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आरटीआई का जवाब ऐसे दें कि आवेदक को समझ में आए
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चंडीगढ़। सूचना का अधिकार अधिनियम यानी आरटीआई पर रविवार को पीयू में राष्ट्रीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि आरटीआई में मांगी गई जानकारी वाले प्रश्नों को ध्यान से पढ़ें और उसे समझें उसी के मुताबिक आंसर तैयार कर जवाब दें। जवाब ऐसे हों ताकि आवेदक आसानी से समझ जाएं। जानकारी घुमावदार नहीं होनी चाहिए। साथ ही समय अवधि में आरटीआई का जवाब देना चाहिए ताकि आवेदक को अधिक इंतजार न करना पड़े और उेसे दूसरी जगह दरवाजा खटखटाने की आवश्यकता न महसूस हो।
कार्यशाला का शुभारंभ डीयूआई प्रो. शंकरजी झा ने किया। उन्होंने कार्यशाला के महत्व के बारे में बताया। मुद्दे व चुनौतियों पर बात की गई। कार्यक्रम निदेशक प्रो. देविंदर सिंह, समन्वयक डॉ. हतिदंर ग्रोवर, डॉ. ज्योति रतन ने कार्यशाला पर प्रकाश डाला। आरटीआई आवेदन का मसौदा कैसे तैयार किया जाए, आरटीआई आवेदन का उत्तर कैसे दिया जाए, आरटीआई आवेदन के दायरे में क्या-क्या आता है, आदि सवालों के जवाब विशेषज्ञों ने दिए। प्रो. नरेश कुमार एमडीयू रोहतक ने अपने अनुभवों को साझा किया। हरियाणा के राज्य सूचना आयुक्त लेफ्टिनेंट जनरल कमलजीत सिंह ने भी विचार रखे। प्रो. दिलीप उप कुलपति महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, मुंबई ने आरटीआई की अवधारणा के विकास और भारत में सीटी ब्लोअर के संरक्षण के बारे में जानकारी दी।
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कार्यशाला का शुभारंभ डीयूआई प्रो. शंकरजी झा ने किया। उन्होंने कार्यशाला के महत्व के बारे में बताया। मुद्दे व चुनौतियों पर बात की गई। कार्यक्रम निदेशक प्रो. देविंदर सिंह, समन्वयक डॉ. हतिदंर ग्रोवर, डॉ. ज्योति रतन ने कार्यशाला पर प्रकाश डाला। आरटीआई आवेदन का मसौदा कैसे तैयार किया जाए, आरटीआई आवेदन का उत्तर कैसे दिया जाए, आरटीआई आवेदन के दायरे में क्या-क्या आता है, आदि सवालों के जवाब विशेषज्ञों ने दिए। प्रो. नरेश कुमार एमडीयू रोहतक ने अपने अनुभवों को साझा किया। हरियाणा के राज्य सूचना आयुक्त लेफ्टिनेंट जनरल कमलजीत सिंह ने भी विचार रखे। प्रो. दिलीप उप कुलपति महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, मुंबई ने आरटीआई की अवधारणा के विकास और भारत में सीटी ब्लोअर के संरक्षण के बारे में जानकारी दी।
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