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मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने मांगा 583 करोड़ का अतिरिक्त बजट, योजना कुछ ऐसी
Fri, 05 Jul 2019 12:11 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jul 2019 12:11 PM IST
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फाइल फोटो
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यूटी प्रशासन ने चंडीगढ़ में विकास कार्यों को रफ्तार के देने को केंद्र सरकार से वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 583 करोड़ की अतिरिक्त मांग की है। बीते साल 5,300 करोड़ की डिमांड पर केंद्र ने चंडीगढ़ प्रशासन को 4,625 करोड़ दिए थे। प्रशासन के अफसरों को उम्मीद है कि केंद्र डिमांड के मुताबिक राशि मुहैया कराएगा। इस साल 5883 करोड़ की डिमांड की गई है, जिसमें 583 करोड़ अतिरिक्त है।
वीरवार को बजट को लेकर यूटी प्रशासन से लेकर पंजाब राजभवन तक चर्चा रही। डिमांड के मुताबिक केंद्र से चंडीगढ़ को बजट मिलेगा या फिर बीते साल की तरह कटौती होगी, इसे लेकर अफसरों में चर्चा होती रही। साल 2017-18 की बात करें तो प्रशासन की ओर से 6151 करोड़ मांगे गए थे। इसमें 4312 करोड़ ही मिले थे। 2018-19 में प्रशासन ने 5,300 करोड़ की मांग की थी, जिसमें 4,625 करोड़ अलॉट किया गया था।
बीते साल केंद्र सरकार ने 675 करोड़ पर कैंची चला दी थी। इस बार प्रशासन को उम्मीद है कि मांगे गए बजट को केंद्र पूरा करेगा। यही वजह है कि प्रशासन ने इस बार कुछ ज्यादा की मांग नहीं की गई है। इस संदर्भ में यूटी प्रशासन के फाइनेंस सेक्रेटरी अजोय कुमार सिन्हा का कहना है कि सिटी के विकास के लिए बजट की कोई कमी नहीं है। उम्मीद है कि जो डिमांड भेजी है, उसे केंद्र पूरा करेगा।
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बिजली खरीद के लिए 144 करोड़ की मांग
प्रशासन की ओर से एमसी के लिए 125 करोड़ के अलावा बिजली खरीद के लिए 144 करोड़ और समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग आदि जैसे कुछ अन्य विभागों के लिए मांग है। घाटे से जूझ रहे एमसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए प्रशासन से 1,024 करोड़ रुपये का वित्तीय बजट देने का प्रस्ताव की मांग की थी, लेकिन यूटी की ओर से उन्हें केवल 375 करोड़ रुपये की सहायता दी गई थी।
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वीरवार को बजट को लेकर यूटी प्रशासन से लेकर पंजाब राजभवन तक चर्चा रही। डिमांड के मुताबिक केंद्र से चंडीगढ़ को बजट मिलेगा या फिर बीते साल की तरह कटौती होगी, इसे लेकर अफसरों में चर्चा होती रही। साल 2017-18 की बात करें तो प्रशासन की ओर से 6151 करोड़ मांगे गए थे। इसमें 4312 करोड़ ही मिले थे। 2018-19 में प्रशासन ने 5,300 करोड़ की मांग की थी, जिसमें 4,625 करोड़ अलॉट किया गया था।
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बीते साल केंद्र सरकार ने 675 करोड़ पर कैंची चला दी थी। इस बार प्रशासन को उम्मीद है कि मांगे गए बजट को केंद्र पूरा करेगा। यही वजह है कि प्रशासन ने इस बार कुछ ज्यादा की मांग नहीं की गई है। इस संदर्भ में यूटी प्रशासन के फाइनेंस सेक्रेटरी अजोय कुमार सिन्हा का कहना है कि सिटी के विकास के लिए बजट की कोई कमी नहीं है। उम्मीद है कि जो डिमांड भेजी है, उसे केंद्र पूरा करेगा।
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बिजली खरीद के लिए 144 करोड़ की मांग
प्रशासन की ओर से एमसी के लिए 125 करोड़ के अलावा बिजली खरीद के लिए 144 करोड़ और समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग आदि जैसे कुछ अन्य विभागों के लिए मांग है। घाटे से जूझ रहे एमसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए प्रशासन से 1,024 करोड़ रुपये का वित्तीय बजट देने का प्रस्ताव की मांग की थी, लेकिन यूटी की ओर से उन्हें केवल 375 करोड़ रुपये की सहायता दी गई थी।