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मार्केट कमेटी ने 4.26 करोड़ बकाया देने से किया मना
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मार्केट कमेटी ने 4.26 करोड़ बकाया देने से किया मना
एचएसवीपी जमीन का किराया लेगा तो नहीं लगेगी मंडी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। मार्केट कमेटी ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया कि वह 4.26 करोड़ रुपये बकाया राशि देने में असमर्थ है। क्योंकि कमेटी की मासिक आय तीन लाख रुपये है, जबकि व्यय इससे ज्यादा है। ऐसे में कमेटी कैसे बकाया राशि का भुगतना कर सकती है। जबकि एचएसवीपी ने पंचकूला, कालका और पिंजौर की जमीन पर मार्केट कमेटी वर्षों से अपनी/किसान मंडी लगवा रही है। लेकिन कमेटी ने आज तक एचएसवीपी को जमीन के निर्धारित रेंट के रूप में एक पैसा भी नहीं दिया है। दिसंबर 2018 तक बकाया राशि का आंकड़ा 4.26 करोड़ रुपये तक पहुंच जाने के बाद इस्टेट ऑफिसर आशुतोष राजन द्वारा कुछ दिन पहले मार्केट कमेटी सचिव को पत्र लिखकर बकाया राशि जमा करवाने के लिए कहा था। साथ ही यह भी लिखा था कि यदि कमेटी द्वारा जल्द ही बकाया न दिया गया तो एचएसवीपी अपनी जमीन पर अपनी/किसान मंडी नहीं लगने देगा। कमेटी सचिव द्वारा अब इस्टेट ऑफिसर के फरमान को हवा में उड़ाते हुए स्पष्ट जवाब दे दिया है कि कमेटी इतना भारी भरकम बकाया नहीं दे सकती है और अगर एचएसवीपी उनसे किराया मांगेगा तो अपनी/किसान मंडी नहीं लगाएंगे।
एचएसवीपी मांगताहै 7.50 लाख प्रति माह रेंट
मार्केट कमेटी सचिव द्वारा एचएसवीपी को दिए गए लिखित जवाब में कहा गया है कि एचएसवीपी द्वारा अपनी किसान मंडी के लिए जमीन का रेंट 30 हजार रुपये प्रतिदिन और 10 हजार रुपये सिक्योरिटी के रूप में फिक्स किया गया है, जो कि प्रतिमाह 7.50 लाख रुपये बनता है। जबकि अपनी किसान मंडी में लगने वाले स्टालों से हर माह करीब तीन लाख रुपये मार्केट कमेटी को फीस के रूप में मिलते हैं और उसमें से 2 लाख 10 हजार तो अपनी मंडी की साफ-सफाई करने वाला ठेकेदार ही हर महीने ले जाता है। इसके अलावा भी कुछ और खर्च करने के बाद कमेटी के पास हर महीने एक पैसा भी नहीं बचता है। सचिव ने लिखा कि इससे स्पष्ट है कि अपनी किसान मंडी सिर्फ और सिर्फ किसानों और सब्जी फ्रूट विक्रेताओं की भलाई के लिए ही नो प्रॉफिट-नो लॉस पर लगाई जा रही है।
एचएसवीपी को रेंट देना है तो बढ़ानी पड़ेगी पांच गुना फीस
मार्केट कमेटी सचिव ने पत्र में लिखा है कि कई वर्षों से कमेटी अपनी/किसान मंडी में लगने वाली स्टालों से प्रति किसान 30 रुपये और प्रति सब्जी विक्रेता 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से फीस ले रही है। जिससे कमेटी को इतनी आमदन नहीं होती कि वह एचएसवीपी को महीने का 7.50 लाख रुपये प्रतिमाह रेंट दे सके। यदि इतना भारी भरकम रेंट एचएसवीपी को चाहिए तो फीस के रेट भी कम से कम पांच गुना बढ़ाने पड़ेंगे, जोकि संभव नहीं है। क्योंकि फीस बढ़ाने से सब्जी/फ्रूट विक्रेता सब्जियों और फ्रूट के दाम भी बढ़ा देंगे।
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कमेटी मुहैया करवा रही कई सुविधाएं
सचिव ने लिखा है कि यदि अपनी/किसान मंडी नहीं लगेगी तो सरकारी जमीन पर सब तरफ अतिक्रमण ही अतिक्रमण होगा। क्योंकि कमेटी द्वारा बहुत सी सुविधाएं दी जाती हैं। मंडी में पानी की आपूर्ति, पब्लिक रेट डिसप्ले, रंगीन लाइट्स-पॉलीथिन पर पाबंदी, नकली माल पर अंकुश, ग्राहकों के आने-जाने के लिए पर्याप्त रास्ता, गलत वजन पर अंकुश, ट्रैफिक मैनेजमेंट, लोगों की सुरक्षा जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। जिसके लिए कमेटी को अपने स्टाफ पर हर महीने काफी खर्च करना पड़ता है। सचिव द्वारा एचएसवीपी के उच्च अधिकारी को लिखे पत्र में कहा गया है कि इस्टेट अफसर उन से 4 करोड़ 26 लाख रुपये बकाया देने का बार दबाव डाल रहे हैं। लेकिन वह स्पष्ट कर रहें है कि कमेटी यह बकाया और मंथली रेंट नहीं दे सकती।
एचएसवीपी के इस्टेट ऑफिसर आशुतोष राजन का कहना है कि पत्र में मार्केट कमेटी सचिव द्वारा बकाया देने के लिए मना कर दिया गया है। लेकिन विभाग को तो अपना बकाया लेना है। इसलिए अब हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर एंड मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक को पत्र लिखकर बकाया अदा करने के लिए कहा जाएगा।
