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जैसी आपकी मर्जी
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पुरुष प्रधान समाज से लड़ती औरत की कहानी कह गई ‘जी जैसी आपकी मर्जी’
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टैगोर थिएटर में हुआ द्वारा नादिरा बब्बर द्वारा लिखित नाटक का मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सिटी इंटरटेनमेंट नेटवर्क और थिएटर हाउस द्वारा नादिरा बब्बर द्वारा लिखित नाटक ‘जी जैसी आपकी मर्जी’ का मंचन शनिवार को टैगोर थिएटर में किया गया। इसका निर्देशन नीतू शर्मा और गौरव शर्मा ने किया। नाटक में कई प्रयोग किए गए, जिन्हें दर्शकों ने काफी सराहा।
नाटक की कहानी उन औरतों की है, जो समाज के लिए कुछ करना चाहती हैं पर पुरुष प्रधान समाज के दबाव में ऐसा नहीं कर पाती। पहली कहानी छुटकी नाम की एक आठ साल की बच्ची से शुरू होती है, जिसे बचपन से ही घर में कैद रख घर का काम करवाया जाता है। उसका बड़ा मन है कि वह अपने भाई की तरह अच्छे स्कूल में जाए लेकिन अपनी दादी और पिता के दबाव में स्कूल नहीं जा पाती। अंत में वह समाज से पूछती है कि ऐसा क्यों है। क्यों लड़का और लड़की में फर्क समझा जाता है। क्यों उसके भाई की हर ख्वाहिशें पूरी की जाती हैं और उसकी नहीं। छुटकी के रोल में मृदुला ने शानदार अभिनय कर दर्शकों का दिल जीत लिया।
वहीं, दूसरी कहानी एक मुस्लिम औरत सुल्ताना की है। जिसका निकाह उसकी मर्जी के खिलाफ, विरोध करने के बावजूद भी अपने से दस वर्ष बड़े आदमी से कर दिया जाता है। उसे हर बार लड़की पैदा करने पर उसकी सास द्वारा ताने दिए जाते हैं। आखिर में एक दिन उसको घर से बाहर निकाल दिया जाता है। बाहरी दुनिया की कठिनाइयों से कभी वो हारती है और कभी जीतती है। यह नाटक औरत के संघर्ष को जीवंत कर देता है। नीतू शर्मा ने सुल्ताना के किरदार को बखूबी निभाया। नाटक में स्टेज डिजाइन किया था अंजली शर्मा ने। अंजली और प्रशस्ति ने बेहतरीन गीत भी गाया।
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टैगोर थिएटर में हुआ द्वारा नादिरा बब्बर द्वारा लिखित नाटक का मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सिटी इंटरटेनमेंट नेटवर्क और थिएटर हाउस द्वारा नादिरा बब्बर द्वारा लिखित नाटक ‘जी जैसी आपकी मर्जी’ का मंचन शनिवार को टैगोर थिएटर में किया गया। इसका निर्देशन नीतू शर्मा और गौरव शर्मा ने किया। नाटक में कई प्रयोग किए गए, जिन्हें दर्शकों ने काफी सराहा।
नाटक की कहानी उन औरतों की है, जो समाज के लिए कुछ करना चाहती हैं पर पुरुष प्रधान समाज के दबाव में ऐसा नहीं कर पाती। पहली कहानी छुटकी नाम की एक आठ साल की बच्ची से शुरू होती है, जिसे बचपन से ही घर में कैद रख घर का काम करवाया जाता है। उसका बड़ा मन है कि वह अपने भाई की तरह अच्छे स्कूल में जाए लेकिन अपनी दादी और पिता के दबाव में स्कूल नहीं जा पाती। अंत में वह समाज से पूछती है कि ऐसा क्यों है। क्यों लड़का और लड़की में फर्क समझा जाता है। क्यों उसके भाई की हर ख्वाहिशें पूरी की जाती हैं और उसकी नहीं। छुटकी के रोल में मृदुला ने शानदार अभिनय कर दर्शकों का दिल जीत लिया।
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वहीं, दूसरी कहानी एक मुस्लिम औरत सुल्ताना की है। जिसका निकाह उसकी मर्जी के खिलाफ, विरोध करने के बावजूद भी अपने से दस वर्ष बड़े आदमी से कर दिया जाता है। उसे हर बार लड़की पैदा करने पर उसकी सास द्वारा ताने दिए जाते हैं। आखिर में एक दिन उसको घर से बाहर निकाल दिया जाता है। बाहरी दुनिया की कठिनाइयों से कभी वो हारती है और कभी जीतती है। यह नाटक औरत के संघर्ष को जीवंत कर देता है। नीतू शर्मा ने सुल्ताना के किरदार को बखूबी निभाया। नाटक में स्टेज डिजाइन किया था अंजली शर्मा ने। अंजली और प्रशस्ति ने बेहतरीन गीत भी गाया।
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