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10 साल में बढ़ गए 10 गुना फ्लैट्स के रेट
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के अफसरों की लापरवाही के चलते यूटी इंप्लाइज के आशियाने का रेट 10 साल में दस गुना बढ़ गया है। अपनी खुद की छत का इंतजार करते-करते करीब 35 कर्मचारी दुनिया से रुख्सत हो गए, जबकि 400 से अधिक रिटायर्ड हो चुके हैं। अब, जब फ्लैट्स मिलने की उम्मीद जगी तो रेट इतने ज्यादा हैं कि कर्मचारी अपने पूरे जीवन की पूंजी खर्च कर दें, तब भी वह फ्लैट्स की कीमत चुका नहीं पाएंगे। बताते चलें कि साल 2008 में जब यूटी इंप्लाइज की लिए प्रशासन ने ‘इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम’ बनाई थी, उस समय वन रूम सेट की कीमत 5.76 लाख थी। अब इसकी कीमत 58 तक लाख पहुंच चुकी है। ऐसे में चयनित 3930 इंप्लाइज के लिए खुद का घर बनाना किसी सपने जैसा हो गया है।
10 साल के लंबे इंतजार के बाद बीते दो जनवरी को यूटी इंप्लाइज के लिए राहत भरी खबर आई, जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सीएचबी को यूटी इंप्लाइज के फ्लैट्स के लिए भूमि के आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। केंद्र की मुहर लगने के बाद कर्मचारियों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें खुद की छत मिल जाएगी, लेकिन जब कर्मचारियों को इन फ्लैट्स की रेट की जानकारी हुई तो होश उड़ गए। साल 2008 में जब स्कीम बनी थी, उस समय के हिसाब से अब फ्लैट्स की कीमत दस गुना से अधिक बढ़ गई। अब इतनी अधिक कीमत पर कर्मचारियों ने फ्लैट्स लेने से मना कर दिया है क्योंकि इतनी अधिक कीमत चुकाना कर्मचारियों केलिए मुमकिन नहीं है।
ऐसे हुआ था कर्मचारियों का चयन
इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम के लिए 4 अक्तूूबर 2010 को ड्रा हुआ था, जिसमें 7811 आवेदकों में से 3930 आवेदकों को पात्र पाया गया था। बता दें कि 2008 में गृह मंत्रालय ने यूटी प्रशासन की इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम को रद्द कर दिया था, लेकिन भाजपा सांसद किरण खेर के प्रयास से वर्षों से लटकी हाउसिंग स्कीम को हरी झंडी मिली थी। साल 2008 में यूटी कर्मचारियों के लिए सेल्फ फाइनेंसिंग हाउसिंग स्कीम लांच की गई थी। इस स्कीम के तहत 61.5 एकड़ जमीन को हाउसिंग बोर्ड को अलॉट करने की बात कही गई थी, लेकिन गृह मंत्रालय ने इससे इनकार कर दिया था।
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-2008 में यूटी इंप्लाइज को कम रेट पर फ्लैट्स देने के लिए लागू हुई थी स्कीम
-इस स्कीम के 3930 आवंटियों ने बोर्ड के पास जमा किए 57 करोड़
-बीते 7 साल से बोर्ड केपास कर्मचारियों का जमा है 57 करोड़
-बोर्ड के पास मौजूदा समय में है 1167 एकड़ जमीन
-इंप्लाइज यूनियन के लिए चाहिए केवल 67 एकड़ जमीन
-74,131 रुपये गज के हिसाब से मिली बोर्ड को जमीन
इतने रेट में फ्लैट्स लेना संभव नहीं
