बढ़ गया है कि रविवार रात को एक के बाद एक तीन कुत्ते मनीष नाम के व्यक्ति पर झपट पड़े। कुत्तों ने मनीष के पैरों में दो जगह काट लिया। कुत्तों के हमले के बाद मनीष ने जैसे-तैसे खुद को उनकी चंगुल से छुड़ाया। कुत्तों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि दिन-रात वह पूरे सेक्टर में घूमते हैं। शहर में कुत्तों की समस्या एक भयानक रूप ले चुकी है। रात में भी कुत्ते भोंकते रहते हैं। इससे लोगों को सोने में काफी परेशानी होती है। हाल यह है कि सेक्टर में अब तक 30 से ज्यादा लोगों को लावारिस कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है। इनमें से ज्यादातर लोग दूसरे सेक्टरों से किसी काम के लिए इस सेक्टर में आए थे। कुत्तों से सेक्टर निवासियों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। निवासियों का कहना है कि पूरे सेक्टर में 100 से ज्यादा कुत्ते हैं।
कोट
मैं रात को मार्केट से घर की ओर जा रहा था अचानक तीन कुत्ते पीछे पड़ गए। मैंने बचने की बहुत कोशिश की लेकिन उसके बाद भी कुत्ते ने दो जगह काट लिया। साथ ही सेक्टर-16 हॉस्पिटल से जाकर इंजेक्शन लगवाया।
-मनीष, सेक्टर निवासी
कोट
मुझे भी कुछ दिन पहले कुत्ते ने काट लिया था। यहां पर लोगों को घर से बाहर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का पैदल चलना मुश्किल हो गया है। पार्कों में लोगों का आना जाना बंद हो गया है।
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रितेश, सेक्टर निवासी
कोट
तोता पार्क में 30-40 कुत्ते पड़े रहते हैं। डर के कारण यहां के निवासी अपने बच्चों को पार्कों में खेलने तक नहीं जाने देते। सारा दिन पार्कों में कुत्ते टोली बनाकर घूमते रहते हैं। बुजुर्ग लोग सैर के लिए भी बाहर नहीं निकल सकते।
-गुरदर्शन सिंह, सेक्टर निवासी
कोट
लावारिस कुत्तों को बचाकर सरकार क्या फायदा लेना चाहती है। जब मुर्गे, बकरे को भी खाने के लिए मार दिया जाता है, तो लोगों की सुरक्षा के लिए कुत्तों को क्यों नहीं मारा जा सकता। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो पार्कों को ही बंद कर देना चाहिए।
-कुलदीप सिंह गिल, प्रेसिडेंट आरडब्ल्यूए
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सेक्टर-21 में कुत्तों का आतंक, हमला कर एक को काटा
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डर के कारण स्थानीय लोगों ने पार्कों में जाना बंद किया, 30 से ज्यादा लोगों को काट चुके हैं अब तक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सेक्टर-21 में लावारिस कुत्तों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कुत्तों ने स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है। कुत्तों का आतंक इतना बढ़ गया है कि रविवार रात को एक के बाद एक तीन कुत्ते मनीष नाम के व्यक्ति पर झपट पड़े। कुत्तों ने मनीष के पैरों में दो जगह काट लिया। कुत्तों के हमले के बाद मनीष ने जैसे-तैसे खुद को उनकी चंगुल से छुड़ाया। कुत्तों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि दिन-रात वह पूरे सेक्टर में घूमते हैं। शहर में कुत्तों की समस्या एक भयानक रूप ले चुकी है। रात में भी कुत्ते भोंकते रहते हैं। इससे लोगों को सोने में काफी परेशानी होती है। हाल यह है कि सेक्टर में अब तक 30 से ज्यादा लोगों को लावारिस कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है। इनमें से ज्यादातर लोग दूसरे सेक्टरों से किसी काम के लिए इस सेक्टर में आए थे। कुत्तों से सेक्टर निवासियों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। निवासियों का कहना है कि पूरे सेक्टर में 100 से ज्यादा कुत्ते हैं।
कोट
मैं रात को मार्केट से घर की ओर जा रहा था अचानक तीन कुत्ते पीछे पड़ गए। मैंने बचने की बहुत कोशिश की लेकिन उसके बाद भी कुत्ते ने दो जगह काट लिया। साथ ही सेक्टर-16 हॉस्पिटल से जाकर इंजेक्शन लगवाया।
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-मनीष, सेक्टर निवासी
कोट
मुझे भी कुछ दिन पहले कुत्ते ने काट लिया था। यहां पर लोगों को घर से बाहर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का पैदल चलना मुश्किल हो गया है। पार्कों में लोगों का आना जाना बंद हो गया है।
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रितेश, सेक्टर निवासी
कोट
तोता पार्क में 30-40 कुत्ते पड़े रहते हैं। डर के कारण यहां के निवासी अपने बच्चों को पार्कों में खेलने तक नहीं जाने देते। सारा दिन पार्कों में कुत्ते टोली बनाकर घूमते रहते हैं। बुजुर्ग लोग सैर के लिए भी बाहर नहीं निकल सकते।
-गुरदर्शन सिंह, सेक्टर निवासी
कोट
लावारिस कुत्तों को बचाकर सरकार क्या फायदा लेना चाहती है। जब मुर्गे, बकरे को भी खाने के लिए मार दिया जाता है, तो लोगों की सुरक्षा के लिए कुत्तों को क्यों नहीं मारा जा सकता। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो पार्कों को ही बंद कर देना चाहिए।
-कुलदीप सिंह गिल, प्रेसिडेंट आरडब्ल्यूए