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आत्मसम्मान के लिए बीटेक की पढ़ाई की, पर नहीं मिली नौकरी और अब ट्रांसजेंडर सिमरन मांगेंगी 'बधाई'
Thu, 27 Jun 2019 12:28 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मनीमाजरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मनीमाजरा
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jun 2019 12:28 PM IST
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ट्रांसजेंडर सिमरन
- फोटो : फाइल फोटो
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नौकरी न मिलने से निराश बीटेक पास ट्रांसजेंडर सिमरन अब बधाई मांग अपना जीवनयापन करेगी। सिमरन को मंगलमुखी डेरे ने शिष्य के रूप में स्वीकार किया। मंगलमुखी ट्रांसजेंडर वेलफेयर सोसाइटी की डायरेक्टर काजल मंगलमुखी ने सिमरन प्रीत मंगलमुखी को पूरे रीति रिवाज से अपना शिष्य बनाया। कार्यक्रम के अनुसार बुधवार शाम शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा शीतला माता मंदिर, हाउसिंग बोर्ड चौक, मनीमाजरा से लेकर किन्नर डेरा मकान नंबर 1345/1, मोरी गेट, चूड़ियां वाला मोहल्ला, मनीमाजरा में जाकर समापन हुई। उसके बाद देर शाम सारे किन्नर रीति रिवाजों से सभी रस्में की गईं।
इसमें हिजड़ा समुदाय के लोग पंजाबी गिद्दा और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इस मौके पर नौकरी न मिलने से निराश सिमरन ने कहा कि देश के संविधान में ट्रांसजेंडर्स के लिए नौकरी का कोई प्रावधान नहीं है, चाहे वो पढ़ा लिखा व काबिल ही क्यों नहीं हो। इसलिए अब वह लोगों के घरों में जाकर नाच गाकर बधाई मांगने का अपने समुदाय का पारंपरिक काम करके जीवनयापन करेगा। यह पहली बार नहीं है जब किन्नर समाज में ऐसा हो रहा है। इससे पहले इसी डेरे द्वारा पढ़ाए गए कई ट्रांसजेंडर्स को शिष्य के रूप में स्वीकार किया गया है।
ट्रांसजेंडर्स के हित में कदम उठाए केंद्र सरकार
ट्रांसजेंडर वेलफेयर सोसाइटी की डायरेक्टर काजल मंगलमुखी ने कहां ने पिछले दो साल से वह केंद्र सरकार से संविधान में ट्रांसजेंडर्स के हितों में प्रावधान कर करने की अपील करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने ट्रांसजेंडर्स के लिए कोई नया नियम बनाने की कोई योजना नहीं बनाई। इसके चलते अब भी पढ़े लिखे ट्रांसजेंडर को बधाई मांग कर अपना पेट पलाना पड़ेगा।
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इसमें हिजड़ा समुदाय के लोग पंजाबी गिद्दा और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इस मौके पर नौकरी न मिलने से निराश सिमरन ने कहा कि देश के संविधान में ट्रांसजेंडर्स के लिए नौकरी का कोई प्रावधान नहीं है, चाहे वो पढ़ा लिखा व काबिल ही क्यों नहीं हो। इसलिए अब वह लोगों के घरों में जाकर नाच गाकर बधाई मांगने का अपने समुदाय का पारंपरिक काम करके जीवनयापन करेगा। यह पहली बार नहीं है जब किन्नर समाज में ऐसा हो रहा है। इससे पहले इसी डेरे द्वारा पढ़ाए गए कई ट्रांसजेंडर्स को शिष्य के रूप में स्वीकार किया गया है।
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ट्रांसजेंडर्स के हित में कदम उठाए केंद्र सरकार
ट्रांसजेंडर वेलफेयर सोसाइटी की डायरेक्टर काजल मंगलमुखी ने कहां ने पिछले दो साल से वह केंद्र सरकार से संविधान में ट्रांसजेंडर्स के हितों में प्रावधान कर करने की अपील करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने ट्रांसजेंडर्स के लिए कोई नया नियम बनाने की कोई योजना नहीं बनाई। इसके चलते अब भी पढ़े लिखे ट्रांसजेंडर को बधाई मांग कर अपना पेट पलाना पड़ेगा।
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