इंप्लाइज को फ्लैट्स देने के लिए कैबिनेट की मंजूरी तो मिल गई, लेकिन जमीन के कलेक्टर रेट इतने अधिक हैं कि कर्मचारियों के लिए फ्लैट्स लेना संभव नहीं हो रहा है। इस संदर्भ में यूटी गवर्नमेंट इंप्लाइज सीएचबी हाउसिंग वेलफेयर सोसायटी के महासचिव डॉ. धर्मेंद्र ने बताया कि अफसरों की लापरवाही के चलते दस साल लेट हो गए। यदि सीएचबी पहले ही प्रस्ताव भेज देता तो ऐसी नौबत नहीं आती। वहीं, अपनी खुद की छत का इंतजार करते-करते करीब 35 कर्मचारी दुनिया से रुख्सत हो गए, जबकि 400 से अधिक रिटायर्ड हो चुके हैं। अब मार्केट रेट बढ़ जाने के चलते प्रशासन ने बोर्ड को 74,131 रुपये गज के कलेक्टर रेट के हिसाब से जमीन दी है। यही वजह है कि कर्मचारियों को पहले के मुकाबले अब दस गुना से अधिक रेट में फ्लैट्स पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि इतने महंगे फ्लैट्स कर्मचारी लेने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए हम प्रशासन से मांग करेंगे कि पहले के रेट पर ही कर्मचारियों को फ्लैट्स दिए जाएं।
अब होंगे छह फ्लोर
बोर्ड ने सेेक्टर 53 में 900 फ्लैट्स के निर्माण का फैसला लिया था। अब इसमें पांच फ्लोर की जगह छह फ्लोर होंगे। पहले 2000 स्क्वायर फुट के थ्री बेडरूम फ्लैट का निर्माण करने का फैसला था, लेकिन अब 1400 स्क्वायर फुट के टू बेड रूम फ्लैट और 900 स्क्वायर फीट के वन बेडरूम फ्लैट होंगे।
इस तरह 10 गुना बढ़े रेट
वन रूम फ्लैट सिटी के सेक्टर-53, 56 में फ्लैट्स बनने हैं। पहले 2008 में इनकी कीमत 5.76 लाख तय थी, अब कर्मचारियों को यह फ्लैट्स 58 लाख में मिल रहे हैं। वहीं, सेक्टर 53 में बनने वाले थ्री बेडरूम फ्लैट्स 1.76 करोड़ में मिल रहे हैं, जबकि पहले इनकी कीमत 34.70 लाख थी। इसके अलावा वन बेडरूम फ्लैट (सेक्टर-52, 56) कर्मचारियों को इस समय 99 लाख का पड़ रहा है। इस बेडरूम की कीमत पहले 13.53 लाख थी।
यूटी इंप्लाइज को ए, बी, सी और डी कैटेगरी वाइज फ्लैट्स बनने हैं। इस कैटेगरी में ऐसे फ्लैट्स बनने हैं।
ए- 252
बी- 168
सी- 3066
डी- 344
कुल- 3930
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10 साल के लंबे इंतजार के बाद बीते दो जनवरी को यूटी इंप्लाइज के लिए राहत भरी खबर आई, जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सीएचबी को यूटी इंप्लाइज के फ्लैट्स के लिए भूमि के आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। केंद्र की मुहर लगने के बाद कर्मचारियों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें खुद की छत मिल जाएगी, लेकिन जब कर्मचारियों को इन फ्लैट्स की रेट की जानकारी हुई तो होश उड़ गए। साल 2008 में जब स्कीम बनी थी, उस समय के हिसाब से अब फ्लैट्स की कीमत दस गुना से अधिक बढ़ गई। अब इतनी अधिक कीमत पर कर्मचारियों ने फ्लैट्स लेने से मना कर दिया है क्योंकि इतनी अधिक कीमत चुकाना कर्मचारियों केलिए मुमकिन नहीं है।
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ऐसे हुआ था कर्मचारियों का चयन
इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम के लिए 4 अक्तूूबर 2010 को ड्रा हुआ था, जिसमें 7811 आवेदकों में से 3930 आवेदकों को पात्र पाया गया था। बता दें कि 2008 में गृह मंत्रालय ने यूटी प्रशासन की इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम को रद्द कर दिया था, लेकिन भाजपा सांसद किरण खेर के प्रयास से वर्षों से लटकी हाउसिंग स्कीम को हरी झंडी मिली थी। साल 2008 में यूटी कर्मचारियों के लिए सेल्फ फाइनेंसिंग हाउसिंग स्कीम लांच की गई थी। इस स्कीम के तहत 61.5 एकड़ जमीन को हाउसिंग बोर्ड को अलॉट करने की बात कही गई थी, लेकिन गृह मंत्रालय ने इससे इनकार कर दिया था।
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-2008 में यूटी इंप्लाइज को कम रेट पर फ्लैट्स देने के लिए लागू हुई थी स्कीम
-इस स्कीम के 3930 आवंटियों ने बोर्ड के पास जमा किए 57 करोड़
-बीते 7 साल से बोर्ड केपास कर्मचारियों का जमा है 57 करोड़
-बोर्ड के पास मौजूदा समय में है 1167 एकड़ जमीन
-इंप्लाइज यूनियन के लिए चाहिए केवल 67 एकड़ जमीन
-74,131 रुपये गज के हिसाब से मिली बोर्ड को जमीन
इतने रेट में फ्लैट्स लेना संभव नहीं
इंप्लाइज को फ्लैट्स देने के लिए कैबिनेट की मंजूरी तो मिल गई, लेकिन जमीन के कलेक्टर रेट इतने अधिक हैं कि कर्मचारियों के लिए फ्लैट्स लेना संभव नहीं हो रहा है। इस संदर्भ में यूटी गवर्नमेंट इंप्लाइज सीएचबी हाउसिंग वेलफेयर सोसायटी के महासचिव डॉ. धर्मेंद्र ने बताया कि अफसरों की लापरवाही के चलते दस साल लेट हो गए। यदि सीएचबी पहले ही प्रस्ताव भेज देता तो ऐसी नौबत नहीं आती। वहीं, अपनी खुद की छत का इंतजार करते-करते करीब 35 कर्मचारी दुनिया से रुख्सत हो गए, जबकि 400 से अधिक रिटायर्ड हो चुके हैं। अब मार्केट रेट बढ़ जाने के चलते प्रशासन ने बोर्ड को 74,131 रुपये गज के कलेक्टर रेट के हिसाब से जमीन दी है। यही वजह है कि कर्मचारियों को पहले के मुकाबले अब दस गुना से अधिक रेट में फ्लैट्स पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि इतने महंगे फ्लैट्स कर्मचारी लेने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए हम प्रशासन से मांग करेंगे कि पहले के रेट पर ही कर्मचारियों को फ्लैट्स दिए जाएं।
अब होंगे छह फ्लोर
बोर्ड ने सेेक्टर 53 में 900 फ्लैट्स के निर्माण का फैसला लिया था। अब इसमें पांच फ्लोर की जगह छह फ्लोर होंगे। पहले 2000 स्क्वायर फुट के थ्री बेडरूम फ्लैट का निर्माण करने का फैसला था, लेकिन अब 1400 स्क्वायर फुट के टू बेड रूम फ्लैट और 900 स्क्वायर फीट के वन बेडरूम फ्लैट होंगे।
इस तरह 10 गुना बढ़े रेट
वन रूम फ्लैट सिटी के सेक्टर-53, 56 में फ्लैट्स बनने हैं। पहले 2008 में इनकी कीमत 5.76 लाख तय थी, अब कर्मचारियों को यह फ्लैट्स 58 लाख में मिल रहे हैं। वहीं, सेक्टर 53 में बनने वाले थ्री बेडरूम फ्लैट्स 1.76 करोड़ में मिल रहे हैं, जबकि पहले इनकी कीमत 34.70 लाख थी। इसके अलावा वन बेडरूम फ्लैट (सेक्टर-52, 56) कर्मचारियों को इस समय 99 लाख का पड़ रहा है। इस बेडरूम की कीमत पहले 13.53 लाख थी।
यूटी इंप्लाइज को ए, बी, सी और डी कैटेगरी वाइज फ्लैट्स बनने हैं। इस कैटेगरी में ऐसे फ्लैट्स बनने हैं।
ए- 252
बी- 168
सी- 3066
डी- 344
कुल- 3930