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एचएसवीपी जमीन का किराया लेगा तो नहीं लगेगी मंडी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। मार्केट कमेटी ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया कि वह 4.26 करोड़ रुपये बकाया राशि देने में असमर्थ है। क्योंकि कमेटी की मासिक आय तीन लाख रुपये है, जबकि व्यय इससे ज्यादा है। ऐसे में कमेटी कैसे बकाया राशि का भुगतना कर सकती है। जबकि एचएसवीपी ने पंचकूला, कालका और पिंजौर की जमीन पर मार्केट कमेटी वर्षों से अपनी/किसान मंडी लगवा रही है। लेकिन कमेटी ने आज तक एचएसवीपी को जमीन के निर्धारित रेंट के रूप में एक पैसा भी नहीं दिया है। दिसंबर 2018 तक बकाया राशि का आंकड़ा 4.26 करोड़ रुपये तक पहुंच जाने के बाद इस्टेट ऑफिसर आशुतोष राजन द्वारा कुछ दिन पहले मार्केट कमेटी सचिव को पत्र लिखकर बकाया राशि जमा करवाने के लिए कहा था। साथ ही यह भी लिखा था कि यदि कमेटी द्वारा जल्द ही बकाया न दिया गया तो एचएसवीपी अपनी जमीन पर अपनी/किसान मंडी नहीं लगने देगा। कमेटी सचिव द्वारा अब इस्टेट ऑफिसर के फरमान को हवा में उड़ाते हुए स्पष्ट जवाब दे दिया है कि कमेटी इतना भारी भरकम बकाया नहीं दे सकती है और अगर एचएसवीपी उनसे किराया मांगेगा तो अपनी/किसान मंडी नहीं लगाएंगे।
एचएसवीपी मांगताहै 7.50 लाख प्रति माह रेंट
मार्केट कमेटी सचिव द्वारा एचएसवीपी को दिए गए लिखित जवाब में कहा गया है कि एचएसवीपी द्वारा अपनी किसान मंडी के लिए जमीन का रेंट 30 हजार रुपये प्रतिदिन और 10 हजार रुपये सिक्योरिटी के रूप में फिक्स किया गया है, जो कि प्रतिमाह 7.50 लाख रुपये बनता है। जबकि अपनी किसान मंडी में लगने वाले स्टालों से हर माह करीब तीन लाख रुपये मार्केट कमेटी को फीस के रूप में मिलते हैं और उसमें से 2 लाख 10 हजार तो अपनी मंडी की साफ-सफाई करने वाला ठेकेदार ही हर महीने ले जाता है। इसके अलावा भी कुछ और खर्च करने के बाद कमेटी के पास हर महीने एक पैसा भी नहीं बचता है। सचिव ने लिखा कि इससे स्पष्ट है कि अपनी किसान मंडी सिर्फ और सिर्फ किसानों और सब्जी फ्रूट विक्रेताओं की भलाई के लिए ही नो प्रॉफिट-नो लॉस पर लगाई जा रही है।
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एचएसवीपी को रेंट देना है तो बढ़ानी पड़ेगी पांच गुना फीस
मार्केट कमेटी सचिव ने पत्र में लिखा है कि कई वर्षों से कमेटी अपनी/किसान मंडी में लगने वाली स्टालों से प्रति किसान 30 रुपये और प्रति सब्जी विक्रेता 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से फीस ले रही है। जिससे कमेटी को इतनी आमदन नहीं होती कि वह एचएसवीपी को महीने का 7.50 लाख रुपये प्रतिमाह रेंट दे सके। यदि इतना भारी भरकम रेंट एचएसवीपी को चाहिए तो फीस के रेट भी कम से कम पांच गुना बढ़ाने पड़ेंगे, जोकि संभव नहीं है। क्योंकि फीस बढ़ाने से सब्जी/फ्रूट विक्रेता सब्जियों और फ्रूट के दाम भी बढ़ा देंगे।
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कमेटी मुहैया करवा रही कई सुविधाएं
सचिव ने लिखा है कि यदि अपनी/किसान मंडी नहीं लगेगी तो सरकारी जमीन पर सब तरफ अतिक्रमण ही अतिक्रमण होगा। क्योंकि कमेटी द्वारा बहुत सी सुविधाएं दी जाती हैं। मंडी में पानी की आपूर्ति, पब्लिक रेट डिसप्ले, रंगीन लाइट्स-पॉलीथिन पर पाबंदी, नकली माल पर अंकुश, ग्राहकों के आने-जाने के लिए पर्याप्त रास्ता, गलत वजन पर अंकुश, ट्रैफिक मैनेजमेंट, लोगों की सुरक्षा जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। जिसके लिए कमेटी को अपने स्टाफ पर हर महीने काफी खर्च करना पड़ता है। सचिव द्वारा एचएसवीपी के उच्च अधिकारी को लिखे पत्र में कहा गया है कि इस्टेट अफसर उन से 4 करोड़ 26 लाख रुपये बकाया देने का बार दबाव डाल रहे हैं। लेकिन वह स्पष्ट कर रहें है कि कमेटी यह बकाया और मंथली रेंट नहीं दे सकती।
एचएसवीपी के इस्टेट ऑफिसर आशुतोष राजन का कहना है कि पत्र में मार्केट कमेटी सचिव द्वारा बकाया देने के लिए मना कर दिया गया है। लेकिन विभाग को तो अपना बकाया लेना है। इसलिए अब हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चर एंड मार्केटिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक को पत्र लिखकर बकाया अदा करने के लिए कहा जाएगा।