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सेव इं डियन फेमिली ने मनाया मेन्स डे

Mon, 20 Nov 2017 01:14 AM IST
Updated Mon, 20 Nov 2017 01:14 AM IST
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सेव इं डियन फेमिली ने मनाया मेन्स डे
एसआईएफ ने मनाया इंटरनेशनल मेन्स डे
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सामान अधिकार सामान न्याय की मांग

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
एसआईएफ (सेव इंडियन फेमिली) की ओर से सेक्टर-17 के प्लाजा में रविवार को इंटरनेशनल मेन्स-डे मनाया गया। जिसमें लोगों के लिए फ्री हेल्थ चेकअप का आयोजन भी किया गया। जागरूकता पैदा करने और समाज में भूमिका निभाने वाले लोगों को उजागर करने के लिए गैर सरकारी संगठन सेव इंडियन फैमिली चंडीगढ़ ने इसका आयोजन किया। इस कार्यक्रम में महिलाओं और पुरुषों के लिए सामान अधिकार और सामान कानून बनाए जाने की मांग की गई।
बातचीत में बताया गया कि आजकल महिलाएं अपने अधिकारों का गलत प्रयोग कर रही हैं, जिसके कारण बहुत से परिवारों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना नौ मिनट में एक आदमी आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहा है। 498-ए ,बलात्कार, हिंसा, लड़ाई आदि के झूठे केस बनाकर लड़के वालों से भी पैसे की मांग की जाती है। इस अवसर पर लाइव संगीत भी आयोजित किया गया। इस मौके पर सेव इंडिया परिवार-चंडीगढ़ में कनिष्क कुमार, मनमीत थापर, अमनदीप सिंह, मनप्रीत सिंह, रवि, अभिषेक, संकेत खंडेलवाल, अमित, नीतिन, राकेश नोटियाल, अकालजोत सिंह, रविंदर सिंह, प्रशांत मौजूद रहे।
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कानून बनाए जाने की मांग...
जिस तरह औरतों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए गए हैं ठीक उसी तरह पुरुषों की सुरक्षा के लिए भी कानून बनाए जाने चाहिए। दोनों को सामान अधिकार और सामान न्याय मिलना चाहिए। महिलाएं कानूनों का गलत प्रयोग कर रही है, सरकार को अपनी न्यायिक प्रकिया में बदलाव करना चाहिए। पुरुषों के हित को ध्यान में रखते हुए कानूनों का निर्माण होना चाहिए।
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- संकेत, चंडीगढ़।

वाइफ और हसबैंड की जगह सपाउज शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। समस्या आदमी या औरत नहीं है, समस्या ह्यूमन विंग है। जिस तरह औरतों के लिए हेल्पलाइन नंबर है, उसी तरह पुरुषों के लिए भी हेल्पलाइन नंबर की व्यवस्था होनी चाहिए। पुलिस प्रशासन को दोनों पक्ष की बात सुनकर निर्णय लेना चाहिए, बिना सबूतों के उन्हें किसी को दोषी ठहराने का हक नहीं है।
- गुरमीत सिंह, एक मामले में पीड़ित, यमुनानगर।
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