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आवारा पुशओं को पकड़ नहीं सकते तो बांधों गले में रिफलेक्टर, बचे लोगों की जान
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लावारिस पशुओं को पकड़ नहीं सकते तो गले में रिफ्लेक्टर बांधों
- पंचकूला को 26 जनवरी तक कैटल फ्री बनाने के दावे फेल
- कोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए हरियाणा चीफ सेक्रेटरी ने मांगा समय
- अभी तक गौशाला का काम नहीं हुआ पूरा, शहर की सड़कों पर खुले में घूम रहे हैं पशु
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। लावारिस पशुओं से जिले को मुक्त बनाने के मामले में मंगलवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एडवोकेट पंकज चांदगोठिया ने दलील देते हुए कहा कि अगर गौशालाएं शहर की फूल हो चुकी है। नई गौशालाओं को बनने में अभी समय लग रहा है, तो शहर के लोगों की जान से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। अगर प्रशासन, नगर निगम लावारिस पशुओं को पकड़ नहीं सकते तो उनके गले में रात के समय रिफ्लेक्टर टांग दे जिससे कि सड़क पर चलने वाले शहर के लोग और बाहरी यात्री रिफ्लेक्टर के माध्यम से जानवर की पहचान कर सके। इससे सड़क दुर्घटना में कमी आएगी। जिला अदालत ने पंकज चांदगोठिया की दलील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर 26 फरवरी तक नई गोशाला नहीं बन पाएगी और शहर को लावारिस पशुओं से मुक्त नहीं बनाया गया तो लावारिस पशुओं के गले में रिफ्लेक्टर लगाने का आदेश निगम को दे दिया जाएगा। कोर्ट ने इस पर सहमति जताई है। कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
लावारिस पशुओं से शहर की सड़कों केे मुक्त बनाने के लिए जिला अदालत में मंगलवार को हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी और शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक को जवाब दाखिल करना था। सुनवाई के दौरान कोर्ट में उनकी ओर से जवाब दाखिल करने के लिए काम पूरा करने की दलील देते हुए समय मांगा गया। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई 26 फरवरी को मुकर्रर की है।
प्रशासन के दावे हो गए पस्त
प्रशासन की ओर से पंचकूला को कैटल फ्री बनाने के दावे पस्त हो गए हैं। डीसी, निगर कमिश्नर ने यह दावा किया गया है कि 26 जनवरी तक शहर की सड़कों को कैटल फ्री बना दिया जाएगा। ऐसा करने में सभी फेल हो गए हैं। गौशालाओं का काम धीमी गति से चल रहा है। इस कारण शहर में लावारिस पशु सड़कों पर घूमते हुए नजर आ रहे हैं। रात के समय अंधेरे में गाड़ी लावारिस पशुओं से टकरा जाती है।
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पुलिस और निगम की ओर से उठा जा चुके हैं सख्त कदम
पुलिस ने गांव और कालोनियों के लोगों के साथ बैठक की। बैठक के बाद पुलिस ने कहा कि जो भी व्यक्ति लावारिस अपने पशु रोड पर छोडे़ंगे तो उन पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद निगम की ओर से जो भी पशु छोड़ेंगे। उन पर पांच हजार का जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद काफी हद तक लावारिस पशुओं पर नियंत्रण किया गया। लेकिन अब वहीं ढाक के तीन पात है।
लावारिस पशु मुक्त बनाने के मुद्दे को अधिकारी हल्के में ले रहे
पंकज चांदगोठिया ने बताया कि शहर में अधिकारी लावारिस पशुओं से मुक्त कराने के लिए अगस्त 2018 में याचिका दाखिल की गई थी। पंचकूला के अधिकारियों की ओर से 26 जनवरी तक लावारिस पशुओं से मुक्त कराने के दावे किए गए। लेकिन इस तरह के हालात में शहर कैसे मुक्त होगा। यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
शहर में दिनभर घूम रहे आवारा पशु
आज लावारिस पशुओं से मुक्ति केे लेकर जिला अदालत में सुनवाई थी। लेकिन शहर के इंडस्ट्रियल एरिया फेस-2, सेक्टर-11, 15, 17 सहित सभी मार्केट में पशुओं का रोड पर जमावड़ा लगा रहा। इस तरह के हालात में भी कभी हादसा हो सकता है।
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- पंचकूला को 26 जनवरी तक कैटल फ्री बनाने के दावे फेल
- कोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए हरियाणा चीफ सेक्रेटरी ने मांगा समय
- अभी तक गौशाला का काम नहीं हुआ पूरा, शहर की सड़कों पर खुले में घूम रहे हैं पशु
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। लावारिस पशुओं से जिले को मुक्त बनाने के मामले में मंगलवार को जिला अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एडवोकेट पंकज चांदगोठिया ने दलील देते हुए कहा कि अगर गौशालाएं शहर की फूल हो चुकी है। नई गौशालाओं को बनने में अभी समय लग रहा है, तो शहर के लोगों की जान से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। अगर प्रशासन, नगर निगम लावारिस पशुओं को पकड़ नहीं सकते तो उनके गले में रात के समय रिफ्लेक्टर टांग दे जिससे कि सड़क पर चलने वाले शहर के लोग और बाहरी यात्री रिफ्लेक्टर के माध्यम से जानवर की पहचान कर सके। इससे सड़क दुर्घटना में कमी आएगी। जिला अदालत ने पंकज चांदगोठिया की दलील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर 26 फरवरी तक नई गोशाला नहीं बन पाएगी और शहर को लावारिस पशुओं से मुक्त नहीं बनाया गया तो लावारिस पशुओं के गले में रिफ्लेक्टर लगाने का आदेश निगम को दे दिया जाएगा। कोर्ट ने इस पर सहमति जताई है। कोर्ट ने कहा कि लोगों की जान से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
लावारिस पशुओं से शहर की सड़कों केे मुक्त बनाने के लिए जिला अदालत में मंगलवार को हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी और शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक को जवाब दाखिल करना था। सुनवाई के दौरान कोर्ट में उनकी ओर से जवाब दाखिल करने के लिए काम पूरा करने की दलील देते हुए समय मांगा गया। इस पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई 26 फरवरी को मुकर्रर की है।
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प्रशासन के दावे हो गए पस्त
प्रशासन की ओर से पंचकूला को कैटल फ्री बनाने के दावे पस्त हो गए हैं। डीसी, निगर कमिश्नर ने यह दावा किया गया है कि 26 जनवरी तक शहर की सड़कों को कैटल फ्री बना दिया जाएगा। ऐसा करने में सभी फेल हो गए हैं। गौशालाओं का काम धीमी गति से चल रहा है। इस कारण शहर में लावारिस पशु सड़कों पर घूमते हुए नजर आ रहे हैं। रात के समय अंधेरे में गाड़ी लावारिस पशुओं से टकरा जाती है।
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पुलिस और निगम की ओर से उठा जा चुके हैं सख्त कदम
पुलिस ने गांव और कालोनियों के लोगों के साथ बैठक की। बैठक के बाद पुलिस ने कहा कि जो भी व्यक्ति लावारिस अपने पशु रोड पर छोडे़ंगे तो उन पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद निगम की ओर से जो भी पशु छोड़ेंगे। उन पर पांच हजार का जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद काफी हद तक लावारिस पशुओं पर नियंत्रण किया गया। लेकिन अब वहीं ढाक के तीन पात है।
लावारिस पशु मुक्त बनाने के मुद्दे को अधिकारी हल्के में ले रहे
पंकज चांदगोठिया ने बताया कि शहर में अधिकारी लावारिस पशुओं से मुक्त कराने के लिए अगस्त 2018 में याचिका दाखिल की गई थी। पंचकूला के अधिकारियों की ओर से 26 जनवरी तक लावारिस पशुओं से मुक्त कराने के दावे किए गए। लेकिन इस तरह के हालात में शहर कैसे मुक्त होगा। यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
शहर में दिनभर घूम रहे आवारा पशु
आज लावारिस पशुओं से मुक्ति केे लेकर जिला अदालत में सुनवाई थी। लेकिन शहर के इंडस्ट्रियल एरिया फेस-2, सेक्टर-11, 15, 17 सहित सभी मार्केट में पशुओं का रोड पर जमावड़ा लगा रहा। इस तरह के हालात में भी कभी हादसा हो सकता है।