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मत्स्यासन से होता है मन शांत
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चंडीगढ़। योग की पाठशाला में आज हम मत्स्यासन पर चर्चा करेंगे। जीरकपुर से योग गुरु गौतम ने बताया कि मत्स्यासन में गर्दन और कमर को पीछे की ओर झुकाकर मछली के पोज में किया जाता है। यह आसन थॉयराइड ग्लैंड पर प्रभाव डालता है जिससे मन शांत होता है।
कैसे करे मतस्य आसन
दोनों हथेलियों को जमीन पर खुला हुआ रखें। अब अपने दोनों हाथों को शरीर के नीचे लाएं और उन्हें अपने कूल्हों के नीचे रखें। दोनों कोहनी एक दूसरे से अधिक दूरी पर नहीं होना चाहिए। अब अपने सीने को ऊपर की ओर उठाएं और ठीक इसी समय सिर और गर्दन को पीछे की झुकाएं और सिर जमीन से छूने दें। अपने पैर और कूल्हे को जमीन पर ही स्थिर रखें और कोहनी से बल लगाते हुए सीने को ऊपर उठाने की कोशिश करें, न कि सिर को। अंत में अपने हाथों की उंगलियों से दोनों पैरों के अंगूठे को पकड़ें और कोहनी को ढीला न होने दें। इसी मुद्रा में बने रहें और धीरे धीरे सांस लें। 15 से 30 सेकेंड तक इसी पोजिशन में रहें और फिर थोड़ी देर आराम करें। नियमित अभ्यास के बाद मत्स्यासन करने की समय अवधि को धीरे धीरे बढ़ाएं। मत्स्यासन मुद्रा से वापस निकलने के लिए पहले अपने दोनों पैरों को बड़े आराम से ऊपर उठाएं और फिर धीरे धीरे इन्हें फर्श पर सीधे फैलाएं। कुछ मिनट तक गहरी सांस लें अपनी मांसपेशियों एवं मस्तिष्क को पूरी तरह आराम दें।
मत्स्य आसन के फायदे
मत्स्यासन करने से अस्थमा रोग के लक्षण कम हो जाते हैं। इसके अलावा यह आसन श्वसन से जुड़ी बीमारियों को दूर करने में भी फायदेमंद होता है। मत्स्यासन का रोजाना अभ्यास करने से पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ती है एवं नपुंसकता की समस्या दूर हो जाती है। मत्स्यासन करने से बवासीर में होने वाली ब्लीडिंग बंद हो जाती है। प्रतिदिन तड़के सुबह पानी पीने के बाद मत्स्यासन को करने से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। साथ ही अनिद्रा की समस्या दूर हो जाती है और रात में अच्छी और गहरी नींद आती है। मत्स्यासन करने से महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाले दर्द से राहत मिलती है। इसके अलावा यह आसन थकान एवं कमर के दर्द में भी राहत देता है।
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क ौन कर सकता है आसन
उष्ट्रासन शारीरिक तौर पर स्वस्थ किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति कर सकता है। इसे कम से कम 5 बार किया जा सकता है। इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और हृदय भी स्वस्थ रखता है।
ये लोग न करें
मत्स्यासन गर्दन और मांसपेशियों से जुड़ा हुआ आसन है। इसलिए गर्दन दर्द से पीड़ित व्यक्ति इसे करने से परहेज करे। पीठ और कमर दर्द के मरीजों को एक्सपर्ट की सलाह लेने के बाद ही मतस्य आसन करना चाहिए। हर्निया के मरीजों को यह आसन नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति माइग्रेन की समस्या से पीड़ित हो तो उसे भी नहीं करना चाहिए।
सावधानियां..
यदि आप उच्च अथवा निम्न ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं तो आपको मत्स्यासन करने से बचना चाहिए। प्रेगनेंसी में मत्स्यासन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह कोख पर अधिक दबाव डालता है और इससे कई परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।
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कैसे करे मतस्य आसन
दोनों हथेलियों को जमीन पर खुला हुआ रखें। अब अपने दोनों हाथों को शरीर के नीचे लाएं और उन्हें अपने कूल्हों के नीचे रखें। दोनों कोहनी एक दूसरे से अधिक दूरी पर नहीं होना चाहिए। अब अपने सीने को ऊपर की ओर उठाएं और ठीक इसी समय सिर और गर्दन को पीछे की झुकाएं और सिर जमीन से छूने दें। अपने पैर और कूल्हे को जमीन पर ही स्थिर रखें और कोहनी से बल लगाते हुए सीने को ऊपर उठाने की कोशिश करें, न कि सिर को। अंत में अपने हाथों की उंगलियों से दोनों पैरों के अंगूठे को पकड़ें और कोहनी को ढीला न होने दें। इसी मुद्रा में बने रहें और धीरे धीरे सांस लें। 15 से 30 सेकेंड तक इसी पोजिशन में रहें और फिर थोड़ी देर आराम करें। नियमित अभ्यास के बाद मत्स्यासन करने की समय अवधि को धीरे धीरे बढ़ाएं। मत्स्यासन मुद्रा से वापस निकलने के लिए पहले अपने दोनों पैरों को बड़े आराम से ऊपर उठाएं और फिर धीरे धीरे इन्हें फर्श पर सीधे फैलाएं। कुछ मिनट तक गहरी सांस लें अपनी मांसपेशियों एवं मस्तिष्क को पूरी तरह आराम दें।
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मत्स्य आसन के फायदे
मत्स्यासन करने से अस्थमा रोग के लक्षण कम हो जाते हैं। इसके अलावा यह आसन श्वसन से जुड़ी बीमारियों को दूर करने में भी फायदेमंद होता है। मत्स्यासन का रोजाना अभ्यास करने से पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ती है एवं नपुंसकता की समस्या दूर हो जाती है। मत्स्यासन करने से बवासीर में होने वाली ब्लीडिंग बंद हो जाती है। प्रतिदिन तड़के सुबह पानी पीने के बाद मत्स्यासन को करने से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। साथ ही अनिद्रा की समस्या दूर हो जाती है और रात में अच्छी और गहरी नींद आती है। मत्स्यासन करने से महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाले दर्द से राहत मिलती है। इसके अलावा यह आसन थकान एवं कमर के दर्द में भी राहत देता है।
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क ौन कर सकता है आसन
उष्ट्रासन शारीरिक तौर पर स्वस्थ किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति कर सकता है। इसे कम से कम 5 बार किया जा सकता है। इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और हृदय भी स्वस्थ रखता है।
ये लोग न करें
मत्स्यासन गर्दन और मांसपेशियों से जुड़ा हुआ आसन है। इसलिए गर्दन दर्द से पीड़ित व्यक्ति इसे करने से परहेज करे। पीठ और कमर दर्द के मरीजों को एक्सपर्ट की सलाह लेने के बाद ही मतस्य आसन करना चाहिए। हर्निया के मरीजों को यह आसन नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति माइग्रेन की समस्या से पीड़ित हो तो उसे भी नहीं करना चाहिए।
सावधानियां..
यदि आप उच्च अथवा निम्न ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं तो आपको मत्स्यासन करने से बचना चाहिए। प्रेगनेंसी में मत्स्यासन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह कोख पर अधिक दबाव डालता है और इससे कई परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं।